लोग कहानी क्यों बता देते हैं?

अल्फ्रेड हिचकॉक
Image caption अल्फ्रेड हिचकॉक रहस्य-रोमांच से भरी फ़िल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं.

कुछ लोगों का ये मानना है कि कुछ फ़िल्में जैसे 'द क्राइंग गेम' हो या 'द सिक्स्थ सेंस', इनके रोमांच भरे दृश्यों के बारे में बता देने में कुछ ग़लत नहीं है.

अमरीकी सीरियल 'ब्रेकिंग बैड' के प्रशंसक आखिरी एपिसोड की जानकारियों से बचते रहे क्योंकि वो इसे ख़ुद देखना चाहते थे.

ऐसा ही कुछ ब्रितानी कॉमेडी सीरियल 'व्हाटएवर हैपंड टू द लाइकली लैड्स' के मशहूर एपिसोड 'नो हाइडिंग प्लेस' के मुख्य किरदारों के साथ होता है.

इस एपिसोड में सीरियल के मुख्य किरदार एक पूरा दिन इंग्लैंड के फुटबॉल मैच का स्कोर जानने से बचते रहते हैं क्योंकि वे इस मैच की हाइलाइट अनजान रहते हुए देखना चाहते हैं.

यहां बात सिर्फ़ फिल्म और टेलीविज़न की ही नहीं है. उपन्यासों के पीछे छपे सारांश को लेकर भी तलवार की धार पर चलना पड़ता है.

आइन बैंक के उपन्यास 'वॉकिंग ऑन ग्लास' के पीछे छपे सारांश में उपन्यास के एक अहम मोड़ की जानकारी दे दी गई थी.

ज़्यादातर लोग जो फ़िल्म, सीरियल या उपन्यास की कहानी बताना चाहते हैं वे इससे पहले कुछ इस तरह की बात कहते हैं: "फ़िक्र मत करो. ये कुछ ख़ास नहीं है." लेकिन ये अक्सर ख़ास होता है.

'सोशल मीडिया को सब पता है'

साउथैम्पटन विश्वविद्यालय की प्रोफेसर लूसी मैज़डॉन कहती हैं कि फ़िल्म स्टूडियो की पढ़ाई करने वाले लोग फ़िल्म देखे बगैर उसके बारे में जानने को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा समझते हैं.

समाचार वेबसाइटों पर फ़िल्म की कहानी को लेकर चेतावनी लिखी होती है वहीं फ़िल्म स्टूडियो की पढ़ाई करने वाले समझते हैं कि उनके दोस्त हर शानदार फ़िल्म की कहानी जानते हैं.

मैज़डॉन कहती हैं, "ये उन चीज़ों में से है जो शैक्षणिक कामों को फ़िल्म की आलोचना से अलग करती है."

हमेशा की तरह सोशल मीडिया फ़िल्म और सीरियल की कहानी बता देने का सबसे बुरा स्रोत है. 'ब्रेकिंग बैड' के प्रशंसकों के लिए तो एक ऐप लॉन्च किया गया था ताकि वे सीरियल की कहानी को लेकर आ रहे ट्वीट को न पढ़ सकें.

ये बहस असल ज़िंदगी की चीज़ों तक भी फैल सकती है. जब साल 2001 में जूडिथ केप्पल 'हू वांट्स टू बी ए मिलियनियर' में 10 लाख पाउंड जीतने वाली पहली प्रतियोगी बनीं तो पहले रिकॉर्ड किए गए इस शो का नतीजा मीडिया में लीक कर दिया गया था.

ऐसे में शायद असली चेतावनी कुछ ऐसी होनी चाहिए : "कहानी के बारे में अहम जानकारी देना लोगों को बहुत नाराज़ कर सकता है."

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