फ़िल्म रिव्यू: 'मिकी वायरस'

  • 25 अक्तूबर 2013
मिकी वायरस

रेटिंग: **1/2

डार मोशन पिक्चर्स और ऑसम फ़िल्म्स की 'मिकी वायरस' कहानी है एक हैकर मिकी (मनीष पॉल) की. पुलिस इंस्पेक्टर सिद्धार्थ चौहान (मनीष चौधरी) उसे एक गैंग का पर्दाफ़ाश करने के लिए उस गैंग की वेबसाइट हैक करने के काम में लगाता है.

इस गैंग के दो लोगों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो जाती है और पुलिस इन दोनों मौतों की गुत्थी नहीं सुलझा पाती.

( फ़िल्म रिव्यू: 'बॉस')

मिकी इस मिस्ट्री को सुलझाने में पुलिस की मदद कर रहा होता है तभी उसकी गर्लफ़्रेंड कामायनी जॉर्ज (एली अवराम) की हत्या हो जाती है.

कामायनी मरने से पहले मिकी से एक बैंक की वेबसाइट हैक करके एक बड़ी रकम एक अकाउंट में ट्रांसफ़र करने के लिए कहती है.

चूंकि मरने से ठीक पहले वो मिकी के साथ होती है तो शक की सुई उसी की तरफ़ घूमती है. मिकी अपने दोस्तों की मदद से इस समस्या से निकलने की कोशिश करता है.

Image caption एली अवराम ने बॉलीवुड में अच्छी शुरुआत की है.

आख़िर में क्या होता है? कामायनी को किसने मारा? पहले जिन दो लोगों की हत्या हुई उन्हें किसने मारा ? क्या मिकी जिस अकाउंट में रकम ट्रांसफ़र करता है उस ट्रांसफ़र को रोक पाने में कामयाब हो पाता है ?

कहानी

सौरभ वर्मा की लिखी स्क्रिप्ट में पर्याप्त सस्पेंस है जो दर्शकों को बांधे रखता है.

कहानी रोचक है लेकिन चूंकि मिकी हैकर है, फ़िल्म के बड़े हिस्से में उसे कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हुए और इससे संबंधित ऐसे जटिल शब्दों का उपयोग करते हुए दिखाया गया है जो आसानी से सभी दर्शकों को समझ में नहीं आएँगे.

(फ़िल्म रिव्यू: 'शाहिद')

हालांकि कहानी में कई दिलचस्प मोड़ हैं, ख़ासतौर से इंटरवल के बाद फ़िल्म बेहद रोचक लगती है जो दर्शकों की रुचि बनाए रखने में कामयाब रहती है. लेकिन ये कहना होगा कि कहानी एक सिंगल ट्रैक में बढ़ती रहती है.

रोमांस तो है लेकिन उसे पूरी तरह से डेवलप नहीं किया गया. फ़िल्म में कॉमेडी है लेकिन हर तरह के दर्शक वर्ग को समझ में नहीं आएगी.

जिन लोगों को कंप्यूटर और इंटरनेट में रुचि नहीं है फ़िल्म उन लोगों को नहीं बांध पाएगी.

'मिकी वायरस' एक रोचक फ़िल्म तो है लेकिन एक सीमित वर्ग को ही पसंद आ पाएगी.

अभिनय

Image caption मनीष पॉल कैमरा के सामने बेहद सहज लगे हैं.

मनीष पॉल ने बतौर कलाकार एक शानदार शुरुआत की है. वह कैमरा के सामने बेहद सहज लगे हैं और कहीं से भी नहीं लगा कि ये उनकी पहली फ़िल्म है.

एली अवराम ने भी अच्छा अभिनय किया है लेकिन वह अपने किरदार के हिसाब से थोड़ी बड़ी लगी हैं. बाकी कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है.

(फ़िल्म रिव्यू: 'वॉर छोड़ो ना यार')

सौरभ वर्मा ने निर्देशक के तौर पर अच्छा काम किया है. हनीफ़ शेख़ का संगीत और गाने भी ठीक हैं लेकिन फ़िल्म में एक-दो बड़े हिट गानों की कमी खलती है.

कुल मिलाकर 'मिकी वायरस' एक अच्छी मनोरंजक फ़िल्म है. फ़िल्म का ड्रामा थोड़ा अलग हटकर है जो सभी लोगों को अपील नहीं कर पाएगा.

फ़िल्म को दीवाली से एक हफ़्ते पहले रिलीज़ किया गया है और ये टाइम आमतौर पर बॉक्स ऑफ़िस के लिहाज़ से अच्छा नहीं माना जाता. इसलिए फ़िल्म के बहुत अच्छा व्यवसाय करने की उम्मीद नहीं है.

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