फ़िल्म रिव्यू: 'कृष-3' कितना रोमांच पैदा करेगा?

'कृष-3'

रेटिंग: ****1/2

फ़िल्मक्राफ़्ट प्रोडक्शंस की 'कृष-3' सुपरहीरो कृष्णा की कहानी आगे बढ़ाती है. ये 'कृष' का सीक्वल है.

अलौकिक शक्तियां प्राप्त कृष्णा कई लोगों की जान बचा चुका है और मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करता है.

उसके पिता (रोहित मेहरा) का अपहरण डॉक्टर आर्य (नसीरुद्दीन शाह) कर लेता है. क्योंकि वो रोहित के अद्भुत दिमाग़ का इस्तेमाल अपने शैतानी मंसूबों को पूरे करने के लिए करना चाहता है. लेकिन कृष्णा उसके चंगुल से अपने पिता को बचा लेता है.

(रिव्यू: 'मिकी वायरस')

'कृष-3' में कृष्णा और प्रिया (प्रियंका चोपड़ा) की शादी हो चुकी है. प्रिया एक पत्रकार है.

कहानी है रोहित (ऋतिक होशन), कृष्णा (ऋतिक रोशन) और काल (विवेक ओबेरॉय) के बीच संघर्ष की.

जहां काल, अपनी शक्तियों और शैतानी दिमाग़ का इस्तेमाल मानव जाति के विनाश के लिए करता है, वहीं कृष्णा अपनी अलौकिक शक्ति का इस्तेमाल करके और अपने पिता रोहित के अद्वितीय दिमाग़ की मदद से काल के मंसूबो नाकाम करने की हर मुमकिन कोशिश करता है.

काल अपनी लेबोरटरी में मानव और जानवर को मिलाकर एक तीसरी प्रजाति मानवर (मानव+जानवर) विकसित करता है और फिर उसकी मदद से वो दुनिया में अपना प्रभुत्व जमाना चाहता है.

कृष्णा उसकी राह में दीवार बनकर खड़ा हो जाता है. क्या काल अपने शैतानी इरादों में कामयाब हो पाता है. क्या कृष्णा उसे रोक पाता है.

कृष्णा के पिता रोहित और उसकी पत्नी प्रिया का क्या होता है. क्या काल, कृष्णा को मारने में कामयाब हो जाता है. यही फ़िल्म की कहानी है.

स्क्रीनप्ले

राकेश रोशन की ये कहानी बहुत सरल है और एक आदर्श सीक्वल की तरह कोई मिल गया और कृष की कहानी को आगे बढ़ाती है.

ये शुरूआत से ही दर्शकों को बांधे रखती है. ड्रामा बेहद ख़ूबसूरती से दिखाया गया है और तकनीकी रूप से कई जटिल चीज़ों को और वैज्ञानिक तथ्यों को इतने सरल तरीक़े से समझाया गया है कि हर तरह के दर्शक वर्ग को फ़िल्म आसानी से समझ में आती है.

(रिव्यू:'बॉस')

फ़िल्म का स्क्रीनप्ले( राकेश रोशन, हनी ईरानी, रॉबिन भट्ट, आकाश खुराना और इरफ़ान कमल) कमाल का है. ये बेहद तार्किक तरीके से आगे बढ़ता है और फ़िल्म से दर्शकों का भावनात्मक रिश्ता बना रहता है.

फ़िल्म में शानदार विज़ुअल इफ़ेक्ट्स हैं.

कमियां

इंटरवल से पहले फ़िल्म रेशम की तरह बिना किसी झोल के शानदार तरीक़े से आगे बढ़ती है. इंटरवल के बाद कुछ जगह ज़रूर फ़िल्म की रफ़्तार धीमी पड़ती है.

फ़िल्म में दो चीज़ों की कमी है- कॉमेडी और रोमांस. लेकिन इसके बावजूद ड्रामा इतनी ख़ूबसूरती से फ़िल्माया गया है कि दर्शकों को किसी भी तरह की कोई कमी महसूस नहीं होती.

राजेश रोशन का संगीत उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है. फ़िल्म जिस स्तर की है उसका संगीत उस हिसाब से नहीं बन पाया है.

अभिनय

रोहित मेहरा के रोल में ऋतिक रोशन शानदार रहे हैं. वो इस किरदार में बेहद प्यारे लगे हैं और फ़िल्म का एक बेहद सशक्त पक्ष बनकर उभरे हैं. दूसरी तरफ़ वो सुपरहीरो किरदार 'कृष' के रोल में भी कमाल लगे हैं.

फ़िल्म में उन्होंने शानदार स्टंट्स किए हैं और बच्चों के बीच उनका ये किरदार बेहद मशहूर होगा. फ़िल्म में ऋतिक बेहद फ़िट लगे हैं और उनकी बॉडी बेहद आकर्षक लगी है.

प्रियंका चोपड़ा को सीमित मौक़े मिले हैं लेकिन उसमें भी वो खरी उतरी हैं. उन्होंने संजीदगी से अपना रोल निभाया है.

(रिव्यू: 'बेशरम')

एक बेहद जटिल रोल में कंगना रानाउत ने कमाल का काम किया है. विवेक ओबेरॉय, खलनायक काल के किरदार में कुछ इस कदर जमे हैं कि उनका ज़िक्र किए बिना 'कृष-3' की चर्चा अधूरी रहेगी.

फ़िल्म में उनकी एंट्री बेहद शानदार है और इस दृश्य को ज़बरदस्त तालियां मिलेंगी. बाकी कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है.

निर्देशन

राकेश रोशन का निर्देशन बेहतरीन रहा है. इतने जटिल विषय को पर्दे पर बख़ूबी उतारने के लिए वो बधाई के पात्र हैं. फ़िल्म के विज़ुअल इफ़ेक्ट्स (रेड चिलीज़ वीएफ़एक्स) ज़बरदस्त हैं और हॉलीवुड फ़िल्मों को टक्कर देते हैं. पात्रों का मेक-अप भी शानदार है.

(रिव्यू:'शाहिद')

गानों का प्रस्तुतिकरण अच्छा है. रघुपति राघव राजा राम गाने में ऋतिक का डांस बेहतरीन है.

एक्शन और स्टंट भी कमाल के हैं.

कुल मिलाकर 'कृष-3', फ़िल्म प्रेमी जनता के लिए एक उपहार है और लोगों को पसंद आएगी.

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