दिलीप साहब का जादू आज भी मेरे सर चढ़ कर बोलता है: सायरा

  • 11 दिसंबर 2013
सायरा बानो और दिलीप कुमार

सायरा बानो की फ़िल्म का एक गाना है, 'उनसे मिली नज़र के मेरे होश उड़ गए', ये गाना सायरा जी की निजी ज़िंदगी पर भी एक दम फिट बैठता है.

बारह साल की सायरा बानो की नज़र जब पहली बार दिलीप कुमार से मिली तो उसका असर सायरा जी पर कुछ ऐसा हुआ कि वो दिलीप साहब से मोहब्बत कर बैठीं. दिलीप कुमार और सायरा बानो की शादी को 57 साल हो गए हैं लेकिन आज भी सायरा जी पर दिलीप साहब का जादू बरकरार है.

भारतीय सिनेमा के महान अदाकारों में से एक दिलीप कुमार आज अपना 91वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस मौके पर उनकी बेगम सायरा बानो ने बीबीसी से साझा की अपने पुराने दिनों की यादें.

दिलीप साहब से अपनी पहली मुलाक़ात को याद करते हुए सायरा जी कहती हैं, ''दुनिया जानती है कि जब मैं 12 साल की थी तब से मेरे ज़हन में दिलीप साहब बैठे हुए हैं. दिलीप साहब तो मुझे एक बच्ची की तरह देखते थे. लेकिन मेरी नज़र में तो दिलीप साहब दुनिया से निराले थे. मुझे तो लगता था कि वो मेरे राजकुमार हैं जो एक सफ़ेद घोड़े पर बैठ कर आएंगे और मुझे ले जाएंगे''

पहली मुलाक़ात

अपनी पहली मुलाक़ात को बयान करते हुए सायरा जी आगे कहती हैं, ''हमारे एक पहचान वालों के यहां दिलीप साहब आए हुए थे. एक पार्टी थी. सब लोग दिलीप साहब का ऑटोग्राफ ले रहे थे. मुझमें तो इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं उनका ऑटोग्राफ ले लूं. इसके लिए भी मैंने अपनी एक सहेली को आगे कर दिया था. मैं उस वक्त 11 या 12 साल की रही होऊँगी. साहब लोगों से बाते करते रहे और मैं चोरी छिपे उन्हें देखती रही. फिर एक आधा बार मैं 'मुगल-ए-आज़म' की शूटिंग भी देखने गई. बस इन्हीं मुलाक़ातों में मैंने तय कर लिया था कि अगर शादी करुंगी तो साहब से ही करूँगी.''

'मुगल-ए-आज़म' से जुड़ी एक और ख़ास याद है सायरा बानो की. वो कहती हैं कि छह दिनों की तैयारी कर वो बड़े चाव से 'मुगल-ए-आज़म' के प्रीमियर पर गईं.

वो कहती हैं, ''मैंने ये सोच कर सारी तैयारी की थी कि प्रीमियर पर जब दिलीप साहब मुझे देखेंगे तो बस देखते ही रह जाएंगे. लेकिन दिलीप साहब फ़िल्म के प्रीमियर पर आए ही नहीं. मेरी सारी तैयारी धरी की धरी रह गई.''

शादी के बाद का पहला जन्मदिन

दिलीप कुमार और सायरा बानो की शादी साल 1966 में हुई लेकिन आज भी सायरा जी को दिलीप साहब का वो जन्मदिन याद है जो उन्होंने शादी के बाद पहली बार साथ में मनाया था.

उस जन्मदिन को याद करते हुए सायरा बानो कहती हैं, ''मेरी नई-नई शादी हुई थी और दिलीप साहब एक फ़िल्म की शूटिंग के सिलसिले में कोल्हापुर में थे. दिलीप साहब का जन्मदिन मनाने के लिए पूरा यूनिट जुट गया था. खूब शोर शराबा था. दिलीप साहब ने केक भी काटा था.''

अपनी बात को पूरा करते हुए सायरा बानो कहती हैं, ''मुझे आज भी याद है कि साहब ने क्या कपड़े पहने थे. उन्होंने लंबी बाज़ू की सफ़ेद कमीज़ पहनी थी. सफ़ेद ही उनकी पतलून थी. मैंने भी एक खूबसूरत सी सफ़ेद रंग की साड़ी पहनी थी. वहां हमारे साथ मुमताज़ और प्राण साहब भी थे.''

दिलीप कुमार और सायरा बानो की उम्र में 22 साल का फर्क है. तो क्या कभी ये फर्क उनके रिश्ते के बीच नहीं आया. इस सवाल का जवाब में सायरा बानो कहती हैं, ''हम दोनों के बीच उम्र के इस फर्क को हमने कभी महसूस ही नहीं किया. उल्टा अब मुझे ये लगने लगा है कि वो मेरे से छोटे हैं. उम्र के इस पड़ाव पर आकर एक बीवी होने के साथ-साथ मैं उनकी एक मां की तरह भी देखभाल करने लगी हूं.''

सायरा बानो ये भी मानती हैं कि ये भी अपने आप में एक तरह का रोमांस हैं. वो कहती हैं, ''हमारे बारे में अगर मैं कहूं तो मुझे लगता है कि उम्र के साथ हमारे बीच प्यार भी बढ़ता गया. हम तो आज भी एक दूसरे में कुछ न कुछ नया खोज ही लेते हैं. वैसे भी दिलीप साहब मेरे लिए तो एक कोहीनूर हीरे के बराबर हैं. हर दिन कुछ नया होता है उनमें.''

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार