आमिर ख़ान के साथ इस बार कितनी धूम मचेगी?

'धूम-3'

रेटिंग: ****1/2

यशराज फ़िल्म्स की 'धूम-3', धूम सीरीज़ की तीसरी फ़िल्म है. फ़िल्म में ज़बरदस्त ऐक्शन है, ड्रामा है और बेहतरीन विज़ुयल इफ़ेक्ट है.

इक़बाल हारुन ख़ान (जैकी श्रॉफ़) शिकागो में एक सर्कस का संचालक है लेकिन वित्तीय समस्याओं की वजह से सर्कस बंद करने की नौबत आ जाती है. इक़बाल ने जिस बैंक से कर्ज़ लिया होता है वो उसकी मदद करने से साफ़ इनकार कर देता है.

(आ गई आमिर की 'धूम-3')

इक़बाल ख़ान परेशान होकर ख़ुदकुशी कर लेता है और अपने पीछे छोड़ जाता है अपने छोटे बेटे साहिर को.

कई साल गुज़र जाते हैं लेकिन साहिर अपने पिता की मौत को नहीं भूल पाता और उसके लिए ज़िम्मेदार बैंक और उसके अधिकारियों से बदला लेना चाहता है. वह उस बैंक की अलग-अलग शाखाओं को लूटता रहता है और लूटी गई रकम लोगों में बाँटता रहता है.

साहिर ने बचपन में अपने पिता से जिमनास्टिक की ट्रेनिंग ली हुई होती है और साथ ही वह एक बेहतरीन जादूगर भी होता है.

इन सारी ट्रिक्स का इस्तेमाल करके वह हर बार पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो जाता है. शिकागो की पुलिस जब इस चोर को पकड़ने में नाकामयाब हो जाती है तो वो भारतीय पुलिस की मदद लेती है क्योंकि साहिर हर बार बैंक लूटने के बाद एक संदेश हिंदी में लिखकर भाग जाता है.

(नहीं बढ़ेंगे टिकटों के दाम)

भारतीय पुलिस की तरफ़ से जय दीक्षित (अभिषेक बच्चन) और अली (उदय चोपड़ा) को शिकागो पुलिस की मदद के लिए भेजा जाता है. जब साहिर को ये बात पता चलती है तो वह ख़ुद जय के पास जाता है और उसकी मदद करने का प्रस्ताव करता है ताकि वह चोर को पकड़ ले.

लेकिन आगे चलकर जय को पता चल जाता है कि साहिर ही वो चोर है. उसे पकड़ने के लिए वह जैसे-जैसे सबूत जुटाता है तो उसे साहिर के बारे में एक सीक्रेट पता लगता है जिसे जानकर वह हैरान रह जाता है.

इस बीच आलिया (कटरीना कैफ़) साहिर की सर्कस टीम में शामिल हो जाती है और दोनों के बीच इश़्क भी हो जाता है. आगे क्या होता है? क्या साहिर यूं ही बैंक लूटने के मिशन को अंजाम देता रहता है? क्या कभी जय दीक्षित, उसे पकड़ पाता है? उसे साहिर का कौन सा सीक्रेट पता लगता है? यही फ़िल्म की कहानी है.

दिलचस्प कहानी

विजय कृष्ण आचार्य और आदित्य चोपड़ा की लिखी कहानी में भरपूर रोमांच है और कई दिलचस्प मोड़ हैं. फ़िल्म में सर्कस की थीम है जो इसकी कहानी में ताज़ापन लाती है.

(आमिर का 'अफ़सोस')

विजय कृष्ण आचार्य का स्क्रीनप्ले ज़बरदस्त है और दर्शकों को बांधे रखने में पूरी तरह से कामयाब रहता है. हां फ़िल्म में कुछ उबाऊ क्षण ज़रूर आते हैं लेकिन कुल मिलाकर ड्रामा इतना ज़बरदस्त है कि अंत में आपको कोई अफ़सोस नहीं होता.

इंटरवल के बाद का हिस्सा बहुत रोमांचक और दिलचस्प है. कटरीना कैफ़ और आमिर ख़ान का रोमांस, शानदार है. दोनों के बीच के कई दृश्य बेहतरीन हैं.

उसी तरह से एक सीन में जब कटरीना, आमिर के साथ एक डेट से लौटकर वापस आती हैं तो उसके फ़ौरन बाद आमिर और अभिषेक के बीच का एक दृश्य ज़ोरदार है. फ़िल्म का क्लाइमेक्स दिल को हिला देने वाला है.

अभिनय

फ़िल्म के ऐक्शन और पीछा करने वाले सीक्वेंस शानदार हैं और हॉलीवुड फ़िल्मों को टक्कर देते हुए लगते हैं. लोकेशंस कमाल की हैं.

आमिर ख़ान का अभिनय उनके सर्वश्रेष्ठ परफ़ॉर्मेंस में से एक है. पूरी फ़िल्म में वह कमाल रहे हैं और उनका एक नया रूप दर्शकों को देखने को मिलेगा. उन्होंने फ़िल्म के लिए अपने शरीर पर बहुत मेहनत की है और उसका परिणाम भी देखने को मिलता है.

वह ऐक्शन और स्टंट दृश्यों में बहुत अच्छे रहे हैं और भावनात्मक दृश्यों में भी उनका अभिनय देखते ही बनता है.

अभिषेक बच्चन ठीक रहे हैं लेकिन कई बार सीन के हिसाब से अपने चेहरे के भाव बदलने में नाकाम रहे हैं. उदय चोपड़ा ने अच्छा काम किया है और कॉमिक दृश्यों में अच्छे लगे हैं.

जैकी श्रॉफ़ का अभिनय भी सधा रहा है. बाकी कलाकार भी ठीक रहे हैं.

निर्देशन

विजय कृष्ण आचार्य का निर्देशन बहुत उम्दा रहा है. फ़िल्म ऐक्शन से भरपूर है लेकिन वह पूरी कहानी में भावनात्मक स्पर्श लाने में पूरी तरह से कामयाब रहे हैं. उन्होंने एक ऐसी फ़िल्म बनाई है जो हर दर्शक वर्ग को अपील करेगी.

(आमिर की तमन्ना)

इस कैनवास की फ़िल्म हिंदी सिनेमा में कम ही देखने को मिली है. प्रीतम का संगीत उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाया है. ये ठीक-ठाक ही रहा है. एक भी गाना ऐसा नहीं है जिसमें सुपरहिट होने का माद्दा हो लेकिन गानों का फ़िल्मांकन ज़बरदस्त है और इसके लिए कोरियोग्राफ़र वैभवी मर्चेंट का पूरा श्रेय जाता है.

कुल मिलाकर 'धूम-3' एक बेहतरीन फ़िल्म है. इसमें एक ब्लॉकबस्टर होने के पूरे मसाले हैं. फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर इतिहास रच सकती है.

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