अभय के साथ बिना शादी भी ख़ुश हूं: प्रीति देसाई

  • 13 जनवरी 2014
अभय देओल और प्रीति देसाई

प्रीति देसाई की बॉलीवुड में अब तक पहचान अभय देओल की मित्र के रूप में ही होती रही है लेकिन अब वो अपने फ़िल्मी करियर को भी स्थापित करना चाहती हैं.

वो तुषार कपूर के साथ 'शोर इन द सिटी' नाम की फ़िल्म में दिख चुकी हैं और अब वो जल्द अभय के ही साथ दिखेंगी फ़िल्म 'वन बाय टू' में जिसमें वो एक प्रोफ़ेशनल डांसर की भूमिका निभा रही हैं. अभय ही इस फ़िल्म के निर्माता भी हैं.

अभय के साथ अपने रिश्ते को वो शादी तक कब पहुंचाना चाहती हैं. इसके जवाब में प्रीति ने कहा, "हम अपनी रिलेशनशिप से बिलकुल ख़ुश हैं. जब मुझे लगेगा कि मैं गृहस्थी बसाने के लिए, बच्चों के लिए तैयार हूं उस दिन मैं शादी कर लूंगी. लेकिन बिना शादी किए भी मैं और अभय ख़ुश हैं."

चार साल से साथ

क्या अभय देओल की गर्लफ़्रेंड होने की वजह से उन्हें फ़िल्मों में अपने पैर जमाने में आसानी होगी.

इसके जवाब में प्रीति ने कहा, "अगर ऐसा होता तो मैं कब की एक्ट्रेस बन गई होती. लेकिन मैं धीरे-धीरे इस इंडस्ट्री को समझ समझकर अपने क़दम उठाना चाहती हूं."

Image caption प्रीति देसाई की दूसरी फ़िल्म है 'वन बाय टू'. इससे पहले वो 'शोर इन द सिटी' में काम कर चुकी हैं.

बॉलीवुड में जहां दोस्ती और रिश्ते बनते बिगड़ते रहते हैं वहां अभय और उनके बीच चार साल से चली आ रही 'केमेस्ट्री' का राज़ क्या है.

(फ़िल्मी मैदान में धर्मेंद्र की तीसरी पीढ़ी)

इसके जवाब में प्रीति ने कहा, "वैसे तो चार साल ऐसा कोई लंबा अरसा भी नहीं है, लेकिन हम दोनों एक दूसरे को बेहतर तरीक़े से समझते हैं. एक दूसरे को पर्याप्त वक़्त भी देते हैं और स्पेस भी. ज़्यादा दखलंदाज़ी नहीं करते. बस, और क्या चाहिए एक रिलेशनशिप में."

'अभय बहुत रोमांटिक है'

प्रीति देसाई, फ़िल्मों में आने से पहले मॉडल थीं लेकिन वो कहती हैं कि अब मॉडलिंग छोड़कर वो पूरा ध्यान फ़िल्मों में लगाएंगी. प्रीति के मुताबिक़, "मॉडलिंग में आपका करियर बहुत लंबा नहीं हो सकता. मुझे कोई करियर तो आगे के लिए चुनना ही पड़ेगा."

(मीडिया से नाराज़ अभय)

अभय के बारे में प्रीति ने कहा, "वो बिल्कुल सामान्य लड़का है. बहुत सॉफ़्ट है. रोमांटिक है, लेकिन मैं ज़्यादा रोमांटिक हूं."

उन्होंने कहा कि वो अभय के साथ फ़िल्मों पर विचार-विमर्श करती हैं और शोर इन द सिटी के बाद उन्हें अगली फ़िल्म करने में दो साल इसलिए लग गए क्योंकि वो फ़िल्म इंडस्ट्री के तौर तरीक़ों से वाकिफ़ नहीं थीं.

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