अंतरंग दृश्यों ने की प्रीति की मदद!

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अभिनेत्री प्रीति देसाई का मानना है कि वह अपने मित्र अभय देओल को लेकर ज़रा भी 'इनसेक्योर' नहीं हैं. अभय के साथ पिछले चार साल से 'रिलेशनशिप' में चल रहीं प्रीति अब उनके साथ पहली बार बड़े पर्दे पर आने वाली हैं फ़िल्म 'वन बाय टू' में.

फ़िल्म और अभय के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "अभय के दूसरी अभिनेत्रियों के साथ अंतरंग दृश्यों से मुझे ज़रा भी परेशानी नहीं होती. क्योंकि मैं भी ऐसे दृश्य दूसरे अभिनेता के साथ कर चुकी हूं."

प्रीति इससे पहले तुषार कपूर के साथ 'शोर इन द सिटी' फ़िल्म कर चुकी हैं जिसमें उनके कुछ बोल्ड दृश्य थे.

उन्होंने कहा, "मैं अभिनेत्री नहीं होती तो शायद मुझे अभय के दूसरी अभिनेत्रियों के नज़दीक जाने पर दिक़्क़त होती. लेकिन मुझे अब आदत पड़ गई है. मुझे किसी तरह की ईर्ष्या नहीं होती."

'ग़ुस्सैल नहीं हैं अभय'

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Image caption प्रीति देसाई की पहली फ़िल्म 'शोर इन द सिटी' थी.

उन्होंने कहा कि अभय उनसे कहीं सीनियर हैं तो इस नाते वह उनसे सलाह ज़रूर लेती हैं लेकिन आख़िर फ़ैसला उनका ख़ुद का ही होता है. आम तौर पर बॉलीवुड में अभय देओल की छवि एक गुस्सैल आदमी की है.

इस पर प्रीति ने कहा, "नहीं, वह गुस्सैल नहीं हैं. जो लोग उन्हें अच्छे से नहीं जानते वही उनके बारे में ऐसा कहते हैं. हां वह थोड़े रिज़र्व तबीयत के ज़रूर हैं."

अभय के साथ शादी के सवाल पर प्रीति ने कहा, "अभी तो मेरा करियर शुरू ही हुआ है. मैं बहुत ऊंचा उड़ना चाहती हूं. शादी एक फ़ुल टाइम कमिटमेंट है. मैं वो भी करूंगी लेकिन अभी नहीं. अभी सारा ध्यान करियर पर है."

संगीत बिरादरी के साथ अभय

'वन बाय टू' की निर्देशक देविका भगत हैं और फ़िल्म सात फ़रवरी को रिलीज़ हो रही है. फ़िल्म में प्रीति ने एक डांसर की भूमिका अदा की है. फ़िल्म के हीरो होने के अलावा अभय देओल इसके निर्माता भी हैं. फ़िल्म का संगीत शंकर अहसान और लॉय ने दिया है.

हाल ही में संगीत की रॉयल्टी के मुद्दे पर अभय, गायकों और संगीतकारों के साथ खड़े नज़र आए.

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संगीत समुदाय का आरोप है कि म्यूज़िक कंपनियाँ फ़िल्म की रिलीज़ से पहले ही अपने मनमुताबिक़ अग्रिम रॉयल्टी लेने के लिए गायकों और संगीतकारों को बाध्य करती हैं और बाद में संगीत से आने वाली सारी रॉयल्टी ख़ुद रखती हैं.

अभय ने इस मुद्दे पर कहा था कि संगीत कंपनियों का ये एकाधिकार ख़त्म होना चाहिए और संगीत बिरादरी को भी उसका हक़ मिलना चाहिए.

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