पोर्न लेखक 'मस्तराम' अब फ़िल्मी पर्दे पर

मस्तराम
Image caption फ़िल्म 'मस्तराम' में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले राहुल बग्गा.

कौन है मस्तराम? कहाँ से आया मस्तराम? कहाँ रहता है मस्तराम? इन सवालों से मस्तराम के पाठकों का कोई सरोकार नहीं.

मस्तराम को पढ़ने वाले अक़सर इस पत्रिका को छिप-छिप कर पढ़ते थे. लेकिन अब सेमीपोर्न माने जाने वाले इस काल्पनिक किरदार से प्रभावित एक फ़िल्म जल्द ही बड़े पर्दे पर दिखाई देगी.

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मस्तराम नाम की इस फ़िल्म के निर्देशक हैं भोपाल के रहने वाले अखिलेश जायसवाल. बतौर निर्देशक ये अखिलेश की पहली फ़िल्म है. वह अनुराग कश्यप की बहुचर्चित फ़िल्म "गैंग्स ऑफ़ वासेपुर" के सह-लेखक थे.

"मैं भी पढ़ता था मस्तराम"

बीबीसी से ख़ास बातचीत में अखिलेश ने बताया कि उन्हें बचपन में ही मस्तराम पढ़ने का चस्का लग गया था.

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वह कहते हैं, "मैं छिप-छिप कर मस्तराम पढ़ता था. और मुझे कोई ऐसा करते पकड़ नहीं पाया."

Image caption फ़िल्म 'मस्तराम' का एक दृश्य

अखिलेश बताते हैं कि स्कूल के दिनों में ही उनके दिमाग़ में मस्तराम पर फ़िल्म बनाने का विचार आया.

अखिलेश के मुताबिक़, "मस्तराम कौन था. उसका कैसा जीवन था और उसे किन हालात में पोर्न लेखन शुरू करना पड़ा. वह अपने घर में और सोसाइटी में अपने बारे में कैसे बताता होगा, इस बात को जानने के लिए मैं बहुत उत्सुक रहा करता था."

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बड़े-बड़े राष्ट्रीय अखबारों में फ़िल्म 'मस्तराम' का पोस्टर बतौर विज्ञापन एक पूरे पेज पर 14 फ़रवरी को प्रकाशित हुआ था. अखिलेश बताते हैं, "ऐसा इसलिए किया गया ताकि लोगों को उनके वे दिन याद आ जाएं जब वे ये पत्रिका पढ़ा करते थे. और जिन्हें इसके बारे में नहीं पता उनके मन में इसे जानने की उत्सुकता जागे."

अश्लीलता को बढ़ावा?

क्या ये फ़िल्म अश्लीलता को बढ़ावा नहीं देगी. क्या मस्तराम जैसे सेमीपोर्न किरदार पर फ़िल्म बनाकर खुलेआम नग्नता को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है? अखिलेश इस आरोप को पूरी तरह नकार देते हैं.

वह कहते हैं, "ये एक काल्पनिक किरदार है. इस पत्रिका को पढ़कर देखें. इसका लेखन काफी कलात्मक और काव्यात्मक था."

लेकिन अब जो मस्तराम पत्रिका बाज़ार में उपलब्ध है, उस पर काफ़ी अश्लील होने के आरोप लगते हैं.

फ़िल्म 'मस्तराम' में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले राहुल बग्गा कहते हैं, "हमारी फिल्म अश्लील कहीं से भी नहीं है. हां ये कामुक ज़रूर है पर इसमें घटियापन नहीं है. मस्तराम की कहानियां अपने ही ढंग में कलात्मक और हास्यास्पद होती थीं."

क्या लोग फ़िल्म को देखेंगे?

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भला इस फ़िल्म को बनाने के लिए अखिलेश को फ़ंड कहां से मिला? इस तरह का किरदार जिसे एलीट कहे जाने वाले दर्शकों का प्यार ना मिलने की आशंका है, उस पर पैसा लगाने के लिए कौन तैयार हुआ?

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अखिलेश कहते हैं, "आजकल नई कहानियों की माँग है. मुझे मस्तराम के लिए निर्माता ढूंढ़ने में ज़रा भी दिक़्क़त नहीं हुई. मैंने बोरा ब्रदर्स को फ़िल्म की स्क्रिप्ट दी और एक ही दिन के अंदर उन्होंने इस पर फ़िल्म बनाने का फ़ैसला कर लिया."

फ़िल्म के ट्रेलर को यूट्यूब पर 12 लाख से ज़्यादा हिट्स मिल चुके हैं. फ़िल्म के हीरो राहुल बग्गा कहते हैं, "फ़िल्म को मिल रहे रिस्पॉन्स से हम ख़ुश हैं. लोग चाहे जो सोचें लेकिन फ़िल्म के अंदर ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे लोग इसे पोर्न फ़िल्म मानें."

फ़िल्म को सेंसर बोर्ड से एडल्ट सर्टिफ़िकेशन ही मिलेगा ऐसा अखिलेश और राहुल बग्गा मानते हैं. लेकिन दोनों ही फ़िल्म के भविष्य को लेकर ख़ासे आशान्वित हैं.

उन्हें उम्मीद है कि फ़िल्म के बारे में जो भी नकारात्मक प्रतिक्रियाएं हैं वो इसकी रिलीज़ के बाद बंद हो जाएंगी.

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