ढाई सौ से ज़्यादा ऑडिशन... और एक रोल

  • 7 मार्च 2014
Image copyright colors

भारत की वित्तीय राजधानी कहलाने वाला मुंबई घर है भारत की सबसे बड़ी टीवी और फिल्म इंडस्ट्री का. जिसे भी बचपन से जवानी तक फ़िल्मों का कीड़ा काटा उसने मुंबई का रास्ता नापा.

ये शहर हर उस इंसान को न्योता देता है जो फ़िल्मो में या अभिनय में कुछ करने की मंशा रखता है. पर ये जितना आसान लगता है उतना है नहीं.

मुंबई में कुछ ऐसे टीवी अभिनेताओं से मिलकर ये बात और भी साफ़ हो गई, जिन्होंने कड़ी मेहनत कर इस इंडस्ट्री में अपने पैर जमाए.

इस रिपोर्ट के लिए चुने गए तीन अभिनेताओं के स्ट्रगल की कहानी में कुछ ना कुछ विशेष है. शुरू करते है शशांक व्यास उर्फ़ जग्या की कहानी से....

275 बार फ़ेल, फिर मिला बालिका वधू - शशांक

रोज़ रात 8 बजे और रात 11 बजे कलर्स चैनल पर आने वाला 'बालिका-वधू' एक समय पर भारतीय टीवी का नंबर एक प्रोग्राम था.

Image caption शशांक व्यास अब जग्या के नाम से ही पहचाने जाते हैं. जग्या तक पहुंचने का कहानी संघर्ष की दास्तां है.

धारावाहिक बालिका वधू का मुख्य पात्र है जगदीश भैरों सिंह जिसे प्यार से जग्या बुलाया जाता है. जग्या का रोल निभाने वाले शशांक व्यास उज्जैन के रहने वाले है जो आज से पांच साल पहले मुंबई आए थे.

बचपन से नाटक और स्टेज का शौक़ रखने वाले जग्या ने आते ही मुंबई में अनुपम खेर के स्कूल में एक्टिंग का कोर्स शुरु किया. कोर्स के ख़त्म होने पर शुरु हुई शशांक की असली लड़ाई मुंबई से – काम की तलाश.

शशांक बताते है, "इस शहर ने मुझे असली सीख दी, जीना सिखा दिया, मैं बस में सुबह ऑडिशन देने के लिए चमचमाता हुआ घर से निकलता था और ऑडिशन के टाइम मेरी बैटरी डाउन हो जाती थी – मैं थक जाता था. सुबह शाम यहां से वहां भाग-भाग के ऑडिशन देता था- कुछ हाथ नहीं आता था. मैंने कुल मिलकर 275 से ज़्यादा ऑडिशन दिए और सभी में मैं फ़ेल."

इतने ऑडिशंस देने के बाद आख़िरकार एक दिन क़िस्मत का सिक्का चल निकला.

शशांक कहते हैं, ''एक दिन अचानक से एक कॉल आया जिसने मेरी ज़िन्दगी बदल दी. मेरी तस्वीरें वहां तक कैसे पहुंची मुझे नहीं पता, मैं लगातार एक ही प्रोडक्शन हाउस के चक्कर लगा रहा था. एक दिन पूछ लिया कि भाई क्यों बुला रहे हो – मुझे काम दोगे भी. तो उन्होंने मुझे बोला कि तुम्हें बालिका वधू के लीड रोल के लिए लिया जा रहा है. ये सुनकर मैं नर्वस हो गया. पर आज मैं एक इतने बड़े टीवी धारावाहिक का हिस्सा हूँ ये मेरे लिए बड़ी बात है.''

शशांक व्यास 'बालिका -वधू' के 1000 एपिसोड कर चुके है. रोज़ाना 14-15 घंटो की उनकी शूट रहती है और सिर्फ़ रविवार को छुट्टी मिलती है.

मेरी मुलाकात शशांक से एक कॉफ़ी शॉप में हुई जहाँ मुंबई की बसों में घूमने वाला लड़का अब एक बड़ी आलीशान गाड़ी में मुझसे मिलने आया.

इसी कड़ी में मेरी अगली मुलाकात हुई अभिषेक अवस्थी से...तस्वीर से पहचानिए...

मेरे जीवन का स्ट्रगल अभिनय नहीं राखी सावंत – अभिषेक अवस्थी

आज भी जब अभिषेक अवस्थी का नाम आता है तो राखी सावंत की सूरत साथ दिखती है. काफ़ी समय तक अभिषेक की पहचान राखी सावंत के पुरूष मित्र के तौर पर ही रही पर अब वो राखी से अलग एक व्यस्त और सुखद जीवन बिता रहे है.

लाइफ़ ओके का धारावाहिक ‘कैसा ये इश्क है’ में अभिषेक एक अहम भूमिका में नज़र आ रहे है. कानपुर से मुंबई 14 साल पहले आए अभिषेक को ये सीरियल डेढ़ साल के इंतज़ार के बाद मिला.

बिना काम के ख़ाली बैठने के अपने अनुभव को किसी स्ट्रगल से कम नहीं बताने वाले अभिषेक कहते हैं, "मेरा पिछला एक डेढ़ साल सबसे बुरा बीता, मेरे पैसे ख़त्म हो गये थे और मुझे अपनी एफ़. डी. तोडनी पड़ी. मुझे कोई काम नहीं दे रहा था."

हताश अभिषेक से मैंने पूछा कि क्या ये उनकी इमेज की वजह से था, इस पर अभिषेक ने कहा, ''हो भी सकता है, मेरे जीवन का सबसे बड़ा स्ट्रगल फ़िल्मी दुनिया में नहीं बल्कि राखी सावंत के चक्कर से निकलने में लगा है. मैंने उस रिश्ते में सब कुछ दिया और ये जानते हुए भी कि कौन ठीक है और कौन ग़लत मैंने दोस्ती निभाई, पर अब मैं ख़ुश हूँ कि मैं अब उसके साथ नहीं हूँ.'’

अभिषेक अवस्थी टीवी पर पहली बार एक सिने-स्टार खोजने वाले शो में दिखे थे. इस शो को जीतने वाले को फिल्म का कॉन्ट्रैक्ट मिलना था.

अभिषेक इस शो में दूसरे स्थान पर रहे. अभिषेक कहते हैं, "उस शो के बाद लोग मुझे जानने लगे पर काम मिलना मुश्किल था, मेरा पहला ब्रेक रिएलिटी शो ‘नच बलिये’ था.''

अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए अभिषेक बोले, "ऑडिशन देता था बात फ़ाइनल होती थी पर आगे कुछ नहीं होता था, पर मैंने कभी हार नहीं मानी. अब मैं उन बातों से आगे बढ़ चुका हूँ. अपने मौजूदा शो से मैं बड़ा ख़ुश हूँ, बेशक लीड रोल नहीं. मैं इस धारावाहिक का सलमान ख़ान हूँ."

अभिषेक अवस्थी से मेरी मुलाक़ात उनके घर में हुई जहाँ उनके साथ उनके दो कुत्ते ‘माफिया और लैला’ रहते हैं और साथ एक बिल्ली भी है.

इसके बाद स्ट्रगल की बात हुई पलक से ...कपिल शर्मा की पलक यानी किकु शारदा से. मैं पहुंचा उनके टीवी सीरियल एफ़.आई.आर के सेट्स पर.

मैंने कभी ऑडिशन नहीं दिए: किकु

टीवी की दुनिया में अब किकु को हर कोई जानता है. कभी ये एक थानेदार के रूप में तो कभी पलक की वेश भूषा में दिखते हैं. किकु मुंबई के ही रहने वाले हैं, जिन्हें कलाकार बनने के लिए ज़्यादा मशक़्क़त नहीं करनी पड़ी.

Image copyright colors

मारवाड़ी व्यापारी खानदान से ताल्लुक़ रखने वाले किकु ने कभी सोचा नहीं था की वो अभिनय करेंगे, क्योंकि उनके परिवार में ऐसा किसी ने नहीं किया था. उन्होंने एम.बी.ए. किया और अपने पिता के साथ व्यापार में लग गए.

आज अभिनय और टीवी की दुनिया में किकु को 11 साल हो गए है. अपने स्ट्रगल को स्ट्रगल ना कहते हुए किकु कहते हैं, "मुझे ज़्यादा स्ट्रगल करने की ज़रूरत नहीं पड़ी, ना मैंने ऑडिशन दिए. मेरे दोस्त शक्ति सागर – रामांनद सागर के पोते ने मुझे कॉलेज में ड्रामा और स्टेज सँभालते हुए कई बार देखा था. तो एक दिन वो मुझे बोला कि हम हातिम पर शो बन रहा है – तू करेगा. मैंने शौकिया तौर पर हाँ कह दिया और वो मुझे बड़ौदा इस टीवी शो की शूटिंग पर ले गया. बस वहीं से मेरा करियर भी शुरू हो गया."

किकु कहते हैं, ''मैं कभी खाली नहीं बैठा काफ़ी व्यस्त रहा और मेरे पास काम आता रहा. मैंने कुछ ज़्यादा स्ट्रगल भी नहीं किया. अगर काम ना भी हो तो मेरे परिवार से मुझे पूरा सपोर्ट रहेगा.''

अभिनय को सबसे बढ़िया काम बताते हुए किकु कहते है, "9 से 5 की जॉब में पैसा तो है पर पहचान नहीं, टीवी कलाकार बनकर आज मेरी कुछ पहचान तो है. मैं कॉमेडी करता हूँ – कैमरे के पीछे करता हूँ, आगे करता हूँ और खूब मज़े से 'जी रहा हूँ.''

टीवी इंडस्ट्री में स्ट्रगल करने की हर हीरो या हीरोइन की अपनी कहानी है. ये कहानियां थी कुछ लड़कों की और अगली कड़ी में बातें लड़कियों के संघर्ष की.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार