फ़िल्म रिव्यू: 'मैं तेरा हीरो'

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रेटिंग :***

बालाजी मोशन पिक्चर्स की 'मैं तेरा हीरो' एक रोमांटिक कॉमेडी यानी रोमकॉम है.

श्रीनाथ प्रसाद उर्फ़ सीनू (वरुण धवन) एक दिलफेंक किस्म का लड़का है जिसे पढ़ाई में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं है.

(एकता को लेकर चल पड़े वरुण)

उसे पढ़ाई के लिए बंगलौर भेज दिया जाता है. कॉलेज में उसकी मुलाक़ात सुनयना (इलियाना डी क्रूज़) से होती है और वो उससे इश्क़ कर बैठता है.

उधर सुनयना को अंगद नेगी (अरुणोदय सिंह) भी बहुत पसंद करता है और उससे शादी करना चाहता है.

हालांकि सुनयना, अंगद को बिलकुल पसंद नहीं करती लेकिन उसे डर है कि वो अंगद को अपने दिल की बात बताएगी तो वो उसके पिता के लिए मुश्किलें खड़ी कर देगा.

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इस बीच एक अंडरवर्ल्ड डॉन विक्रांत (अनुपम खेर) की बेटी आयशा (नरगिस फ़ख़री) को भी सीनू से प्यार हो जाता है.

अपनी बेटी की इच्छा पूरी करने के लिए विक्रांत सुनयना का अपहरण कर लेता है ताकि आयशा और सीनू की शादी करवाई जा सके.

(इलियाना, नरगिस से घिरे वरुण)

अंगद भी विक्रांत का साथ देता है ताकि वो ख़ुद सुनयना से शादी कर सके. इस बीच सुनयना को विक्रांत के चंगुल से बचाने के लिए सीनू आयशा से प्यार का नाटक करता है.

पहले तो सुनयना ये देखकर बेहद परेशान हो जाती है कि सीनू, आयशा के साथ इनवॉल्व हो चुका है लेकिन जब उसे पता चलता है कि वो ये सब उसे बचाने के लिए कर रहा है तब वो राहत की सांस लेती है.

आगे क्या होता है? क्या सुनयना और सीनू मिल पाते हैं, यही फ़िल्म की कहानी है.

मनोरंजक लेकिन तर्क से परे

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'मैं तेरा हीरो', सुपरहिट तेलुगू फ़िल्म 'कांदीरीगा' का रीमेक है. तुषार हीरानंदानी का लिखा स्क्रीनप्ले दिलचस्प है और दर्शकों को बांधे रखता है.

(नरगिस ने अक्षय को दिखाया ठेंगा)

फ़िल्म में मनोरंजन का पुट है और आम मसाला हिंदी फ़िल्मों की तरह इसमें भी कई दृश्य तर्क से परे हैं.

स्क्रीनप्ले में कई बेतुकी बातें ज़रूर हैं लेकिन वो दर्शकों का मनोरंजन करती हैं इसलिए दर्शक इस बेतुकेपन को माफ़ कर देंगे.

जहां फ़िल्म में स्वस्थ हास्य है वहीं दूसरी ओर पर्याप्त मात्रा में मसखरापन भी है. ये मिश्रण हर प्रकार के दर्शक वर्ग को पसंद आएगा.

इंटरवल से पहले ढीली, बाद में रफ़्तार

इंटरवल से पहले का हिस्सा अच्छा है लेकिन इसमें कुछ नीरसता भी है.

(नरगिस-फ़्रीडा की बोल्ड बातें)

कुछ दृश्य कॉमिक नहीं बन पाए हैं और रफ़्तार भी धीमी है.

लेकिन इंटरवल के बाद फ़िल्म अपनी पकड़ बना लेती है और दर्शकों का मनोरंजन करती है. फ़िल्म का आखिरी हिस्सा तो बड़ा मज़ेदार बन पड़ा है.

अभिनय

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वरुण धवन सीनू के रोल में बहुत जमे हैं. उन्होंने फ़िल्म में डांस, रोमांस,मार-धाड़, कॉमेडी सब कुछ किया है.

वो कैमरे के सामने बड़े सहज रहे हैं. इस फ़िल्म के बाद उनकी महिला प्रशंसकों की संख्या में ज़रूर इज़ाफ़ा होगा.

(एक 'अनार' दो 'बीमार')

इलियाना डी क्रूज़ भी सुंदर लगी हैं और सहज अभिनय किया है. नरगिस फ़ाख़री भी ग्लैमरस लगी हैं और अपना रोल ठीक से निभाया है.

अनुपम खेर ने अपने रोल में फिर से जान डाल दी है. उनके संवादों में डाला गया एको इफ़ेक्ट दर्शकों को पसंद आएगा.

अरुणोदय सिंह को जो करना था वो उन्होंने ठीक से किया है. सौरभ शुक्ला फ़िल्म का मुख्य आकर्षण बनकर उभरेंगे.

बेहतरीन सौरभ शुक्ला

फिल्म के पहले हिस्से में तो वो विक्रांत (अनुपम खेर) के एक बेहद बातूनी सहायक बने हैं और बाद में व्हीलचेयर पर बैठे एक ऐसे मरीज़ की भूमिका में हैं जो बोल नहीं सकता. अपने इन दोनों अवतारों में सौरभ ने कमाल का अभिनय किया है.

उन्होंने लोगों को खूब हंसाया. राजपाल यादव ने भी अपनी कॉमिक टाइमिंग से लोगों को हंसाया. वो भी अपने ज़बरदस्त फॉर्म में रहे. बाकी कलाकार भी ठीक हैं.

(कबाड़ हैं भारतीय फ़िल्म पुरस्कार: अनुपम खेर)

साजिद-वाजिद का संगीत पहले ही हिट हो चुका है. गानों का फ़िल्मांकन भी अच्छा है.

निर्देशन

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डेविड धवन का निर्देशन अच्छा है. इंटरवल के बाद वाले हिस्से में ख़ासतौर से फ़िल्म मनोरंजक बन पड़ी है.

(रिव्यू: 'रागिनी एमएमएस-2')

कुल मिलाकर 'मैं तेरा हीरो' आम दर्शकों को पसंद आने वाली फ़िल्म है.

फ़िल्म के निर्माताओं को लागत का अच्छा खासा हिस्सा (क़रीब 55 फ़ीसदी) इसके सैटेलाइट राइट्स बेचकर पहले ही मिल चुका है.

बॉक्स ऑफ़िस से बाकी की लागत पूरा करने फ़िल्म के लिए ख़ास मुश्किल नहीं है.

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