स्कॉटलैंड से आए भारत में छाए

बीबीसी स्कॉटिश सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा

भारत में ऑर्केस्ट्रा के मायने हैं पियानो पर तेज़ पतली धुन, जिस पर बजते ढोल और साथ में गाता एक गायक. यहाँ ज़्यादातर नाटक मंडलियों के साथ ऑर्केस्ट्रा फ़्री मिलता है.

पर यूरोप में ऑर्केस्ट्रा की परिभाषा अलग है. कई सौ सालों पहले जन्मा ऑर्केस्ट्रा एक सहज और संजीदा माध्यम है लाइव संगीत का.

(कितना मिलते हैं बंजारे और जिप्सी)

ऑर्केस्ट्रा मतलब संगीतज्ञों का एक ऐसा समूह जिसमें 80-100 के बीच कलाकार अलग-अलग वाद्य यंत्रों को बजाकर संगीत प्रस्तुत करते हैं.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

हाल ही में भारत आया स्कॉटलैंड से बीबीसी का ऑर्केस्ट्रा ग्रुप –बीबीसी स्कॉटिश सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा. इस ग्रुप ने भारत के तीन शहरों – चेन्नई, दिल्ली और मुंबई में अपने ऑर्केस्ट्रा के संगीत का जादू बिखेरा.

जिंदा है आज भी ऑर्केस्ट्रा

अपने ऑर्केस्ट्रा के बारे में बताते हुए इस ग्रुप के परिचालक जेम्स मैकमिलन बताते हैं, "हमारा काफ़ी पुराना ऑर्केस्ट्रा ग्रुप है. आज के दौर में ऑर्केस्ट्रा चलाना बेहद ही मुश्किल काम है क्योंकि इसमें पैसा बहुत लगता है और लॉजिस्टिक्स की भी दिक़्क़त है. पर ऑर्केस्ट्रा ब्रितानी संस्कृति का अहम हिस्सा है और बीबीसी इसके लिए काफ़ी सोचता है."

(चार दिन की चांदनी)

हर देश में ऑर्केस्ट्रा अलग-अलग रूप से विकसित हुआ है. आजकल के ऑर्केस्ट्रा के बारे में बताते हुए जेम्स कहते हैं, "जापान, चीन, सिंगापुर और यहाँ तक कि वेनेज़ुएला जैसे देशों में भी ऑर्केस्ट्रा आने लगा है."

एक ऑर्केस्ट्रा लगभग 30 से 40 वायलिन, 10 से 20 बांसुरी वादक, 10 ब्रास बैंड और 10 तालवादक के समूह से बनता है. इन सभी वाद्य यंत्रों का संगीत अब कंप्यूटर पर भी बनाया जा सकता है पर क्यों लोग आज भी ऑर्केस्ट्रा देखने का चाव रखें?

जेम्स बताते हैं कि, "हालाँकि तकनीक की वजह से जो संगीत ऑर्केस्ट्रा में होता हो वो कंप्यूटर पर प्रोग्राम किया जा सकता है. पर असली गहराई, जोश, और दर्शकों से जुड़ाव एक लाइव ऑर्केस्ट्रा ही कर सकता है."

युवाओं को ऑर्केस्ट्रा से मिलाना अहम

अपने इस दौरे के आख़िरी पड़ाव पर स्कॉटिश सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा ने एक अनोखी पहल की.

मुंबई में इस ऑर्केस्ट्रा ग्रुप ने लगभग 600 स्कूली बच्चों को ऑर्केस्ट्रा से रूबरू कराया.

इन छात्रों को ऑर्केस्ट्रा में इस्तेमाल होने वाले वाद्य यंत्रों के बारे में बताया गया और फिर एक फ़ैमिली कॉन्सर्ट भी आयोजित किया गया.

मुंबई में ऑर्केस्ट्रा ग्रुप के साथ एक ख़ास परफॉरमेंस देने आईं निकोला बेंडेटी, जो प्रख्यात वायलिन वादक हैं, कहती हैं, "आजकल के पॉप कल्चर से घिरे युवाओं के लिए ऑर्केस्ट्रा को समझना एक पेचीदा सवाल है."

उन्होंने कहा, "ये उनके लिए भारतीय क्लासिकल या वेस्टर्न क्लासिकल संगीत को समझने जैसा है. पर अहम बात ये है कि वे इस किस्म के संगीत से कितना जुड़ पाते हैं. अगर युवाओं को बचपन में ऐसा संगीत सुनने का मौक़ा मिले तो वे बड़े होकर अपने लिए एक बेहतर चयन कर पाएंगे."

भारत में ऑर्केस्ट्रा का घर कोलकाता

बीबीसी के साथ जुड़े सर मार्क टली भी इस ऑर्केस्ट्रा की परफॉरमेंस को देखने मुंबई पहुंचे.

टली बताते हैं, "भारत में ऑर्केस्ट्रा और वेस्टर्न क्लासिकल संगीत का घर है कोलकाता. इस साल वहां के म्यूजिक स्कूल के 100 साल पूरे हो रहे हैं. पर सबसे गंभीर बात ये है कि वहां जितनी भी बड़ी कंपनियां थीं अब नहीं रहीं जिसके चलते अब इन संगीत समारोहों को प्रायोजक नहीं मिलते. जिसकी वजह से ऑर्केस्ट्रा परफॉरमेंस कम हो गई हैं."

टली मानते हैं कि एक ऑर्केस्ट्रा परफ़ॉरमेंस बिजली से भी तेज़ शक्ति उत्पन्न करता है. इसे देखने का माहौल अपने आप में ही एक अनुभव है.

भारत में ऑर्केस्ट्रा के बारे में बात करते हुए स्कॉटिश ऑर्केस्ट्रा के जेम्स का मानना है कि आने वाले समय में भारत भी काबिल ऑर्केस्ट्रा बना सकेगा.

संगीतकार ए आर रहमान के संगीत स्कूल की ओर इशारा करते हुए जेम्स ने बताया, "उनका स्कूल एक विश्व विख्यात ऑर्केस्ट्रा बनने का दम रखता है."

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