वैम्प हुईं 64 साल की!!

बिंदु अपने अपने पति चंपक लाल के साथ इमेज कॉपीरइट champak lal

70 के दशक में बॉलीवुड की सबसे प्रसिद्ध वैम्प रहीं अभिनेत्री बिंदु का आज जन्मदिन है. वो आज पूरे 64 साल की हो गई हैं.

बिंदु जी ने लगभग 150 फ़िल्मों में काम किया है और 1970 में आई फ़िल्म 'कटी पतंग' में उनके किरदार शबनम को काफ़ी सराहा गया. इसी मौके पर बिंदु जी की बात हुई बीबीसी से जहां उन्होनें हमें बताया अपने उस गुज़रे ज़माने के बारे में.

ऐसे हुई शुरुआत

नकारात्मक छवि वाले किरदार में अभिनेत्री बिंदु ने अपनी एक अच्छी खासी पहचान बनाई है. उन्हें इसके लिए कई बार फ़िल्मफ़ेयर नॉमिनेशन भी मिला.

पर इस सब की शुरुआत कहां से हुई? इस सवाल पर बिंदु जी बोलीं, "मेरी पहली फ़िल्म थी कटी पतंग. शक्ति सामंत इस फिल्म के डायरेक्टर और प्रोडूसर थे."

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Image caption कटी पतंग में 'कैबरे' करती बिंदु.

वो आगे कहती हैं, "उन्होंने इस फ़िल्म में मुझे कैबरे डांस करने के लिए कहा. ये सुनते ही मुझे झटका सा लगा क्योंकि मैंने कभी कैबरे नहीं किया था. उन्होंने मुझसे कहा था की अगर तुम कैबरे कर सकती हो तो इस फ़िल्म में काम मिलेगा."

"मैंने इसे चैलेंज समझ स्वीकार लिया. मैंने कटी पतंग का एक गीत मेरा नाम शबनम के लिए कैबरे किया जो बाद में बहुत प्रसिध्द हुआ. इसके बाद तो मुझे सभी डायरेक्टर और प्रोडूसर ने मुझे कैबरे डांसर ही बना दिया था."

डांस में थी रूचि

बिंदु जी ने 'वैम्प' की वजह से काफी नाम तो कमाया ही पर अपने कैबरे डांस के लिए भी वो काफी जानी जाती थीं.

पर क्या वो सिर्फ़ नाम के ही लिए डांस करती थीं या उनकी इनमें कुछ दिलचस्पी भी थी?

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इस सवाल पर बिंदु ने कहा, "मेरी हर फ़िल्म में एक डांस तो रहता ही था क्योंकि प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को डिस्ट्रीब्यूटर कहता था कि उसे बिन्दु जी का डांस चाहिए."

वो आगे कहती हैं, "ऐसा नहीं है की मुझे डांस करना नापसंद था. मुझे बचपन से ही डांस का शौक था. ऐसा नहीं है कि मैंने सिर्फ वैम्प के ही किरदार निभाए, कई फिल्मों में मैंने अलग अलग किरदार भी निभाए है लेकिन में मानती हूं की मैंने ज़्यादा तर रोले वैम्प के ही किए और वैम्प के रोल के लिए डांस करना हर फ़िल्म में ज़रूरी था."

निजी जीवन पर पड़ा असर

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Image caption फ़िल्म 'ज़ंजीर' में अजित के साथ बिंदु.

'वैम्प' की छवि का असर बिंदु के निजी जीवन पर भी पड़ा. उन्हें कई बार लोगों से अजीब प्रतिक्रिया मिलती थी। उन्होनें अपनी निजी जीवन का एक किस्सा हमसे यूं बांटा.

उन्होनें कहा, "मैंने फ़िल्मो में बुरी मां की कई भूमिका निभाई हैं. मेरी बहन के बच्चे जब भी मेरे साथ फ़िल्म देखने जाते थे तो वो फ़िल्म देखते वक़्त स्क्रीन में देखते थे फिर मेरी तरफ़ देखते थे और कहते थे, 'बिन्दु आंटी आप हमारे साथ तो ऐसा नहीं करती फिर फ़िल्म में ऐसा क्यों करती हो?"

वो कहती हैं, "फ़िल्म 'अमर प्रेम' में सौतेली मां बनी थीं और एक सीन था जब मुझे बच्चे को थपड़ मारना था. उस सीन के लिए मैंने आठ से नौ टेक लिए और फिर शक्ति समानता जी ने कहा, 'बिन्दु अगर ऐसे ही करती रहोगी तो शाम हो जाएगी."

"मैंने अपने आपको बहुत समझाया और बच्चे को भी समझाया. बच्चे ने कहा 'बिंदु आंटी आप मारिये ना'! तब मैंने थपड़ मारा और बच्चा रोने लगा. वो सीन तो पूरा हो गया लेकिन उस सीन के बाद में रोने लगी."

लोगों की प्रतिक्रिया को लेकर बिंदु जी ने कहा, "जो लोग मुझे जानते थे वो तो यही कहते थे कि तुम फ़िल्मों में अलग और असल ज़िदगी में एकदम अलग हो. थिएटर में जब फ़िल्म में मेरी एंट्री होती थी तो लोग चिल्लाते थे कि ये आई है तो कुछ न कुछ गड़बड़ तो ज़रूर करेगी."

अंत में बिंदु जी कहती है कि मैं बहुत जल्द लोगों को फ़िल्मो में वापस अपनी एंट्री करके हैरान कर देंगी.

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