लो मैं फिर आ गया: हिमेश रेशमिया

फ़िल्म दि एक्सपोज़ का एक दृश्य इमेज कॉपीरइट HR films

एक पुरानी कहावत है "करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात से सिल पर पड़त निसान".

अब और कोई इस कहावत को याद करता हो न करता हो, लेकिन ऐसा मालूम पड़ता है कि हिमेश रेशमिया ने इसी कहावत को अपना मूलमंत्र बना लिया है.

(ज़ोया का थप्पड़)

संगीतकार के तौर पर ज़बरदस्त कामयाबी और गायक के तौर पर आंशिक कामयाबी हासिल कर चुके हिमेश अभिनय के मैदान में भी किस्मत आज़मा चुके हैं, लेकिन यहां उन्हें नाकामयाबी झेलनी पड़ रही है.

मगर हिमेश हिम्मत हारने को तैयार नहीं और फिर से अपनी फ़िल्म 'दी एक्सपोज़े' लेकर सिनेमा हॉल में आ चुके हैं.

यह फ़िल्म उनकी होम प्रोडक्शन है, जिसमें उन्होंने अभिनय भी किया है.

फ़िल्म में गायक हनी सिंह, इरफ़ान जैसे कलाकारों के साथ सोनाली राउत और ज़ोया अफ़रोज़ जैसी नई अभिनेत्रियां भी हैं.

बीबीसी से ख़ास बात करते हुए हिमेश इस फ़िल्म की कामयाबी के लिए बेहद आशान्वित नज़र आए.

16 मई की एकमात्र रिलीज़

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हिमेश ने इस फ़िल्म को 16 मई के दिन रिलीज़ करने का जोखिम उठाया.

(संगीत तो नहीं चुराता: हिमेश रेशमिया)

इस दिन लोकसभा चुनाव के परिणाम भी आने थे, लेकिन हिमेश तो फ़िल्म को लेकर आत्मविश्वास से भरे थे.

हिमेश कहते हैं, "मेरी फ़िल्म के मुक़ाबले कोई और फ़िल्म एक हफ़्ते तक नहीं है. ऐसे में हमारे लिए खुला मैदान है. हमें एक सप्ताह तक अच्छा व्यापार करने का मौक़ा मिलेगा."

'सब कुछ झोंक दिया'

पिछली नाकामयाबी के बाद भी हिमेश फिर से एक्टिंग की हिम्मत कैसे जुटा पाए.

इसके जवाब में हिमेश कहते हैं, "मेरी पिछली फ़िल्मों को देखने के बाद मैंने पाया कि जिस तरह की शिद्दत और जुनून से मैं अपना संगीत तैयार करता था, वैसी शिद्दत मैंने एक्टिंग में नहीं दिखाई. इसलिए मुझे कामयाबी नहीं मिली. लेकिन इस फ़िल्म के लिए मैंने अपना सब कुछ लगा दिया है, जो आपको स्क्रीन पर ज़रूर दिखेगा."

पहले से काफ़ी दुबले नज़र आ रहे हिमेश ने बताया कि वज़न कम करना भी उनकी मेहनत का हिस्सा था.

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हिमेश ने कहा, "फ़िल्म में मेरे किरदार के लिए मेरा पतला होना बहुत ज़रूरी था. मैंने ठान लिया था कि इसके लिए जो करना होगा करूंगा. मैंने इसके लिए 12-12 घंटों के अंतराल पर खाना खाया और जिम में ट्रेनिंग की मदद से 20 क़िलो वज़न घटाया."

हिमेश ने यह भी बताया कि चेहरे को पतला करने के लिए उन्होंने ख़ास चेहरे को प्रभावित करने वाली कसरत की.

हालांकि चेहरे की कसरत से उनका चेहरा पतला तो नज़र आया लेकिन शायद वह इस पर भाव नहीं ला पाए.

'दी एक्सपोज़े' देखने के बाद कम से कम समीक्षकों की तो यही राय थी.

'एक्सपोज़े' नहीं कहानी

1960 के दशक के बॉलीवुड पर आधारित यह कहानी कई फ़िल्मों की याद दिलाती है.

जहां 'सत्यम शिवम सुंदरम' के ज़ीनत अमान के मंदिर वाले सीन को दोहराया गया है, वहीं फ़िल्म में बिकिनी पहने हीरोइनें भी नज़र आ रही हैं.

ऐसे में यह पूछे जाने पर कि क्या फ़िल्म में 'एक्सपोज़' जरूरत से ज़्यादा है.

हिमेश कहते हैं,"फ़िल्म में सिर्फ़ कहानी की ज़रूरत देखते हुए ही एक्सपोज़ किया गया है. यहां एक्सपोज़ से अर्थ है मर्डर मिस्ट्री का राज़ खोलना. आप इसे दूसरे अर्थों में न लें."

हनी सिंह का डेब्यू

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फिल्म में युवाओं में लोकप्रिय गायक यो यो हनी सिंह भी अपनी एक्टिंग करियर की शुरुआत कर रहे हैं.

हनी सिंह के किरदार पर हिमेश ने बताया,"हमें नेगेटिव शेड्स वाला एक किरदार चाहिए था, लेकिन जो थोड़ा मासूम भी लगे. उन्हीं दिनों हनी से मेरी मुलाक़ात हुई और हनी ने इस रोल में अपनी दिलचस्पी दिखाई. इसके बाद फि़ल्म के निर्देशक अनंत महादेवन ने हनी को फ़ाइनल किया."

फिलहाल फ़िल्म को लेकर हिमेश आश्वस्त हैं कि ये फ़िल्म लोगों को ज़रूर पसंद आएगी, लेकिन अगर फ़िल्म पिट जाती है तो क्या फिर वो एक्टिंग से दूरी बनाएंगे.

इस पर हिमेश का जवाब था, "मैंने लोगों की आलोचना को कभी दिल पर नहीं लिया और अपना काम किया है. यह नहीं चली तो फिर कोशिश करूंगा, जब तक लोग मुझे स्वीकार नहीं कर लेते."

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