मैंने रणबीर कपूर के बाप से डांस कराया: सुभाष घई

कालीचरण, कर्ज़, कर्मा, सौदागर, परदेस, राम लखन, ताल.. 80 और 90 के दशक में सुभाष घई ने एक से बढ़कर एक हिट फ़िल्में दी हैं.

वह न सिर्फ अपनी इन ख़ास फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, बल्कि अपने ख़ास ट्रेडमार्क अंदाज़ के साथ वह अकसर फ़िल्म के किसी सीन में भी ज़रूर नज़र आते हैं.

वैसे पिछले कुछ वर्षों में उनकी फ़िल्मों ने ज़्यादातर लोगों को निराश किया है. बीते दिनों उनकी फिल्म काँची रिलीज़ हुई.

बीबीसी ने सुभाष घई से बातचीत की.

पिछले कुछ अर्से से आपने फ़िल्में बनाना काफ़ी कम कर दिया है. ब्लैक एंड व्हाइट, युवराज, काँची जैसी चंद ही फ़िल्में बनाई हैं.

हाँ, ये सही है कि अब निर्देशन का काम कम हो गया है. इसकी बड़ी वजह है मेरा इंस्टीट्यूट जहां हम नई पीढ़ी को सिनेमा के गुर सिखाते हैं.

जीवन में एक समय पर आकर आपको लगता है कि जिस इंडस्ट्री ने इतना कुछ दिया वहां हमें भी कुछ देना चाहिए. ज़्यादातर समय इंस्टीट्यूट में जाता है. अब हाल ही में फ़िल्म काँची बनाई थी.

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Image caption माधुरी दीक्षित को बड़ा प्लैटफ़ॉर्म देने में सुभाष घई का हाथ रहा है

बड़े सितारों के साथ-साथ आप हमेशा से अपनी फिल्मों में नए या उभरते कलाकारों को जगह देते रहे हैं. जैकी हों, माधुरी दीक्षित हों...पारखी नज़र कहाँ से लाते हैं?

पारखी नज़र की बात नहीं है. आप किरदार के हिसाब से कलाकार चुनते हैं.

जब परदेस बना रहा था तो कई लोगों ने कहा कि सब बड़े नाम लो लेकिन मैने अपूर्व अग्निहोत्री को लिया. महिमा चौधरी को लिया.

कई बार रोल के मुताबिक कलाकार तलाश करने में वक़्त लगता है लेकिन वो जो भी हो भूमिका में सही बैठना चाहिए.

आपकी फिल्मों के गाने काफ़ी मशहूर रहते हैं. आज भी गीत-संगीत का कितना रोल है सिनेमा में?

संगीत को मैं बहुत ज़रूरी मानता हूँ. हाँ, ये ज़रूर है कि बदलते समय के साथ अब चीज़ें बदल गई हैं.

अब फ़िल्मों में गानों की संख्या कम हो गई है, पहले ख़ूब लंबे-लंबे गाने हुए करते थे अब गाने छोटे हो गए हैं लेकिन गीत-संगीत की अहमियत कम नहीं हुई है.

सिनेमा भी बदल रहा है. हर तरह की फ़िल्में बन रही हैं.. मेनस्ट्रीम भी, कम बजट की भी, ये अच्छी बात है.

आपने ऋषि कपूर के साथ फ़िल्म कर्ज़ में काम किया था और अब इतने सालों बाद 2014 में. ये रियूनियन कैसा रहा?

ऋषि के साथ इतने सालों बाद फिर काम किया, बड़ा मज़ा आया. उन्होंने मेरी लेटेस्ट फ़िल्म काँची में रोल किया है.

उन्हें लोगों ने आम तौर पर रोमांटिक रोल में देखा है तो सोचा कुछ अलग करवाया जाए.

लोग आजकल रणबीर कपूर को डांस करते हुए देखते हैं, मैने ऋषि कपूर से डांस करवाया. नई पीढ़ी भी तो देखे तो रणबीर का बाप क्या कमाल कर सकता है.

आप अकेले ऐसे निर्देशक हैं जिन्होंने दिलीप कुमार और राज कुमार को साथ काम करने के लिए मनाया. ज़्यादातर बड़े नामों के साथ काम कर चुके हैं. कलाकारों के साथ इतनी अच्छी कैमिस्ट्री का राज़?

निर्देशक का काम होता है कि वह अपने कलाकारों को समझे. मैं उनका सम्मान करता हूं और बदले में वे भी मुझे प्यार करते हैं.

निर्देशक का रोल कभी-कभी मां जैसा होता है. इतने साल हो गए इंडस्ट्री में, ये गुडविल मेरी कमाई है.

आपकी एक झलक अकसर लोगों को फ़िल्मों में मिल जाती है.. कोई ख़ास वजह रहती है ?

बस फ़िल्मों में आता हूँ दर्शकों के लिए. अकसर मैं फ़िल्म में किसी न किसी सीन में नज़र आ जाता हूँ. इस बार काँची में एक गाने में दिखा हूँ- लोगों को इंतज़ार रहता है कि कब दिखूंगा.

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