'द एक्सपोज़े' में कितना दम है?

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रेटिंग: **1/2

एच आर म्यूज़िक की 'द एक्सपोज़े' एक सस्पेंस थ्रिलर है. फ़िल्म की कहानी 60 के दशक पर केंद्रित है.

बॉलीवुड हीरोइन ज़ारा (सोनाली राउत) को एक पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिलता है लेकिन उसके चंद घंटों बाद ही उनकी मौत हो जाती है.

उन्हें जिस फ़िल्म के लिए बेहतरीन अभिनय का पुरस्कार मिलता है, वो बॉक्स ऑफ़िस पर फ़्लॉप रहती है.

(रिव्यू : 'देख तमाशा देख')

ख़ुदकुशी है या मर्डर?

सुपरस्टार रवि कुमार (हिमेश रेशमिया) और ज़ारा (सोनाली राउत) एक दूसरे को ज़्यादा पसंद नहीं करते. फिर भी वो एक साथ एक फ़िल्म में काम करते हैं.

ज़ारा जो पैसों के लिए कुछ भी करने को तैयार है, वो रवि को दीवानों की तरह चाहने लगती है और उसके क़रीब आने की पूरी कोशिश करती है.

पर रवि कुमार जो एक बड़ा सुपरस्टार है, उसका ज़मीर उसे कुछ भी ग़लत करने से रोकता है और वो ज़ारा को नज़रअंदाज़ करता रहता है.

( फ़िल्म रिव्यू: 'कांची')

रवि कुमार को एक दूसरी अभिनेत्री से प्यार होता है जिसका नाम होता है चांदनी (ज़ोया अफ़रोज़).

चांदनी की फ़िल्म भी उसी दिन रिलीज़ होती है जिस दिन रवि और ज़ारा की फ़िल्म रिलीज़ होती है.

चांदनी की फ़िल्म हिट हो जाती है और रवि कुमार की फ़िल्म फ़्लॉप हो जाती है.

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रवि कुमार के निर्देशक हैं सुब्बा राओ (अनंथ नारायण महादेवन) और चांदनी की फ़िल्म के निर्देशक हैं बॉबी चड्ढा (अश्विन धर).

केडी (यो यो हनी सिंह) एक स्ट्रगलिंग संगीतकार जो एक ही गाना दो निर्देशकों को बेच देता है. जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है पता चलता है कि ज़ारा का मर्डर हुआ है. किसने किया ज़ारा का मर्डर और क्यों?

पटकथा और संवाद

हिमेश रेशमिया की लिखी कहानी दर्शकों को बांधे रखने में थोड़ी बहुत कामयाब रही.

हिमेश रेशमिया और जैनेश इजारदार की लिखी कहानी काफ़ी तेज़ गति से चलती है और दर्शकों को सोचने का वक़्त नहीं देती.

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(रिव्यू : 'हवा हवाई')

60 के दशक के बॉलीवुड को बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ दर्शाया है और संगीत ने इसमें काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

फ़िल्म का सस्पेंस काफ़ी जल्दी सामने आ जाता है जो एक तरह से दर्शकों को बोर नहीं होने देता.

बंटी राठोर के संवाद बहुत मज़ेदार हैं और दर्शकों के चेहरे पर कई बार मुस्कराहट छोड़ जाते हैं.

अभिनय और निर्देशन

हिमेश रेशमिया एक बहुत ही संजीदा किरदार निभाते हैं जो बहुत ही कम मुस्कुराता है और ज़्यादातर डायलॉग्स बहुत ही सीधे अंदाज़ में बोलता है.

रवि का किरदार ही कुछ ऐसा है जो उन्हें एक्टिंग करने का ज़्यादा मौका नहीं देता है.

सोनाली राउत (ज़ारा) ने बहुत अच्छा डेब्यू किया है. वो बहुत ही ग्लैमरस लगी हैं और अपने हाव भाव का उन्होंने बिलकुल सही इस्तेमाल किया है.

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Image caption सोनाली राउत ने 'द एक्सपोज़' में ज़ारा का किरदार निभाया है.

( रिव्यू : 'टू स्टेट्स')

ज़ोया अफ़रोज़ ने भी चांदनी का किरदार बहुत ही अच्छे से निभाया है. यो यो हनी सिंह का बहुत ही छोटा सा किरदार है जिसमें उन्होंने अच्छा काम किया है.

अनंत नारायण महादेवन का निर्देशन अच्छा है. वो पूरी फ़िल्म में दर्शकों को बांधे रखते हैं और ये सोचने पर मजबूर करते हैं कि आख़िर ज़ारा का क़ातिल कौन है?

कुल मिलाकर 'द एक्सपोज़' एक अच्छी सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म है और फ़िल्म के संवाद एक तरह से इस फ़िल्म की सबसे बेहतरीन चीज़ है.

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