'प्रेरणा' के सहारे चल रही दुकान!

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बॉलीवुड कॉपी करता है हॉलीवुड से और हॉलीवुड भी कॉपी करता है कुछ कोरियाई फ़िल्मों से.

यह ऐसी प्रथा है जो पिछले कई साल से बदस्तूर चल रही है.

चाहे गाने हों, कहानी हो या फिर पोस्टर, बॉलीवुड फ़िल्में बनाने के साथ-साथ नकल में भी काफ़ी माहिर है.

अभी हालिया रिलीज़ फ़िल्म 'एक विलन' एक कोरियाई फ़िल्म 'आय सॉ द डेविल' से काफ़ी मिलती-जुलती है.

लोगों ने सोशल मीडिया पर इस पर काफ़ी शोर भी मचाया.

इस पर मोहित सूरी से जब बीबीसी ने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, ''देखिए ऐसा कोई भी फ़िल्मकार नहीं है, जो किसी फ़िल्म से प्रेरित न हो.''

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ऐसा ही वाकया निर्देशक अनुराग बसु के साथ हुआ. जिन पर फ़िल्म 'बर्फ़ी' के लिए कॉपी करने का इल्ज़ाम लगा. लोगों ने सोशल मीडिया पर 'बर्फ़ी' से मिलती-जुलती फ़िल्मों के वीडियो डाल दिए थे.

पुरानी सोच

फ़िल्म समीक्षक नम्रता जोशी कहती हैं, 'यहां बस फ़िल्म 'आय सॉ द डेविल' से काफ़ी कुछ कॉपी-पेस्ट किया गया है.'

वह कहती हैं, ''ऐसा पुराने समय में होता था, जब फ़िल्मों की कहानी बिना उस फ़िल्म से जुड़े इंसान को बताकर कॉपी की जाती थी. जैसा संजय गुप्ता ने किया अपनी फ़िल्म 'ज़िंदा' में, जो एक कोरियन फ़िल्म 'ओल्ड बॉय' की कॉपी है.''

नया तरीका

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ऐसा भी नहीं कि सभी फ़िल्मकार कहानी कॉपी करते हैं और उसे गुप्त रखते हैं.

साल के शुरुआत में आई फ़िल्म ‘सिटी लाइट्स’ प्रतिष्ठित बाफ़्टा नामित फ़िल्म 'मेट्रो मनिला' की रीमेक है और इसके लिए इसके राइट्स भी ख़रीदे गए.

नम्रता कहती हैं, ''अगर बॉलीवुड में आइडिया की कमी है और उन्हें नए मज़ेदार आइडियाज़ चाहिए, तो उन्हें फ़िल्म के राइट्स ख़रीदने चाहिए और फ़िल्म ‘सिटी लाइट्स’ इसका एक उदाहरण है.''

सवाल यह है कि क्या वाक़ई बॉलीवुड में आइडिया की कमी है या यह एक आइडिया चुराने का नया तरीका है?

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