संगीतकार बनने आए थे, गायक बन गए मीका

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उनका असली नाम है अमरीक सिंह, जिन्हें आप मीका के नाम से जानते हैं. 'सिंह इज़ किंग', 'इब्न बतूता' 'ढींका चीका' जैसे हिट गाने इनकी झोली में हैं. मीका इन दिनों लंदन में बड़े शो की तैयारी में है.

बीबीसी से मीका सिंह की मुलाक़ात के मुख्य अंश:

म्यूज़िक इंडस्ट्री में आपको 16 साल हो गए. कैसा रहा अब तक का सफ़र?

साल 1997 में मेरा गाना आया था 'सावन में लग गई आग' जो हिंदी में था. मैं पंजाबी बैकग्राउंड से था. मेरे पंजाबी फ़ैन्स थोड़ा नाराज़ ज़रूर हो गए थे तो उनके लिए मैं पंजाबी में गाने रिकॉर्ड करता रहा. फिर 2007 में मेरा गाना 'मौजां ही मौजां' हिट हुआ 'जब वी मैट' के लिए. यानी शुरुआती सात साल मैने पॉप इंडस्ट्री में निकाले और 2007 से बॉलीवुड में जगह मिलने लगी, जो अब तक जारी है.

हमने सुना है कि आप कम से कम 15 इंस्ट्रूमेंट बजा लेते हैं और असल में संगीतकार बनना चाहते थे ?

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मुझे तो शुरू से संगीतकार ही बनना था इसलिए मैने तबला, गिटार, कॉन्गो, ढोल, हारमोनियम समेत 15 यंत्र सीखे. जब तक मैंने इंडस्ट्री में कदम रखा, तो वह दौर आ चुका था कि आपको सिर्फ़ गाना कंपोज़ करना था. कोई इंस्ट्रूमेंट बजाने की ज़रूरत नहीं रही. मैं तो गाना लिख भी रहा था, कंपोज़ भी कर रहा था, बजा भी रहा था. मैने सोचा चलो पहले गाना गाते हैं. शायद किसी की नज़र चली जाए और संगीतकार बनने का मौका मिल जाए. धीरे-धीरे मेरे गाए गाने हिट होने लगे और मैं गायक बन गया.

आप गानों का चयन कैसे करते हैं बॉलीवुड में?

ज़ाहिर है चुनिंदा गाने ही गाने पड़ते हैं. अगर मैं रोज़ गाना रिकॉर्ड करने लगा, तो समझो साल के क़रीब 900 गाने हो जाएंगे क्योंकि हर रोज़ तीन गानों के ऑफ़र आते हैं.

ये तो हुई फ़िल्मी बातें पर फ़िल्मों के बाहर मीका की दुनिया कैसी है?

मैं अपनी एक संस्था चलाता हूं, जिसका नाम है- डिवाइन टच. इसमें हम क़रीब 600 लड़कियों को शिक्षा दिलाते हैं. कोई न कोई ऐसा कोर्स कराते हैं, जिससे वो रोज़ी-रोटी कमा सकें, अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. मैं इस काम को और बढ़ाना चाहता हूं.

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