वो औरतें जिनके निशाने पर हैं मर्द

  • 4 अगस्त 2014
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Image caption (पाकिस्तानी मूल की शाज़िया मिर्ज़ा ब्रिटेन में स्टैंड अप कॉमेडियन के तौर पर शो करती हैं)

अक्सर मर्दों को अपनी महफ़िलों में औरतों का मज़ाक उड़ाने वाले चुटकुले चटख़ारे लेकर सुनाते देखा और सुना गया है. लेकिन कुछ ऐसी औरतें भी हैं जो उन्हें टक्कर देने को तैयार हैं.

मिलिए ऐसी ही कुछ महिलाओं से जिनके 'निशाने' पर आ गया है 'मर्द समाज'.

अक्सर कहा जाता है कि लड़कियां ठीक से गाड़ी नहीं चला पातीं. इस पर दिल्ली की रहने वाली स्टैंड अप कॉमेडियन नीति पाल्टा कहती हैं, "मर्द सदियों से गाड़ी चला रहे हैं तो उन्हें इसकी आदत है. हमने तो कभी नहीं कहा कि पुरुषों को साड़ी पहननी नहीं आती."

'शर्मीले, मासूम मर्द'

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आम धारणा है कि महिलाएँ बोलती बहुत हैं.

मुंबई की स्टैंड अप कॉमेडियन अदिति मित्तल कहती हैं, "हां, औरतें बोलती हैं और बेचारे शर्मीले, मासूम मर्द चुप रहते हैं. इसलिए तो जब लड़की की ख़ूबसूरती की तारीफ़ करनी होती है तो उन्हें शब्द ही नहीं मिलते. बेचारों को अजीब सी आवाज़ें निकालनी पड़ती हैं. कभी आइटम कह कर लड़कियों को संबोधित करते हैं तो कभी पुच-पुच की आवाज़ें निकालते हैं."

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अदिति कहती हैं कि बेचारे लड़के, लड़कियों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं इसलिए उनके पास पढ़ाई का वक़्त नहीं बचता और वो पीछे रह जाते हैं.

अदिति इसका समाधान भी बताती हैं, "लड़कियों के कपड़ों पर किताबें छाप दो. लड़के अपने आप शिक्षित हो जाएंगे."

'मेरे पापा पीछे से अच्छे हैं'

अदिति कहती हैं कि अक्सर उनके पास शो के बाद कुछ बुज़ुर्ग शुभचिंतक पुरुष आते हैं और कहते हैं, "अगर मैं ऐसे बातें करूंगी तो मेरी शादी नहीं होगी." अदिति उन्हें जवाब देती हैं, "ना तो मैंने आपको प्रपोज़ किया है और ना ही अपनी शादी की ज़िमन्मेदारी आपके कंधों पर डाली है. इसलिए चिंता ना करें."

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ब्रिटेन मे रहने वाली पाकिस्तानी मूल की शाज़िया मिर्ज़ा से जब लोग पूछते हैं कि अक्सर उनकी मां उनके पिताजी के पीछे क्यों चलती हैं तो वो जवाब देती हैं, "मेरे पापा पीछे से ही अच्छे हैं. इसलिए मां हमेशा पीछे चलती है."

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