क्या इसमें कोई 'एंटरटेनमेंट' है?

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रेटिंग *

मुझे नहीं पता कि सिनेमा हॉल में फ़िल्म शुरू होने से पहले दिखाए जाने वाले कर्क-रोग चेतावनी (या कैंसर रोग की चेतावनी) वाले विज्ञापन आपको भी उतने खीझ भरे लगते हैं या नहीं.

मुझे तो लगता है कि अक्षय कुमार की 'बॉस', 'वंस अपॉन अ टाइम दोबारा', 'खिलाड़ी 786',' राउडी राठौड़', 'देसी बॉयज़' के ख़िलाफ़ चेतावनी देने की ज़रूरत है.

अगर फेफड़े बच जाएं, तब भी ये फ़िल्में किसी की दिमाग़ी सेहत के लिए बेहद ख़तरनाक हो सकती हैं.

कहानी

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यहां एक कुत्ता है, जिसका नाम 'एंटरटेनमेंट' है. वो बैंकॉक में 3000 करोड़ रुपए के बिज़नेस साम्राज्य का मालिक है.

अक्षय फ़िल्म में ख़ुद को पिता की नाजायज़ औलाद (डीएनए) या कुत्ते के मृत मालिक का बेटा कहते हैं. 'दुर्घटना में मारने के 50 तरीक़े' नाम की किताब पढ़कर वो कुत्ते को मारने के अलग-अलग तरीक़े ढूंढते रहते हैं.

इत्तेफ़ाक से 'एंटरटेनमेंट' ने भी यह किताब पढ़ रखी है. इसलिए अक्षय की हर चाल उन पर ही उल्टी पड़ जाती है.

आख़िरकार 'एंटरटेनमेंट' और अक्षय में दोस्ती हो जाती है. दोनों मिलकर करन और अर्जुन नाम के विलेन से लड़ते हैं, जिन्हें प्रकाश राज और सोनू सूद ने निभाया है.

आप वाकई इससे ज़्यादा कुछ और जानना नहीं चाहेंगे, लेकिन मैं अपना कुछ दर्द आपके साथ बांटना चाहूंगा ताकि मेरा दर्द थोड़ा कम हो जाए.

अक्षय कुत्तों की विभिन्न प्रजातियों से बातचीत करते हैं. वह एक जर्मन शेफ़र्ड से पूछते हैं ''क्या तुम्हारे पापा कभी जर्मनी गए हैं?''

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वो एक सेंट बर्नाड को कहते हैं ''अगर मेरा चेहरा तुम्हारे जैसा होता तो मैं अपने मां-बाप पर मुक़दमा कर देता.''

अक्षय का साथ देने के लिए फ़िल्म में हैं गोविंदा के प्रतिभावान भतीजे कृष्णा अभिषेक, जो अपने हर डायलॉग में एक एक्टर का नाम लेते हैं जैसे ''तू पंकज उधास होकर मत बैठ'' या फिर मेरी पसंदीदा लाइन ''मैं रजनीकांत इसमें भरोसा करता हूं.''

निर्देशन

ये साजिद-फ़रहाद की निर्देशक के तौर पर शुरूआत है. फ़िल्म के पीछे सिंघम, बोल बच्चन और चेन्नई एक्सप्रेस जैसी ब्लॉकबस्टर फ़िल्में देने वाले लेखकों की टीम है.

ये फ़िल्म साजिद ख़ान की 'हमशकल्स' को तुलनात्मक रूप से बेहतर दिखने में मदद करती है.

लगता है कि फ़िल्म के नाम के बारे में भी वो इतने असमंजस में थे कि नाम दे दिया ‘इट्स एंटरटेनमेंट’.

अगर यही मनोरंजन है तो मैं यह जानना चाहता हूं कि दो घंटे से ज़्यादा वक़्त तक अपना सिर दीवार पर पटकने के लिए भी पैसे देने पड़ें, तो उसे कहेंगे.

कृपया जवाब न दें.

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