कितना ऊंचा है ये 'एवरेस्ट'?

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फ़िल्म निर्देशक आशुतोष गोवारीकर ने छोटे पर्दे पर धारावाहिक 'एवरेस्ट' से अपनी शुरुआत कर दी है.

कई लोगों ने टेलीविज़न के बरसों से चले आ रहे सास-बहू के धारावाहिक का स्वाद बदलने की कोशिश की है लेकिन नतीजा सिफ़र ही रहा है.

निर्माता-निर्देशक आशुतोष गोवारीकर का 'एवरेस्ट' एक ऐसी ही कोशिश के रूप में सामने आता है.

क्या है कहानी ?

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एवरेस्ट की कहानी है अंजलि सिंह रावत की, जो मांउट एवरेस्ट की चोटी छूना चाहती हैं, ताकि वह अपने पिता कर्नल ब्रिगेडियर जगत सिंह के दिल में जगह बना सकें.

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यह जगह अंजलि को इसलिए बनानी पड़ रही है क्योंकि जगत सिंह को एक लड़के की आस थी जो उनका नाम रोशन करता लेकिन अब उन्हें चिंता है कि अंजलि के चलते अब उनका नाम दुनिया में रोशन कौन करेगा.

पत्रकार आकाश जोशी के रूप में कहानी में एक और पहलू है. आकाश एक बड़े व्यवसायी रमेश रूंगटा के कहने पर जानेमाने पर्वतारोही अर्जुन सभरवाल की अगली एवरेस्ट यात्रा को कैमरे में क़ैद करने के लिए तैयार हो जाता है.

ये पहलू कहानी को कुछ थामता सा लगता है.

क्या है ख़ास ?

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पहले ही एपिसोड में एवरेस्ट की चढ़ाई के जो दृश्य दिखाए गए वो सांस रोक देने वाले हैं. ये दृश्य साफ़ कर देते हैं कि आगे आने वाले समय में इस धारावाहिक में आप कुछ बेहद ख़ूबसूरत नज़ारों से रूबरू होने वाले हैं.

अंजलि के सख़्त पिता के किरदार में मनीष चौधरी और बेबस मां के किरदार में किशोरी शहाणे फ़िट बैठते हैं.

हालांकि अंजलि का किरदार जो इस धारावाहिक का सबसे अहम किरदार भी है उसे निभाने के लिए एक न्यूकमर शमाता अंचन को मौक़ा दिया गया है.

चढ़ाई शुरू हुई है

इस धारावाहिक में भले ही कितनी ही कमियां निकाली जाएं लेकिन अभी भी इसे सिरे से ख़ारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए यह एक आशुतोष गोवारीकर का प्रोडक्ट है.

पूरी उम्मीद है कि इस शो के अंत में भी कुछ रोमांचक होगा क्योंकि कहते हैं न कि 'अंत भला तो सब भला'.

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