इंसान एक मुखौटे कई!

दीपल दोशी

बीते हफ़्ते राजधानी दिल्ली में हुआ मुखौटों से भरा एक नाटक.

किरदार तक़रीबन आठ और उन्हें करने वाला बस एक इंसान.

वो एक इंसान हैं मुंबई में रहने वाले दीपल दोशी जो कि 'मैडबॉल को' नाम की एक थिएटर कंपनी चलाते हैं.

ये अकेले ऐसे शक़्स हैं जो भारत में 'कॉमेडीया डेल'आर्ते' करते हैं और सिखाते हैं.

'कॉमेडीया डेल'आर्ते' इटली की 16वीं शताब्दी की एक नाट्य शैली है जिसमें मुखौटों का इस्तेमाल होता है

दीपल शुरू से नाटक करते आ रहे हैं और इन्होनें थिएटर में पोस्ट ग्रेजुएशन किया हुआ है.

दीपल की धर्मपत्नी कैथरीन दोशी भी उन्हीं के साथ थिएटर करती हैं और नाटकों का निर्देशन भी करते हैं.

नाटक 'अ टेल ऑफ़ टू ट्रीटीज़' एक बहुत ही मज़ाक़िया नाटक है जिससे दीपल और उनकी पत्नी कैथरीन ने बनाया है. इनका ये शो स्वीडन, बाली, अमेरिका, कनाडा में भी दिखाया गया है.

दीपल बताते हैं कि ये मुखौटे बहुत ही महंगे होते हैं. एक मुखौटा आठ से 10 हज़ार रूपए के बीच बिकता है.

भारत में 'छऊ' नृत्य होता है जिसमें मुखौटों का इस्तेमाल होता है. दीपल के मुताबिक़ उन्हें इटली की शैली 'छऊ' के मुक़ाबले ज़्यादा अच्छी लगी.

नाटक में हर एक किरदार के हिसाब से अपनी आवाज़, अपनी बॉडी लैंग्वेज बदलनी पड़ती है जिसमें कई बार कलाकार(दीपल) ख़ुद को ही भूल जाते हैं.

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