'जेब में सात रुपए के साथ मुंबई पहुँचे थे'

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सिर्फ़ सात रुपए लेकर मुंबई आए रॉनित रॉय आज सात करोड़ से भी ज़्यादा की संपत्ति के मालिक हैं.

लेकिन वह भूले नहीं हैं कि उनकी पहली फ़िल्म की सफलता के बावजूद उन्हें बॉलीवुड में वो मुकाम हासिल नहीं हुआ जो बड़े स्टार्स को हासिल है.

रॉनित अपने धारावाहिक 'इतना करो ना मुझसे प्यार' में नचिकेत खन्ना का किरदार निभा रहे हैं जो 18 नवंबर से शुरू हुआ है.

ये कहानी एक ऐसे पति-पत्नी की है जो अपनी शादी टूटने के 14 साल बाद फिर मिलते हैं.

मुंबई

होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने आए थे. पर उन्हें क्या पता था कि ज़िंदगी उन्हें एक स्टार बना देगी.

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रॉनित कहते हैं, "मैंने अहमदाबाद से इंजीनियरिंग की है और मैं अहमदाबाद से बिना टिकट के मुंबई आ गया. फिर मुंबई पहुंच कर मैंने होटल मैनजमेंट का कोर्स किया. पर जब मैं और मेरा एक दोस्त मुंबई आए, तब हमारी जेब में सिर्फ़ सात रुपए थे."

वो बताते हैं, "मैं और मेरा दोस्त दो डिब्बों के बीच बैठकर मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर उतरे उस वक्त मेरी जेब में सात रुपए थे जिसका हमने खाना खा लिया तो वो भी ख़त्म हो गए."

फिर आगे काम करने के लिए मैंने एक होटल (सी रॉक होटल) में बर्तन साफ करने से शुरुआत की.

जिंदगी में बदलाव

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रॉनित के जीवन में उनके पिताजी के देहांत के बाद काफ़ी बदलाव आया.

उन्होंने कहा, "हर किसी की ज़िंदगी में बदलाव का एक क्षण होता है मेरी ज़िंदगी में मेरे पिताजी का देहांत वो था. मैंने होटल की नौकरी छोड़ दी और फैसला किया अब मैं दोबारा उस होटल में स्टार बनकर ही जाउँगा और फिर मैंने सिनेमा की तरफ़ रुख़ किया."

रॉनित ने बताया की वह पांच साल निर्देशक सुभाष घई के घर में रहे और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सुभाष घई के साथ बतौर सह निर्देशक की थी.

एकता का साथ

रॉनित ने एकता कपूर के साथ 10 साल काम किया है. उन्होंने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' और 'कसौटी जिंदगी की' में काम किया है.

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रॉनित एकता के बारे में कहते हैं, "अगर एकता के बारे में कहूं तो मैं आज छोटे पर्दे पर उनकी वजह से आया हूं. एकता से मैं 'कमल' नाम के एक शो के लिए मिला जो मैंने एक साल किया. फिर उन्होंने मुझे 'कसौटी जिंदगी की' दिया. उसके तुरंत बाद उन्होंने मुझे 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' दे दिया जिसमें मैंने लगभग आठ साल काम किया."

रॉनित की सख्त आदमी की इमेज जो बॉलीवुड फ़िल्मों में अक्सर दिखाई देती है उसके बारे में वो कहते हैं कि असल ज़िंदगी में उन्होंने इतनी मुश्किलों का सामना किया है कि चेहरा कठोर बनाने में उन्हें ज़्यादा तकलीफ़ नहीं होती.

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