इंडस्ट्री जैसे देवेन को भूल गई थी: मौशमी

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सीधे, सपाट चेहरे के साथ बिन 'ओवर द टॉप' हुए कॉमेडी करने के लिए देवेन वर्मा विख्यात थे.

गुलज़ार की फ़िल्म अंगूर में संजीव कुमार के साथ उनकी जुगलबंदी को भला कौन भूल सकता है.

देवेन वर्मा के निधन के बाद उनके साथ काम कर चुके कुछ कलाकारों ने देवेन की शख्सियत के बारे में कुछ बातें बीबीसी के साथ बांटी.

मौशमी चटर्जी

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फ़िल्म अंगूर की शूटिंग के दौरान उनके साथ बिताया गया समय भुलाए नहीं भूलता.

वो फ़िल्मों में कॉमिक किरदार निभाते थे लेकिन असल ज़िंदगी में भी उतने ही हंसमुख थे.

मैंने पुणे में उनके और उनकी पत्नी रूपा गांगुली के साथ ख़ासा समय बिताया है.

रूपा दीदी, अशोक कुमार की छोटी बेटी हैं. बेचारी अकेली हो गईं. मैं उनके लिए बड़ी चितिंत हूं.

देवेन जी को रेस का बड़ा शौक था. वो अक्सर पुणे के रेसकोर्स जाते थे.

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वो गाते भी बहुत अच्छा थे. पिछले कुछ सालों से वो पुणे शिफ़्ट हो गए थे. फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग जैसे उन्हें भूल ही गए थे.

ये बात बड़े दुख की है. अंगूर में मैंने, संजीव कुमार और देवेन वर्मा के साथ बेहतरीन वक़्त बिताया.

अब अंगूर के मेरे दोनों सहकलाकार चले गए हैं. मैं भी अब ज़िंदा नहीं रहना चाहती.

अरुणा ईरानी

मैं तो उनके निधन की ख़बर सुनकर स्तब्ध हूं. उनके साथ मैंने दो दर्ज़न से ज़्यादा फ़िल्में कीं.

फ़िल्मों में वो जैसे किरदार निभाते थे. उससे कहीं ज़्यादा ज़िंदादिल वो असल ज़िंदगी में थे.

जिस दिन उनके साथ शूटिंग होती थी हम सब ख़ुश हो जाते थे कि आज तो मज़ा आएगा.

फ़िलहाल इससे ज़्यादा मैं कुछ बोल नहीं पाऊंगी.

राकेश बेदी, कलाकार

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जितने साफ़ सुथरे तरीके से बिना शोर शराबे के देवेन वर्मा कॉमेडी करते थे वैसी कॉमेडी अब देखने को नहीं मिलती.

संजीव कुमार और देवेन वर्मा जैसे कलाकार बिना ओवर एक्टिंग का शिकार हुए बड़े सहज ढंग से हास्य पैदा कर देते थे वो बहुत कम देखने को मिलता है.

देवेन वर्मा, हिंदी सिनेमा के अच्छे और ख़ुशहाल समय के प्रतीक थे.

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