फ़िल्म रिव्यू: क्या 'पीके' का नशा चढ़ेगा?

'पीके' इमेज कॉपीरइट UTV

फ़िल्म: 'पीके'

निर्देशक: राजकुमार हीरानी

कलाकार: आमिर ख़ान, अनुष्का शर्मा

रेटिंग: ***

क्या 'पीके' महज़ एक जोक है? ऐसा हो सकता था. फ़िल्म का हीरो एलियन की तरह लगता है.

फ़िल्म के रिलीज़ से पहले इसका प्लॉट ऐसे छुपा कर रखा गया था जैसे ये कोई नेशनल सीक्रेट हो.

इमेज कॉपीरइट UTV

मुझे लगता है कि ये एक नासमझी थी, क्योंकि यही तो इस फ़िल्म की सबसे ख़ास बात है जिसे रिलीज़ से पहले ख़ासा प्रचारित किया जाना चाहिए था.

ज़बरदस्त आमिर

मेरे हिसाब से अभिनय के लिहाज़ से ये आमिर ख़ान का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.

क्योंकि एक प्रकार से ये एक मौलिक भूमिका थी जिसका कोई संदर्भ बिंदु नहीं है.

इमेज कॉपीरइट UTV

हां उनका रोल थोड़ा बहुत मिस्टर बीन से ज़रूर मिलता है.

लेकिन पूरी फ़िल्म में वो नेचुरल लगे हैं. दुबले-पतले, बड़े कानों और लाल होंठ वाले आमिर बड़ा लुभाते हैं.

पूरी फ़िल्म में उन्होंने बड़ी आला दर्जे की भोजपुरी बोली है.

सवाल उठाती है फ़िल्म

इमेज कॉपीरइट RHF

एलियन का किरदार फ़िल्म अपना संदेश देने मात्र के लिए इस्तेमाल करती है. वो फ़िल्म की मुख्य थीम नहीं है. क्योंकि ये कोई विज्ञान फ़ंतासी फ़िल्म नहीं है.

एलियन जैसा एकदम अलग किरदार ही इस दुनिया के कुछ बेवकूफ़ाना रीति-रिवाजों को बिलकुल निष्पक्ष तरीके से देखकर उन पर सवालिया निशान लगा सकता है?

धर्म और जात-पात के नाम पर हम जो मूर्खतापूर्ण भेदभाव करते हैं उन्हें 'पीके' चैलेंज करती है.

'पीके' भगवान के बारे में बात करना चाहती है.

धर्म के नाम पर जो रीति-रिवाज चल रहे हैं. कथित संत, महात्मा जो लोगों को बेवक़ूफ़ बना रहे हैं उनके बारे में बात करती है पीके.

कहानी

इमेज कॉपीरइट Aamir Khan Productions

पीके की दोस्त, टीवी रिपोर्टर (अनुष्का शर्मा) उसकी ख़बर टीवी पर दिखाना चाहती है लेकिन उसका बॉस (बोमन ईरानी) कथित धर्मगुरुओं और राजनीतिक पार्टियों के दबाव में ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहता.

भारत में ज़्यादातर समाचार चैनलों के मालिक इस मनोदशा को अच्छी तरह समझ सकते हैं.

अच्छा संदेश

इमेज कॉपीरइट HOTURE

आज के दौर में भारतीय उपमहाद्वीप समेत पूरी दुनिया में धर्म और संप्रदाय के नाम पर हिंसा मची है.. ऐसे में हमारी इस मूर्खता पर पीके तंज कसती है.

इस मामले में फ़िल्म की जितनी तारीफ़ की जाए कम है.

मैं उम्मीद करता हूं कि भारतीय उपमहाद्वीप में लोग इसे बड़ी संख्या में देखें और इसके सबक को समझें.

हीरानी की छाप

इमेज कॉपीरइट RAJKUMAR HIRANI

कई जगह फ़िल्म भटक भी जाती है. पटकथा पूरी तरह से लय में नहीं है.

लेकिन फ़िल्म में राजकुमार हीरानी की छाप साफ़ दिखती है.

एक किरदार जो दुनिया में सिर्फ़ अच्छे काम करने आया है, एक छोटी सी प्रेम कहानी, छोटी-छोटी हास्यपूर्ण परिस्थितियां और एक संदेश देने की कोशिश...ये सब इसे राजकुमार हीरानी की फ़िल्म बना देती हैं.

एक दर्शक के तौर पर मुझे थोड़ी निराशा हुई क्योंकि मैं बहुत ज़्यादा उम्मीदें लेकर गया था.

लेकिन अगर आप पूछें कि "क्या मुझे फ़िल्म देखकर ख़ुशी मिली?" तो इसका जवाब है जी हाँ.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार