2014 की पांच बेहतरीन फ़िल्में

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Image caption गोविंदा ने भी लंबे अर्से बाद बॉलीवुड में 2014 वापसी की.

जाता हुआ वक़्त हमेशा कुछ न कुछ पीछे छोड़कर चला जाता है. बॉलीवुड के सपनों की दुनिया भी कुछ ऐसी ही है.

यहां हर शुक्रवार को एक नई फ़िल्म आती है, नए चेहरे, नई उम्मीदें, नई बातें, सब कुछ नया नया सा लगता है और फिर वो भी गुज़र जाता है.

साल 2014 बॉलीवुड के लिए कैसा रहा, इस बारे में बीबीसी ने फ़िल्म समीक्षक मयंक शेखर से ख़ास बातचीत की.

मयंक शेखर किन फ़िल्मों से प्रभावित हुए

1.आँखों देखी: इस फ़िल्म का निर्देशन रजत कपूर ने किया है. इसमें एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति सिर्फ़ आँखों देखी पर ही विश्वास करना शुरू करता है.

फ़िल्म में लीड रोल में हैं संजय मिश्र. हालांकि कम प्रमोशन के कारण यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर ज़्यादा कुछ कमाल नहीं कर पाई.

और भारतीय दर्शकों ने भी फ़िल्म को नकार दिया.

2. फाइंडिंग फेन्नी: दीपिका पादुकोण और अर्जुन कपूर की फिल्म फाइंडिंग फेन्नी का निर्देशन कॉकटेल से मशहूर हुए निर्देशक होमी अदजानिया ने किया है.

ये बॉलीवुड की अंग्रेज़ी फ़िल्म थी. फ़िल्म में नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया भी अहम भूमिका में थे.

छोटे बजट की इस फ़िल्म ने 27 करोड़ रुपये का कारोबार किया.

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3. डेढ़ इश्क़िया: अभिषेक चौबे के निर्देशन में बनी डेढ़ इश्क़िया 2010 की इश्क़िया की सीक्यल थी. पहली फ़िल्म को अभिषेक चौबे ने डाइरेक्ट किया था.

फ़िल्म के मुख्य किरदार वही थे पर कहानी नई थी. इस फ़िल्म में उर्दू ज़ुबान का कुछ इस तरह से इस्तेमाल किया गया है जो अब बॉलीवुड में देखने को नहीं मिलता है.

फ़िल्म के मुख्य कलाकार थे, नसीररूद्दीन शाह, माधुरी दीक्षित नेने, अरशद वारसी और हुमा क़ुरैशी.

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4. क्वीन: जिस फ़िल्म ने अभिनेत्री कंगना रनौत को रातों रात स्टार बना दिया, वो थी विकास भाल की फ़िल्म क्वीन.

ये एक मध्यम वर्गीय लड़की के अपने आप को पहचाने के सफ़र की विचित्र कहानी थी. फ़िल्म को समीक्षकों के साथ साथ दर्शकों ने भी ख़ूब सराहा.

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5. कटियाबाज़: यह मूलतः एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म थी जिसके निर्देशक हैं दीप्ति कक्कर और फ़रहाद मुस्तफ़ा.

डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म होने के बावजूद इसकी कहानी कहने का तरीक़ा बॉलीवुड फ़िल्मों की तरह रहा जिसमें एक हीरो है और एक विलेन और हां, एक समस्या भी है.

बुरी फिल्में?

मयंक शेखर कहते हैं कि हर हफ़्ते ऐसी फ़िल्में भी रिलीज़ होती हैं और जो ख़राब हैं. लेकिन इनमें से भी जो फ़िल्में आपको अंत तक याद रह जाएं, समझ लीजिए कि उन्होंने नया मुक़ाम हासिल किया.

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1.एक्शन जैक्सन: अजय देवगन की फ़िल्म एक्शन जैक्सन मनोरंजन के हिसाब से बेहद ख़राब फ़िल्म थी.

फ़िल्म में तीनों अभिनेत्रियां सोनाक्षी सिन्हा, यामी गौतम और मनस्वी सिर्फ़ अजय देवगन के किरदार को पाना चाहती हैं.

इससे ऊपर फ़िल्म की कहानी ही नहीं है. इससे बुरी फ़िल्म मैंने नहीं देखी.

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2.इट्स एंटरटेनमेंट: अक्षय कुमार की फ़िल्म इट्स एंटरटेनमेंट में हीरो का किरदार कुत्ते ने निभाया है. बेहद बुरी फ़िल्म थी.

3.हमशकल्स: साजिद ख़ान की फ़िल्म हमशकल्स में सैफ़ अली ख़ान, रितेश देशमुख और राम कपूर का ट्रिपल रोल था पर कहानी के नाम पर कुछ नहीं था.

4.रोर: सुंदरबन के शेरों पर बनाई गई फ़िल्म रोर के निर्देशक कमल सदनह थे.

मयंक कहते हैं कि कुछ ऐसी फ़िल्में भी होती हैं जिन्हें घंटे भर से ज़्यादा बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है.

(बीबीसी हिंदी की सहयोगी सुप्रिया सोगले से बातचीत पर आधारित)

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