'गुरु दत्त की फ़िल्मों का रीमेक संभव नहीं'

गुरुदत्त

भारतीय सिनेमा में गुरु दत्त उन चंद लोगों में शुमार हैं, जिन्हें अपने समय से आगे का फ़िल्मकार माना जाता था.

गुरु दत्त न सिर्फ़ निर्माता-निर्देशक थे, बल्क‍ि एक उम्दा अभि‍नेता भी थे. शायद कम ही लोग जानते होंगे कि गुरु दत्त का असली नाम है ‘वसंत कुमार शि‍वशंकर पादुकोण’.

हाल ही में उनकी तीन फ़ि‍ल्मों की स्क्र‍िप्ट को किताब की शक्ल दी गई है. इस किताब की लॉन्च में बॉलीवुड की कई जानी-मानी हस्तियां दिखाई दीं और उन्होंने गुरु दत्त के योगदान पर बात की.

पहली क़ि‍श्त में ‘साहब, बीवी और गुलाम’, ‘चौदहवीं का चांद’ और ‘काग़ज़ के फूल’ शामिल हैं. ओम बुक इंटरनेशनल और विधु विनोद चोपड़ा ने इस सिलसिले को शुरू किया है.

स्क्र‍िप्ट संजोना

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स्क्र‍िप्ट को संजोने का काम दिनेश रहेजा और जितेंद्र कोठारी ने किया है.

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जितेंद्र ने बताया, "विधु विनोद चोपड़ा ने इसका प्रस्ताव दिया, जिसे मैंने स्वीकार किया."

इसमें आई दिक्क़तों के बारे में दिनेश रहेजा ने बताया, "उस समय की स्क्र‍िप्ट को इतना संभाल कर नहीं रखा जाता था. ऐसे में उनको सिलसिलेवार तरीक़े से लगाना भी एक मेहनत भरा काम रहा. कई बार तो स्क्र‍िप्ट के इतर ही फ़ि‍ल्म के कई सीन फ़ि‍ल्माए गए थे. इसके लिए हमें कई बार फ़ि‍ल्में भी देखनी पड़ी."

विधु विनोद चोपड़ा बताते हैं, "गुरु दत्त ने बड़ा अनक्रॉप्रमाइज़ि‍ग सिनेमा बनाया है. उन्होंने कभी समझौता नहीं किया. मैं इनसे काफ़ी प्रेरणा लेता हूं."

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विधु विनोद चोपड़ा कहते हैं, "उन्होंने बिना शर्तों के फ़ि‍ल्में बनाने का हुनर लोगों को दिया. जब वे कॉमेडी़ भी बनाते थे, तो उसमें भी चलताऊपन नहीं डालते थे."

किताब के अनुसार गुरु दत्त को जहां जो पसंद आता, उसे वो वहां शूट कर लेते थे.

वो एक फ़ि‍ल्म को शूट करने में जितनी रीलें बर्बाद करते थे, उतने में तो तीन फ़ि‍ल्में बनाई जा सकती थीं.

नए फ़ि‍ल्मकार

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गुरु दत्त के बारे में निर्देशक दिबाकर बनर्जी कहते हैं, "गुरु दत्त भरोसेवाला सिनेमा बनाते थे."

वहीं, गुरु दत्त की फ़ि‍ल्मों की रीमेक के बारे में पूछने पर फ़रहान अख़्तर ने कहा, "न तो मैं किसी फ़ि‍ल्म का रीमेक बनाऊंगा और न ही किसी में भूमिका ही निभाऊंगा. उनकी फ़ि‍ल्में मास्टरपीस हैं, जिनका रीमेक नहीं बन सकता."

गुरु दत्त की तक़रीबन अठारह फ़ि‍ल्मों से पसंदीदा फ़ि‍ल्म के बारे में पूछने पर निर्माता अनुराग कश्यप ने कहा, "प्यासा मेरी ऑल टाइम फ़ेवरेट है, लेकिन साहिब बीवी और गुलाम और 'काग़ज़ के फूल' भी काफी पसंद हैं."

अनुराग की इस पसंद का अंदाज़ा इससे भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी फ़ि‍ल्म 'गुलाल' में ‘ओ री दुनिया...’ को मोडिफ़ाइ करके इस्तेमाल किया.

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