सुशांत सिंह ने 4 माह तक क्यों बात नहीं की?

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फ़िल्म 'काए पो छे' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सुशांत सिंह राजपूत का बॉलीवुड ने बाहें खोल कर स्वागत किया है.

'काए पो छे' के बाद सुशांत ने यशराज बैनर के तले बनी 'शुद्ध देसी रोमांस' में भी काम किया.

इसके बाद वो आमिर ख़ान की ब्लॉक बस्टर फ़िल्म 'पीके' में दिखे और अपने संक्षिप्त रोल के लिए तारीफ़ हासिल की.

अब सुशांत बन गए हैं 'जासूस' अपने आने वाली फ़िल्म 'ब्योमकेश बक्शी' के लिए.

जासूस बने सुशांत

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इस फ़िल्‍म को लेकर वे खासा उत्‍साहित हैं. फिल्‍म में सुशांत एक जासूस की भूमिका अदा करनेवाले हैं और यह एक उपन्‍यास पर आधारित है.

सुशांत अपने किरदार के बारे में कहते हैं, "इस फ़िल्म का पहनावा, जो ज़ुबान का इस्तेमाल किया है उसकी तैयारी करना, वज़न घटाना और 40 के दशक का लुक देना, ये सब तो फिर भी बहुत आसान था मेरे लिए लेकिन ब्योमकेश बक्शी के किरदार में घुसना वो बहुत मुश्किल था."

सुशांत ने बताया कि इस फ़िल्म की तैयारी के लिए उन्होंने चार महीने किसी से कोई बात नहीं की और इस दौरान सिर्फ़ उस किरदार के साथ ही रहे.

पीके

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सुशांत सिंह राजपूत को जहां मुख्य किरदार करने का मौका मिल रहा है तो ऐसे में उन्होंने फ़िल्म 'पीके' में बहुत छोटी भूमिका करने की क्यों सोची?

इस पर सुशांत कहते हैं, "राजकुमार हीरानी के साथ मुझे 15 दिन साथ में काम करने का मौक़ा मिला मेरे लिए बहुत है. उनके जैसे बड़े निर्देशक के लिए तो मैं एक मिनट का भी शॉट देने को तैयार हूं."

उन्होंने आगे कहा, "कई लोगों ने इसके लिए मना किया लेकिन उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं ये बात अच्छे से जनता हूं कि कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना."

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जासूसी फ़िल्में

पिछले साल विद्या बालन की 'बॉबी जासूस' फ़िल्म रिलीज़ हुई थी जो फ़्लॉप हो गई थी.

ऐसे में अपनी जासूसी फ़िल्म के लिए वो कितने आशान्वित हैं.

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इस पर सुशांत कहते हैं, "मैं इन सब बातो को कोई तवज्जो नहीं देता. मैं अपने आप को बहुत ही सेलफिश आदमी कहूंगा क्योंकि मैं फ़िल्म को हां सिर्फ़ अपने लिए करता हूं. मैं रिसर्च भी अपने लिए करता हूं. मैं अपने हिसाब से फ़िल्में चुनता हूं."

दिबाकर बनर्जी निर्देशित ये फ़िल्म तीन अप्रैल को रिलीज़ हो रही है.

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