'धर्म संकट' में सेंसर बोर्ड

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सेंसर बोर्ड ने आने वाली फ़िल्म 'धर्म संकट में' की स्क्रीनिंग के लिए धर्मगुरुओं को बुलाया है.

परेश रावल और नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों से सजी इस फ़िल्म की कहानी संवेदनशील विषय पर आधारित है.

विवाद से बचने की कोशिश!

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Image caption 'पीके' की कहानी को लेकर हुआ था विवाद

माना जा रहा है कि सेंसर बोर्ड ने किसी विवाद से बचने के लिए एक मौलवी और एक पंडित को बुलाने की तैयारी की है.

फिल्म 'धर्म संकट में' की कहानी एक ऐसे शख्स की है, जिसे काफ़ी उम्र बीत जाने पर यह पता चलता है कि वो एक मुस्लिम घर में पैदा हुआ था और हिंदू ने उसे गोद लिया था.

अपनी धार्मिक पहचान की उहापोह में लगा ये व्यक्ति कैसे दो धर्मों के बीच फंस जाता है, फ़िल्म इसे ही दिखाती है.

सेंसर बोर्ड पहले भी 'पीके' और 'ओ माई गॉड' और 'एमएसजी' जैसी फ़िल्मों को लेकर विवादों के घेरे में रहा है.

कलाकारों ने की आलोचना

सेंसर बोर्ड की नई पहल की आलोचना करते हुए परेश रावल ने कहा, "किसी फ़िल्म को सर्टिफ़िकेट देने के लिए धर्मगुरूओं को बुलाया जाना बेहद ख़तरनाक संकेत है."

वहीं, नसीरूद्दीन शाह ने कहा, "ये एक बेतुका ख़्याल है और मेरे लिए तो ये बेतुकेपन से भी बढ़कर है."

कलाकारों ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी, लेकिन सेंसर की ओर से किसी ने भी इस बारे में कोई भी बात करने से इनकार कर दिया. क्या मालूम इसी बात पर विवाद हो जाए.

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