धारावाहिकों में छाए बनारस और बेगूसराय

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आजकल टेलीविज़न पर आने वाले कई धारावाहिक छोटे शहरों की कहानियों पर आधारित हैं.

अगर टीआरपी के रुझानों को देखें तो छोटे शहर की कहानियाँ दर्शकों को ज़्यादा पसंद आ रही हैं.

शायद इसी वजह से पिछले एक साल में 'उड़ान', 'शास्त्री सिस्टर्स', 'सर्विस वाली बहू' जैसे धारावाहिक शुरू हुए हैं. इन सारे धारावाहिकों में छोटे शहर के रंग भरपूर देखने को मिलते हैं.

'बेइंतहा', 'क़ुबूल है' और धारावाहिक 'पुनर्विवाह' (अभी ऑफ एयर) जैसे शोज़ की पृष्ठभूमि है भोपाल.

बदल गया ट्रेंड

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एक वक़्त ऐसा भी था जब निर्माता सिर्फ़ पंजाबी, बंगाली और गुजराती संस्कृति पर आधारित धारावाहिक बनाते थे.

ऐसा लगता है कि वक़्त के साथ-साथ दर्शकों की रुचि और विषयवस्तु भी बदल गई और उसके साथ लेखक भी नए-नए विषयों पर कहानियाँ लिखते गए.

शायद छोटे शहरों से पलायन की प्रवृत्ति भी इसका एक बड़ा कारण रही कि निर्माता निर्देशकों ने छोटे शहरो को जीवंत करना शुरू कर दिया.

तारक मेहता का उल्टा चश्मा में तारक मेहता का किरदार निभाने वाले शैलेश लोढ़ा ने बीबीसी को बताया, "हम सब लोग छोटे शहरों से आकर ही तो बड़े शहरों में रहते हैं. कभी बड़े शहर भी तो छोटे शहर थे. आखिर कैसे न हम अपने पुराने दिनों को याद करेंगे?"

टीवी अभिनेत्री नेहा सरगम कहती हैं, "कहानियाँ जितनी सच्ची होती हैं दर्शकों के दिलों के उतनी क़रीब होती है और सच्चाई तो यही है न कि भारत में चार महानगरों के अलावा सभी छोटे शहर ही हैं "

मुंबई में बसा 'बनारस'

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इसी कड़ी में एक नया शो लांच हुआ 'तेरे शहर में' जिसका आधार है रिवर्स माईग्रेशन. ये कहानी है विदेश में रहने वाले माथुर परिवार की.

परिवार के मुखिया की मौत के बाद उनको आना पड़ता है बनारस जैसे एक छोटे शहर में. 'तेरे शहर में' के सेट पर जाकर ऐसा लगा जैसे बनारस को मुंबई की गलियों में ला दिया है.

पहले जब छोटे शहरों पर आधारित कहानियों की शूटिंग होती थी तो कास्ट को उस शहर ले जाया जाता था जहां शूटिंग होनी होती थी.

लेकिन अब ये चलन बदल चुका है. चाहे अशोका का पाटलिपुत्र हो या नीली छतरी वाले का रामपुरा और या फिर बेगूसराय, आजकल हर शहर सेट्स पर ही बना दिया जाता है.

शो के निर्माता राजन शाही ने बताया, "पहले बनारस का एक लम्बा शेड्यूल था, लेकिन जैसे हमें पता है कि हमेशा के लिए बनारस में बस कर शूटिंग करना संभव नहीं है. इसीलिए मुंबई में ही होली सिटी बनारस को बसाना पड़ा."

वाराणसी की हर पहचान मौजूद

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इस सेट पर लेडीज़ टेलर्स की दुकान है तो दूसरी तरफ है पतंग की दुकान. बनारस है तो शिवजी का मंदिर तो होना ही है.

बनारस की साड़ी और पान बहुत प्रसिद्ध है तो उनकी दुकान भी नज़र आई और उसके साथ साथ धर्मशाला भी दिखाई दी.

हालांकि, बनारस की गंगा दिखाने के लिए बार बार बनारस में फ़िल्माया गया एक सीन दिखाया जाएगा. कहीं कहीं पर 'एंड टीवी' चैनल पर आने वाले धारावाहिक 'गंगा' की तरह कंप्यूटर ग्राफिक की मदद से नदी बनाई जाएगी.

ये धारावाहिक हिट होगा कि नहीं, ये तो मालूम नहीं, लेकिन छोटे शहरों का फ़ार्मूला हिट हो रहा है ये साबित हो गया है.

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