जब बॉलीवुड पर उतरा शिवसेना का ग़ुस्सा..

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पुणे में शनिवार को पाकिस्तानी गायक आतिफ़ असलम के म्यूज़िक कसंर्ट को शिवसेना के विरोध के चलते रद्द कर दिया गया है.

वैसे शुरू से ही शिव सेना अपने तीखे तेवरों के लिए जानी जाती है, चाहे वो महाराष्ट्र में काम करने आए 'बाहरी' लोगों का मुद्दा हो या फिर बॉलिवुड में काम करने आए पाकिस्तानी कलाकारों का.

शिवसेना ने कई बार अपना ग़ुस्सा बॉलीवुड पर उतारा है.

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आइए डालते हैं कुछ ऐसे मामलों पर नज़र, जब शिवसेना के कारण रंग में भंग पड़ गया.

शोभा डे के ख़िलाफ़ मार्च

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मराठी फ़िल्मों को पीक ऑवर में दिखाए जाने के प्रस्ताव का विरोध करने पर 9 अप्रैल को शिव सेना ने लेखिका शोभा के घर की तरफ एक मार्च निकाला.

शोभा डे ने अपने ट्वीट पर बताया था, "मुझे चेतावनी मिली है कि आज मेेरे ख़िलाफ़ मार्च निकाला जाएगा. पुलिस आ गई है और मैं सुरक्षित महसूस कर रही हूं."

शिवसेना का कहना था कि शोभा डे मराठी संस्कृति के ख़िलाफ़ है और वो मराठी सिनेमा के लिए दुर्भावना रखती हैं.

पीके है हिंदू विरोधी

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पिछले साल आई फ़िल्म 'पीके' को वैसे तो कई हिंदू संगठनो का विरोध झेलना पड़ा लेकिन शिवसेना नेे थिएटरों में जाकर फ़िल्म के प्रिंट जलाने की कोशिश की.

एक सिनेमा हॉल के बाहर तोड़फ़ोड़ के बाद 'पीके' के पोस्टर जलाए गए.

शिव सेना की मांग थी कि इस फ़िल्म को बैन किया जाए क्योंकि ये फ़िल्म 'हिंदू सभ्यता के ख़िलाफ़ है और हिंदू समुदाय की भावनाओं को चोट पहुंचाती है'.

माई नेम इज़ ख़ान

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साल 2010 में शाहरूख़ ख़ान और काजोल स्टारर 'माई नेम इज़ ख़ान' की रिलीज़ के बाद मुंबई में शिव सेना ने इस फ़िल्म का ज़बर्दस्त विरोध किया था.

सिनेमा हॉल के बाहर शाहरुख़ के पुतले जलाए गए थे और उनके घर के बाहर भी प्रदर्शन किया गया था लेकिन फ़िल्म की वजह से नहीं.

शिव सेना की ये मांग थी कि फ़िल्म को रोका जाए क्योंकि शाहरूख़ ने आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लिए जाने की वकालत की थी.

इसके बाद शाहरुख़ ने अपने बयान पर एक प्रेस कांफ़्रेंस में सफ़ाई भी दी थी.

दीपा मेहता का विरोध

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फ़िल्म निर्देशक दीपा मेहता और शिव सेना का हमेशा 36 का आंकड़ा रहा है.

शिवसेना ने 1996 में आई फ़िल्म 'फ़ायर' का पुरज़ोर विरोध किया था और मुंबई के कई इलाकों में ये फ़िल्म रिलीज़ नहीं हो पाई थी.

इस फ़िल्म के बाद 2005 में आई फ़िल्म 'वॉटर' के प्रिंट भी शिव सेना ने जला दिए थे और मुंबई में इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग बहुत बाद में की गई थी.

'वॉटर' का विरोध करते हुए शिव सेना ने बयान दिया था, "हम इस फ़िल्म को रिलीज़ नहीं होने देंगे क्योंकि ये हिंदू सभ्यता को ख़राब रोशनी में दिखाती है."

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