अब कंपनियाँ लोगो ही नहीं मोगो भी बनाती हैं

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जब भी किसी कंपनी या किसी ब्रांड की बात होती है तो उसका चित्र या टीवी विज्ञापन हमारे आँखों के सामने आ जाता है.

साथ ही ज़हन में बजने लगता है वो संगीत जो विज्ञापन में इस्तेमाल हुआ था.

चाहे टाइटन घड़ियों के विज्ञापन का संगीत हो या एयरटेल या फिर नोकिया की सिग्नेचर ट्यून या फिर कोका कोला की धुनें.

पहले विज्ञापन में संगीत पर ध्यान या तो केवल विदेशी कंपनियां देती थीं या फिर बहुराष्ट्रीय भारतीय कंपनियाँ.

पर अब नई और छोटी-छोटी भारतीय कंपनियां भी संगीत पर ध्यान और पैसा लगाने लगी हैं.

हर ब्रांड का अपना एक संगीत भी होता है जिसे वो म्यूज़िक लोगो यानी 'मोगो' कहते हैं.

ऐसा ही म्यूज़िक लोगो बनाने वाली एक कंपनी 'ब्रांड म्यूज़िक़' के राजीव राजा कहते हैं कि 'आदमी आँखे बंद कर सकता है लेकिन कान नहीं.'

क्यों ज़रूरी है म्यूजिक लोगो?

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नई हवाई सेवा शुरू करने वाली विस्तारा एयरलाइन्स की रश्मि सोनी कहती हैं, "एक ब्रांड होने के नाते हम चाहते हैं की ज़्यादा से ज़्यादा लोग हमारे बारे मे जानें, म्यूज़िक लोगो हमारे ब्रांड और कंपनी को एक आवाज़ भी देता है."

एडवरटाइज़िंग विशेषज्ञ वंदना सेठी बताती हैं, "ब्रांड के लिए आवाज़ उतनी ही ज़रूरी है जितना की चेहरा, कई कंपनियां अपने म्यूज़िक लोगो का इतना प्रचार करती हैं कि जनता के मन में उस कंपनी की छवि के रूप में उसकी विज्ञापन की धुन बैठ जाती है."

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वे आगे बताती हैं, "जिस तरह इंसान की अपनी शक्ल और आवाज़ होती है उसी तरह एक प्रॉडक्ट की भी एक शक्ल और आवाज़ होती है उस आवाज़ को म्यूज़िक लोगो कहा जाता है."

म्यूज़िक लोगो बनाने वाले 54 वर्षीय राजीव खुद एक संगीतकार हैं और बाँसुरी बजाते हैं.

कई दशक तक एक एड एजेन्सी में काम करने के बाद उन्हे म्यूज़िक लोगो का ख़्याल आया.

वे कहते हैं, "रेडियो भारत में ताकतवर हो कर लौटा है. अगर आप चाहें तो अपनी बात देश के किसी भी कोने तक पहुंचा सकते हैं."

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