'फ़िल्में न मिलने पर बन गए खलनायक'

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सुनील दत्त को जितनी कामयाबी फिल्मों में मिली, उतने ही कामयाब वो राजनीति में भी रहे. हालांकि बॉलीवुड में उन्होंने ऐसा भी दौर देखा जब उन्हें फिल्में नहीं मिल रही थीं.

सुनील दत्त आज ही के दिन, 6 जून 1929 को झेलम में पैदा हुए थे जो अब पाकिस्तान में है.

सुनील दत्त ने अपने छह दशकों लंबे फ़िल्मी करियर में 50 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय किया.

उन्हें दुनिया को अलविदा कहे अब 10 बरस हो गए हैं, लेकिन सुजाता, मदर इंडिया, रेशमा और शेरा, मिलन, नागिन, जानी दुश्मन, पड़ोसन, जैसी फ़िल्मों के लिए वो हमेशा याद किए जाते रहेंगे.

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Image caption (बाएँ से दाएँ)अशोक कुमार, दिलीप कुमार, राज कपूर, सुनील दत्त.

अभिनय के साथ ही उन्होंने फ़िल्म निर्माण और निर्देशन में भी हाथ आजमाए.

सुनील दत्त ने 1964 में एक प्रयोगधर्मी फ़िल्म 'यादें' बनाई थी. इस फ़िल्म का नाम सबसे कम कलाकार वाली फ़िल्म के रूप में गिनीज बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में दर्ज है.

इस फिल्म के आख़िरी सीन में नरगिस एक छोटे से किरदार में नज़र आई हैं. बाक़ी फ़िल्म में सुनील के अलावा कोई और एक्टर नहीं है.

इस फ़िल्म की कहानी लिखी थी सुनील दत्त की पत्नी नरगिस दत्त ने. फ़िल्म में एक ऐसे पति की कहानी है जिसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई है और वो उससे जुड़ी बातों को याद करता है.

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Image caption (बाएँ से दाएँ) देव आनंद, सुनील दत्त, नरगिस.

फ़िल्मों के अलावा सुनील दत्त सार्वजनिक जीवन में भी काफ़ी सक्रिय रहे. वो पाँच बार सांसद रहे. केंद्रीय मंत्री भी रहे.

संघर्ष

वैसे उनका निजी जीवन काफ़ी संघर्ष भरा रहा था.

सुनील दत्त से जुड़ी निजी यादों को साझा करते हुए वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार जयप्रकाश चौकसे कहते हैं, "सुनील दत्त ने पूरे जीवन असंभव लड़ाइयां लड़ी हैं. अपने बेटे को ड्रग्स की लत छुड़ाने और पत्नी का इलाज कराने के लिए वो दो बार अमरीका गए. इस दौरान वो बहुत परेशान रहे."

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Image caption सुनील दत्त जैकी श्राफ़, अनिल कपूर, नसीरुद्दीन शाह और दिलीप कुमार के साथ.

चौकसे कहते हैं, "उनकी मुसीबतें कभी कम न हुईं. कैंसर और ड्रग्स ने उन्हें बहुत लाचार और दुखी कर दिया था. ड्रग्स और कैंसर के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए उन्होंने दो बार मुंबई से चंडीगढ़ तक पदयात्रा की."

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चौकसे बताते हैं कि सुनील दत्त पर्दे पर खलनायक की भूमिका नहीं निभाना चाहते थे.

चौकसे कहते हैं, "जब 1971 से 1975 तक कोई फ़िल्म नहीं मिलने से उनका करियर लड़खड़ाने लगा तब अभिनेत्री साधना और आरके नय्यर ने उन्हें 'गीता मेरा नाम' फ़िल्म में काम करने को कहा. लाख समझाने के बाद उन्होंने पहली बार खलनायक की भूमिका निभाई. उसके बाद से उन्हें फिर से फ़िल्में मिलनी शुरू हो गईं."

मददगार और मज़ाकिया

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Image caption सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार, कुमार गौरव और संजय दत्त के साथ.

पंढरी जुकर जो पंढरी दादा के नाम से मशहूर हैं, 1958 से 2005 तक सुनील दत्त के मेकअप मैन और फोटोग्राफर रहे थे.

सुनील दत्त को याद करते हुए पंढरी दादा ने बताया कि दत्त साहब दूसरों की बहुत मदद किया करते थे.

पंढरी दादा कहते हैं, "मेरी पत्नी को हिंदुजा अस्पताल में भर्ती ना करने पर ख़ुद सुनील दत्त साहब मेरी पत्नी को अस्पताल लेकर गए थे उन्होंने सभी डॉक्टरों को मेरी पत्नी का बेहतर इलाज़ करने की गुज़ारिश की थी और तो और उन्होंने अस्पताल का पूरा ख़र्चा उठाया. हालांकि मेरी बीवी बच नहीं सकी, इसका उन्हें बहुत दुख हुआ था."

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पंढरी दादा बताते हैं कि अगर कोई काम ना हो रहा हो तो सुनील दत्त को बहुत ग़ुस्सा भी आया करता था लेकिन उन्हें मज़ाक करने की भी ख़ूब आदत थी.

ऐसा ही एक क़िस्सा साझा करते हुए पंढरी दादा ने बताया, "फ़िल्म हमराज़ के लिए मैं उनका 110 साल के बूढ़े के किरदार के लिए मेकअप कर रहा था. तभी उनसे मिलने नरगिस जी आ गईं. उन्होंने दत्त साहब से ही पूछ लिया कि बाबा दत्त साहब कहां हैं. ये सुनते ही दत्त साहब ने मुझे कुछ ना बताने का इशारा किया और पूरे 2 घंटे के इंतज़ार के बाद जब नरगिस चलने लगीं तो मुझे बुरा लगा. मैंने नरगिस जी को कहा दत्त साहब आपके बगल में ही हैं. यह सुनते ही नरगिस हैरान हो गईं और दत्त साहब ज़ोर से हँस पड़े."

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पंढरी दादा ने आगे बताया, "नरगिस जी मेरे पास आईं और कहने लगीं आपने मेरे पति का ऐसा मेकअप किया कि उनकी पत्नी होते हुए भी मैं उन्हें नहीं पहचान पाई. तब उन्होंने मुझे अपनी कीमती घड़ी यादगार के तौर पर दी."

कैसे मिला ब्रेक

मशहूर रेडियो प्रसारक अमीन सयानी सुनील दत्त के पुराने मित्र थे. हीरो बनने से पहले सुनील दत्त भी रेडियो सीलोन में प्रसारक थे. सयानी और दत्त उसी वक़्त से अच्छे मित्र थे.

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Image caption अमीन सयानी और सुनील दत्त(दाएँ)

सयानी बताते हैं, "रेडियो कार्यक्रमों के दौरान दत्त की मुलाक़ात बड़ी-बड़ी फ़िल्मी हस्तियों से होती रहती थी. कई लोग उन्हें देख कर कहा करते थे इतने सुन्दर, लंबे, तगड़े नौजवान, इतने खूबसूरत इंसान हो तुम फ़िल्म कलाकार क्यों नहीं हो?"

ऐसी ही एक मुलाकात के बाद फ़िल्म निर्माता रमेश सहगल ने अपनी फ़िल्म 'रेलवे प्लेटफॉर्म' के लिए सुनील दत्त को हीरो के रोल का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया.

अमीन सयानी कहते हैं," अपने दोस्त को याद करते हुए इतना कहूँगा की पैंसठ साल से मेरा नाता रहा हैं हिंदुस्तानी फ़िल्मी दुनिया से, मुझे हर तरह के लोग मिले हैं संगीत सितारे, फ़िल्मी सितारे, निर्माता, निर्देशक और पॉलिटिशियन. इन सब में सबसे खूबसूरत इंसान अगर आप चुनने को कहें तो मैं दत्त साहब का ही नाम लूंगा."

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सयानी कहते हैं, "मुझे आज भी याद है जब उनकी मौत हुई थी तो कैसे हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए थे. वो बहुत अच्छे अभिनेता, पॉलिटिशियन और इंसान थे."

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