कैसी है डिज़्नी की फ़िल्म इनसाइड आउट?

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रेटिंग - **** स्टार

क्या हो अगर आपके दिमाग से खुशी और दुख की भावनांए ही निकल जाएं? वो क्या बातें होती हैं जो हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं? हम कैसे हमारी भावनाओं से नियंत्रित होते हैं?

इन सभी बातों को बड़े ही ख़ूबसूरत एनिमेशन के साथ एक लगभग वास्तविक सी लगने वाली काल्पनिक कहानी 'इनसाइड आउट' में पिरोया है निर्देशक पीट डॉक्टर ने जो डिज़्नी के लिए साल 2009 में सुपरहिट फ़िल्म 'अप' बना चुके हैं.

जहां बॉलीवुड बॉक्स ऑफ़िस पर एक बड़ी रिलीज़ के लिए तरस रहा है वहीं हॉलीवुड में 'टेड 2', 'जुरासिक पार्क' के बाद 'इनसाइड आउट' ने भी हॉलीवुड फ़िल्म निर्माताओं की चांदी कर दी है.

जबर्दस्त ओपनिंग

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डिज़्नी और पिक्सार स्टूडियोज़ की सहभागिता में बनी इस फ़िल्म को विश्व भर में पहले ही दिन मिली 91 लाख डॉलर की ग्रैंड ओपनिंग ने इस फ़िल्म को पहले ही दिन सुपरहिट बना दिया है.

फ़िल्म की इस कमाई में इज़ाफ़ा करने के लिए बहुत बड़ा हिस्सा भारत से भी आएगा क्योंकि भारत भी अब हॉलीवुड फ़िल्मों का बड़ा बाज़ार बन गया है.

60 लाख़ डॉलर की लागत से बनी इस फ़िल्म में बच्चों के लिए कमाल का एनिमेशन है और बड़ो के लिए भावनाओं और मानवीय व्यवहार की एक जटिल कहानी जो दोनों ही वर्गों को कुर्सी से बांधे रखती है.

डिज़्नी को इससे पहले, फ़िल्म रीलीज़ के पहले ही दिन इतना मुनाफ़ा साल 1995 में आई फ़िल्म 'टॉय स्टोरी' से हुआ था (102 लाख़ डॉलर).

कहानी

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फ़िल्म शुरू होते ही आपको डिज़्नी की ओर से एक सरप्राईज़ मिलता है, एक ट्रेडमार्क डिज़्नी म्यूज़िकल के रूप में. यह एक छोटी थ्री डी फ़िल्म है, जो दर्शकों के लिए बोनस है और जिसके बारे में इस फ़िल्म के प्रमोशन में कोई ज़िक्र नहीं है.

इस छोटी फ़िल्म के बाद शुरू होती है कहानी 'इनसाइड आउट' की जहां एक अमरीकी परिवार में पैदा हुई बच्ची राईली के मस्तिष्क के अंदर की दुनिया का एनिमेटेड स्वरूप दिखाया गया है.

फ़िल्म की मुख़्य किरदार हैं राइली और उसके दिमाग़ में रहने वाली पांच मुख्य भावनांए - ख़ुशी, ग़म, क्रोध, डर और घृणा.

कैसे ये भावनांए हमारी प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करती हैं, किस तरह से हमारी जिंदगी में घटने वाली घटनांए हमारी यादें बनती हैं, और कैसे हमारे व्यक्तित्व का निर्माण इन यादों से होता है, यही कहानी है 'इनसाइड आउट' की.

फ़िल्म का प्लस प्वाइंट है इसका जबर्दस्त एनिमेशन जिसमें सबसे ख़ास है मानव मस्तिष्क के भीतर चलने वाली 'विचारों की रेल' और सपने बनाने वाली फ़ैक्ट्री का चित्रण.

फ़िल्म को हर ओर से समीक्षकों और दर्शकों की जबर्दस्त प्रशंसा मिल रही है और भारत में आज रिलीज़ हुई इस फ़िल्म के शोज़ हाउसफ़ुल तो नहीं हैं लेकिन इसे देखने के लिए लोग परिवार समेत आ रहे हैं.

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