कॉमेडी को बी ग्रेड समझा जाता है: जावेद अख्तर

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बॉलीवुड फिल्मों के मशहूर लेखक जावेद अख्तर का मानना है कि भारत चार्ली चैपलिन जैसा कॉमेडियन बनाने में असमर्थ है.

मुंबई में लेखक देबाशीष इरेंगबम की बुक लांच पर पहुंचे जावेद अख्तर से जब पूछा गया कि किन किताबों आप सबसे ज्यादा प्रेरित हुए, इस पर जावेद अख्तर ने कहा ,"मेरे माता पिता कम्युनिस्ट थे इसलिए रूसी किताबे उन्हें पढ़ने को मिली पर ये बहुत दुर्भाग्य की बात है कि भारत में कॉमेडी, मिस्ट्री और डिटेक्टिव उपन्यास को 'बी ग्रेड' समझा जाता है."

जावेद अख़्तर ने कहा, "इस तरह की फ़िल्मों को भी बी ग्रेड समझा जाता है. इसलिए हम असमर्थ है चार्ली चैपलिन जैसे कॉमेडियन पैदा करने में. भले ही कोई भी अपनी कॉमेडी में कितना ही बेहतर क्यों न हो हम उसे वह इज़्ज़त ही नहीं देते जिसका वो हकदार है."

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हालाँकि बातों ही बातों में जावेद अख्तर ने ये भी कह दिया कि वो अपने लेखक खानदान की सातवीं पीढ़ी से हैं. दिल चाहता है, लक्ष्य, डॉन फ़िल्म बनाने वाले फरहान अख्तर और दिल धड़कने दो, लक बाय चांस, ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा बनाने वाली बेटी ज़ोया अख्तर आठवीं पीढ़ी हैं.

फरहान अख्तर की बड़ी बेटी ने भी लिखना शुरू कर दिया है और वो नौवी पीढ़ी में शामिल होंगी.

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