आसान नहीं सुपरस्टार जानवर बनना

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सलमान ख़ान की फ़िल्म मैंने प्यार किया का कबूतर आपको शायद याद होगा. ठीक इसी तरह अक्षय कुमार की फ़िल्म 'इट्स एंटरटेनमेंट' में मुख्य किरदार एक कुत्ते का था. ऐसी कई फ़िल्में हैं जिनमें जानवरों के किरदार अहम होते हैं.

लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अभिनेताओं की तरह ही जानवरों का भी बाकायदा पहले ऑडिशन होता है और उसके बाद उन्हें सेलेक्ट किया जाता है.

गुज़रे ज़माने की फ़िल्मों में भी जब जानवरों की ज़रूरत होती थी तो अक्सर जानवर सर्कस से मंगाए जाते थे.

ये जानवर अधिकतर चेन्नई या दक्षिण भारत से आते थे. शेर, हाथी, बाघ, सांप, बंदर, चिड़िया, कबूतर, कुत्ते और बिल्ली. अब भारत में इन सब जानवरों का शूटिंग में इस्तेमाल नहीं हो सकता.

अगर किसी फ़िल्म में इन जानवरों की ज़रूरत होती है तो किसी ऐसे मुल्क में इन्हें शूट किया जाता है जहाँ अनुमति हो या फिर ग्राफ़िक्स के ज़रिये इन्हें बनाया जाता है. भारत में अब कुछ ही जानवरों की शूटिंग की अनुमति है.

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कैसे होते हैं ऑडिशंस?

पहले इन जानवरों का तस्वीरों से चयन होता है और फिर एक दिन ऑडिशन रखा जाता है.

इस ऑडिशन में जानवरों को कुछ हरकतें करनी होती हैं जो मालिक अपने जानवर से करवाता है.

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एनिमल ट्रेनर जावेद ख़ान बताते हैं, "हाल ही में मैं एक ऑडिशन के लिए गया जहां कुत्ते को तकिया फाड़ना था. जब तक कुत्ता पूरी तरह से ट्रेंड ना हो वो ऐसा नहीं कर सकता. कई बार मालिकों को अपने जानवरों से सीन करवाने के लिए ट्रिक्स अपनानी पड़ती हैं."

एनिमल ट्रेनर

फ़िल्मों में जानवर मुहैया कराने वाले लोग अक्सर प्रशिक्षित कुत्ते, बिल्ली को लोगों को पालने के लिए दे देते हैं. शर्त ये होती है कि जब शूटिंग में ज़रूरत पड़ेगी तो वो इनका इस्तेमाल करेंगे .

अयूब ख़ान 32 साल से फ़िल्मों कुत्ते-बिल्ली से काम करवा रहे हैं. उनकी पहली फ़िल्म सनी देओल की 'ज़िद्दी' थी. फिर उन्होंने सुनील दर्शन की एक फ़िल्म में जंगली सूअर की वेशभूषा में कुत्ते से स्टंट करवाया.

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अब तक अयूब खान ने दम, फुटपाथ, बाग़बां, मैं प्रेम की दीवानी हूँ, जानवर, इट्स एंटरटेनमेंट, प्रेम रतन धन पायो जैसी फ़िल्मों में जानवरों से काम करवाया है. उनके पास 17 -18 कुत्ते हैं और कई बिल्लियां हैं.

सहूलियत और पैसा

जानवरों के काम करने के तरीकों में भी कुछ सालों में बहुत सुधार आया है. फ़िल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले सभी जानवरों की हेल्थ रिपोर्ट चेन्नई में बनाई जाती है.

जावेद बताते हैं, "जानवर बिलकुल बच्चों की तरह होते हैं. उनके मूड के हिसाब से काम होता है. अक्सर फ़िल्म शूटिंग के समय एक जानवर के साथ स्टैंडबाई में दूसरा जानवर भी रखा जाता है."

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मशहूर एनिमल ट्रेनर शंकर नारायण अय्यर कहते हैं, "बदलते वक़्त के साथ जानवरों के मालिको के पैसों में भी बढ़ोतरी हुई है. पहले मुझे 800 रूपये मिलते थे फिर 2000 से बढ़कर अब 8000 मिलते हैं."

अयूब खान बताते हैं, "हमारी मेहनत के हिसाब से हमें कम पैसे मिलते हैं लेकिन अगर आपका कुत्ता सेलिब्रिटी है और कई स्टंट करता है तो आपको उसके एक दिन के पंद्रह हज़ार या उससे अधिक भी मिल सकते हैं. अब फ़िल्मों में जानवरों के कॉन्ट्रैक्ट भी बनते हैं लेकिन टीवी सीरियल में सबसे अधिक कमाई है क्योंकि वो लंबे चलते हैं."

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