'नंबर वन बेटा नहीं बन पाया मैं'

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अभिनेता सलमान ख़ान को अफ़सोस है कि वो सुपरस्टार स्टार तो बन गए लेकिन नंबर वन बेटे नहीं बन पाए.

अपने होम प्रोडक्शन हाउस की पहली फ़िल्म, 'बजरंगी भाईजान' के प्रमोशन के दौरान हुए साक्षात्कार में सलमान ख़ान ने कुछ ऐसी बातें कही जो पहले कभी नहीं कही थीं.

सलमान ने अदालत में चल रहे मुंबई के हिट एंड रन केस औऱ राजस्थान में अवैध शिकार के मामलों के बारे में बात करते हुए कहा," मैं एक अच्छा बेटा बनने की पूरी कोशिश में लगा हुआ हूँ लेकिन मुझे लगता है कि मेरी वजह से मेरे परिवार में बहुत तकलीफ़ें और चिंताएं हैं. जिसकी वजह है मेरे केस. इनकी वजह से मेरे माँ-बाप जल्दी बूढ़े हो चुके हैं."

उन्होंने कहा, "मेरे माता-पिता को देख कर समझ में आता है कि वो मुझे लेकर बहुत चिंता में हैं. मेरा पूरा परिवार मिल कर इससे लड़ रहा है. ज़िंदग़ी में जो भी होगा आगे हम उसे अपनाने के लिये तैयार हैं."

हद से ज़्यादा 'प्रमोशन' नहीं आता रास

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हर कोई अपनी फ़िल्म को हिट करवाने के लिए जमकर प्रमोशन करता है लेकिन सलमान को हद से ज़्यादा प्रमोशन करना रास नहीं आता .

सलमान कहते हैं, "जिनको फ़िल्में देखनी होती हैं वो थिएटर में ही फ़िल्म के पोस्टर और ट्रेलर देख कर तय कर लेते हैं कि यह उनको देखनी हैं या नहीं. मेरे लिए सनी देओल एक बड़ा उदहारण हैं जो अपने फ़िल्मी करियर के शिखर पर थे तब भी प्रमोशन के लिए अपने जुहू वाले घर से बाहर नहीं निकलते थे लेकिन फिर भी, उनकी फ़िल्में खूब चलती थी."

'बॉलीवुड फ़िल्में छूतीं हैं दिल'

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बॉलीवुड में कई कलाकार हॉलीवुड फ़िल्में करने की इच्छा जता चुके हैं, क्या सलमान भी कुछ ऐसा ही चाहते हैं ?

इस पर सलमान ख़ान कहते हैं, "हमारे पास जो दिल है वो उनके पास नहीं है. हम इमोशन से भरी फ़िल्में बनाते हैं जिसके चलते हमारी कहानियाँ दिल को छूती हैं लेकिन उनका फंडा अलग है.वो किंग-कांग, स्पाईडरमैन, आइरनमैन इस तरह की फ़िल्में बनाते हैं. उनको सुपर हीरो चाहिये लेकिन हमें सुपर हीरो की ज़रूरत नहीं है क्योंकि हमारे लिए हमारे हीरो ही सुपर हीरो हैं."

'अंग्रज़ी बोलकर मज़ाक क्यों बनाऊं'

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सलमान आगे कहते हैं, "यह प्यार और आदर ही है जो हमे हमारे फैंस से मिलता है और उसकी तुलना नहीं की जा सकती. हिन्दी बोलने की ऐसी आदत हो गई है कि कैमरे के आगे इंग्लिश बोल कर अपना मज़ाक क्यों बनाऊं."

अपनी फ़िल्म "मैरी गोल्ड" के बारे में सलमान ख़ान में कहा कि यह फ़िल्म बिलकुल भी नहीं चली थी फिर अंग्रेजी फ़िल्म में काम करने का क्या फ़ायदा जो चलने वाली ही नहीं.

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