माहवारी पर जागरूकता के लिए कॉमिक बुक

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कॉमिक बुक 'मेन्स्ट्रूपीडिया' यौवन की ओर बढ़ रही लड़कियों को माहवारी के बारे में आसान तरीके से समझने में मदद करेगी.

बात भारत की करें या किसी और देश की, माहवारी जैसे मुद्दों पर समाज आज भी हिचकता है.

सालों से माहवारी से जुड़े चले आ रहे अंधविश्वासों और पुरानी प्रथाओं की वजह से माहवारी के लेकर लड़कियों में एक घबराहट और बेचैनी सी हो जाती है.

मेन्स्ट्रूपीडिया

इस झिझक और अज्ञानता को हटाने की कोशिश का नाम है 'मेन्सट्रूपीडिया' कॉमिक, जिसमें माहवारी और यौवन जैसे विषयों को कॉमिक बुक के ज़रिए सरल तरीके से समझाने का एक प्रयास किया गया है.

इसका संचालन करने वाली 30 वर्षीय अदिति गुप्ता बताती हैं, "नौ से 12 वर्ष की उम्र में लड़कियों को माहवारी शुरू होती है और यही वह समय है जहां उन्हें उचित जानकारी देना बहुत ज़रूरी होता है."

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वो आगे कहती हैं, "हमारे समाज में इस विषय पर बात करना तो दूर लड़कियों के साथ अछूतों जैसा व्यवहार किया जाता है, हमारे प्रयास से लड़कियां खासकर छोटी बच्चियां खुद माहवारी के दौरान लिए जाने वाले उचित कदमों को समझ पाएंगी."

हालांकि ये एक नया प्रयास है, लेकिन इस मुद्दे के बाद यह कॉमिक आगे क्या करेगी यह चुनौती इसको बनाने वालों के सामने है.

ख़ुद का अनुभव

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अदिति भी मानती हैं कि विषय की कमी के चलते इसे एक दिन बंद करना पड़ेगा, लेकिन हर लड़की तक पहुंचने के लिए इसकी प्रतियां बनाने में अभी काफ़ी समय है.

अदिति झारखंड के एक छोटे से गांव से आती हैं और बताती हैं कि माहवारी से जुड़े उनके अनुभव अच्छे नहीं थे.

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वो कहती हैं, "हमें सैनिटरी पैड लेने के लिए कई मील दूर जाना पड़ता था और दुकान ख़ाली होने का इंतज़ार करना पड़ता था ताकि पैड मांगा जा सके."

मेट्रो शहरों में महिलाएं काफ़ी जागरूक हैं, लेकिन छोटे शहरों में रहने वाली लड़कियों के लिए यह मुद्दा अभी भी झिझक भरा है और इसी झिझक को ख़त्म करने की यह कोशिश है.

कॉमिक

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कॉमिक की शक़्ल में बनाई गई यह पुस्तक सिर्फ़ छोटी उम्र की लड़कियों के लिए ही नहीं बल्कि माता-पिता के लिए भी काफ़ी उपयोगी है.

मुंबई में एक सामाजिक संस्थान के साथ काम कर रहीं आरिया बताती हैं, "हमने अभी तक इस किताब की कई प्रतियां गांव में, सरकारी स्कूल के बच्चों को और उनके माता-पिता को दी हैं और इस किताब की मदद से उन्हें अपने बच्चों से खुल कर बात करने में काफ़ी मदद मिली.”

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मेन्स्ट्रूपीडिया को कॉमिक बुक का अवतार देने के बारे में अदिति ने बताया, "बच्चों को अगर कार्टून की सहायता से किसी नए विषय को समझाया जाए तो उन्हें वह जल्दी समझ आता है और लंबे समय तक याद भी रहता है."

फ़िलहाल ये क़िताब वेबसाइट के अलावा हिंदी और अँग्रेज़ी मे छापी जा चुकी है, लेकिन आने वाले समय में इनका क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद किया जाएगा.

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