पहली फ़्लाप फ़िल्म देने वाले सुपरस्टार

अभिनेता से निर्माता बने सलमान ख़ान ने फ़िल्म 'हीरो' के ट्रेलर लॉंच पर कहा था कि वो इस फ़िल्म से डेब्यू कर रहे सूरज पंचोली और अतिया शेट्टी को स्टार बना देंगे.

लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि आप की पहली फ़िल्म फ़्लॉप हो जाए तो आप बड़े सितारे नहीं बन सकते हैं.

बॉलीवुड में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां अभिनेताओं की पहली फ़िल्म मुंह के बल गिरी लेकिन आज वो इंडस्ट्री के बड़े स्टार हैं. आइए नज़र डालते हैं ऐसे ही कुछ सितारों के करियर पर.

काजोल

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अभिनेत्री तनूजा और निर्माता निर्देशक शोमू मुखर्जी की बड़ी बेटी काजोल ने 16 साल की उम्र में गर्मी की छुट्टियों में अपनी पहली फ़िल्म "बेख़ुदी" की शूटिंग की.

निर्देशक राहुल रवैल की यह फ़िल्म साल 1992 में रिलीज़ हुई. इस फ़िल्म से कमल सदाना भी लॉंच हुए लेकिन फ़िल्म फ़्लॉप साबित हुई.

कमल को इस फ़िल्म के बाद 'रंग' छोड़कर किसी बड़ी फ़िल्म का ऑफ़र नहीं मिला लेकिन काजोल को उनकी एक्टिंग के कारण शाहरुख़ के साथ 'बाज़ीगर' मिली.

बाज़ीगर सुपरहिट साबित हुई और फिर काजोल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

रानी मुखर्जी

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फ़िल्म निर्माता और मुंबई के 'फ़िल्मालय स्टूडियो' के संस्थापक राम मुखर्जी की बेटी रानी मुखर्जी ने 1997 में फ़िल्म "राजा की आएगी बरात" से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की.

इस फ़िल्म में खलनायक, अमजद ख़ान के बेटे शादाब ख़ान भी थे लेकिन यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर बुरी तरह पिट गई.

लेकिन रानी की अभिनय क्षमता को देखकर भट्ट कैंप ने "ग़ुलाम" फ़िल्म में साईन किया. इसके बाद "खंडाला गर्ल" रानी मुखर्जी सुपरस्टार हो गईं.

रणबीर कपूर-सोनम कपूर

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अभिनेता ऋषि कपूर के बेटे रणबीर कपूर और अभिनेता अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने संजय लीला भंसाली की फ़िल्म "साँवरिया" से अपने करियर की शुरुआत की.

फ़िल्म के भव्य सेट, सुरीले गाने और सलमान ख़ान और रानी मुखर्जी के होने के बाद भी फ़िल्म नहीं चल पाई.

लेकिन दोनों ही अभिनेताओं की दूसरी फ़िल्म, रणबीर कपूर की "बचना ऐ हसीनों" और सोनम कपूर की "दिल्ली 6" की सफलता से दर्शकों ने उन्हें सर आंखों पर बिठा लिया.

सैफ़ अली ख़ान

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इस हफ़्ते सिनेमाघरों में सबसे बड़ी रीलीज़ है 'फ़ैंटम'. इस फ़िल्म के हीरो हैं सैफ़ अली ख़ान.

आज बॉलीवुड के टॉप स्टार्स में शुमार सैफ़ के फ़िल्मी करियर की शुरुआत 1992 में मल्टी स्टारर फ़िल्म 'परंपरा' से हुई थी. यह फ़िल्म सुपरफ़्लॉप साबित हुई थी.

आमिर ख़ान, विनोद खन्ना, रवीना टंडन के साथ निर्देशक यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म को समीक्षकों और दर्शको दोनों ने नकार दिया था.

लेकिन सैफ़ की दूसरी फ़िल्म "आशिक़ आवारा" ने सफलता के झंडे गाड़े. दस साल तक डावांडोल करियर के सहारे चलने वाले सैफ़ ने 2001 में आई फ़िल्म "दिल चाहता है" के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा है.

करीना कपूर और अभिषेक बच्चन

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कपूर ख़ानदान की बेटी करीना कपूर और मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन ने जेपी दत्ता की 2000 में आई फ़िल्म "रिफ़्यूजी" से अपने करियर की शुरआत की थी.

ज़बर्दस्त चर्चा होने के बावजूद फ़िल्म नाकामयाब रही. उस साल की सारी सफलता ऋतिक रोशन और अमीषा पटेल फ़िल्म 'कहो न प्यार है' के साथ ले गए.

हालांकि इस फ़िल्म की असफलता के बावजूद करीना कपूर को लगातार फ़िल्में मिलती रहीं और वो बॉलीवुड की नंबर वन हीरोइन बनीं.

अभिषेक बच्चन को पहली हिट फ़िल्म 13 फ़्लॉप फ़िल्मों बाद मणिरत्नम की 'युवा' से नसीब हुई. हालांकि वो नंबर वन तो नहीं हैं लेकिन उनके साथ सेल्फ़ी खिंचवाने के लिए आज क़तार लगती है.

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