विवादित फ़िल्में ही बिकती हैं: भट्ट

इमेज कॉपीरइट hoture iamges

सारांश, नाम और ज़ख्म जैसी संवेदनशील फ़िल्में बना चुके महेश भट्ट मानते हैं कि भारत में वही फ़िल्में चलती हैं जिनका विषय कुछ 'विवादित' होता है.

निर्माता निर्देशक सुभाष घई के द्वारा आयोजित एक फ़िल्म फ़ेस्टिवल में आए महेश भट्ट ने मीडिया से हुई बातचीत में अपनी राय रखी.

बिकता है ग्लैमर

महेश भट्ट से जब यह पूछा गया कि फ़िल्मों के निर्माण के दौरान कैसी विषयवस्तु चुनी जाए तो वो मुस्कुरा उठे.

महेश ने कहा, "फ़िल्में वो चुनो जिनपर किसी को आपत्ति हो या जिन विषयों पर मनाही हो, आप देखना वो फ़िल्में कमाल करती हैं."

बॉक्स ऑफ़िस पर हिट का फ़ॉर्मूला तलाशते आजकल के निर्माताओं को ध्यान में रखते हुए महेश कहते हैं, "जैसी फ़िल्में बनाने के लिए जनता या सरकार कहती है, उन्हें कोई देखता नहीं और जिन विषयों पर सबसे ज़्यादा हाय-तौबा होती है वो फ़िल्में देखी भी सबसे ज़्यादा जाती हैं."

उदाहरण

इमेज कॉपीरइट JISM 2

जब पत्रकारों ने ज़ोर देकर ऐसी फ़िल्मों के नाम बताने के लिए कहा तो उन्होनें अपनी ही फ़िल्मों के उदाहरण दिए.

महेश भट्ट ने कहा, "पिछले साल 2014 में रिलीज़ हुई राजकुमार राव अभिनीत फ़िल्म 'सिटी लाईट्स', जो हमारे हिसाब से एक बेहतरीन फ़िल्म थी, बॉक्स ऑफ़िस पर कुल 8.5 करोड़ ही कमा सकी. वहीं सनी लियोन की 'जिस्म 2' ने पहले दिन ही 9 करोड़ रुपए कमाए."

महेश भट्ट इसके अलावा मर्डर जैसी फ़िल्मों का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि जब दर्शक ही इस तरह की फ़िल्में पसंद करते हैं तो निर्माता होने के तौर पर मैं क्यूं ना ऐसी ही फ़िल्मों में निवेश करुं?

एफ़टीआईआई पर

पिछले तीन महीने से पुणे में गजेंद्र चौहान की एफ़टीआईआई के अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति के बाद सरकार और छात्रों के बीच चल रहे घमासान पर महेश भट्ट पहले भी अपनी राय रख चुके हैं.

महेश ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा, "सरकार को छात्रों की बात पर ध्यान देना चाहिए, कला को राजनीति से मिलाना ठीक नहीं."

महेश का मानना है कि एफ़टीआईआई एक कला का मंदिर है और कला की जगह पर ब्यूरोक्रैट्स का कोई काम नहीं है, ये मुद्दा काफ़ी पहले सुलझाया जा सकता था.

इस समारोह में कुछ देर के लिए मौजूद रहे फ़रहान ने भी एफ़टीआईआई के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा,"अगर छात्र इतना ज़ोर दे रहे हैं और वो भी किसी एक मुद्दे पर तो सरकार को उनकी बात को सुननी चाहिए."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार