'रवींद्र जैन का जाना किसी करिश्मे का ख़त्म होने जैसा'

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मशहूर संगीतकार रवींद्र जैन का मुंबई में 71 साल की उम्र में निधन हो गया है. बीते 24 घंटो से वो वेंटिलेटर पर थे.

रवींद्र जैन का इलाज मुंबई के लीलावती अस्पताल में लंबे समय से चल रहा था और आज शाम 4 बजे के आसपास उन्होनें अपनी आखिरी सांस ली.

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रवींद्र जैन ने चोर मचाए शोर, गीत गाता चल, चितचोर और अखियों के झरोखों से जैसी सुपरहिट फ़िल्मों का संगीत दिया था.

रवींद्र जैन को इसी साल भारत सरकार की ओर से पद्मश्री पुरस्कार दिया गया था.

साल 1985 में फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली के संगीत के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का फ़िल्मफ़ेयर भी मिला था.

कलाकारों ने याद किया

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उदित नारायण- उनका जाना एक करिश्मे के ख़त्म होने जैसा है, मैंने उनके साथ 'विवाह' में काम किया था. वो शब्दों को, चाहे वो संस्कृत हो या अवधी बड़ी आसानी से संगीत में ढाल लेते थे, उनकी दृष्टि भले ही कमज़ोर थी लेकिन संगीत और सुरों को ढालने की क्षमता बहुत तेज़ थी.

ममता शर्मा- इंडस्ट्री को ही नहीं इंसानियत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है. वो मेरे पिता समान थे और उनके काम करने का तरीका सबसे अलग था, हम उन्हें प्यार से दादू कहते थे और दादू नहीं रहे ये बड़े दुख की बात है.

अरुण गोविल- वो सिर्फ़ संगीत ही नहीं साहित्य के क्षेत्र में भी कर्मयोगी रहे, उन्होंने अपने संगीत में भारतीय संगीत को बढ़ाया यहां तक कि लोक धुनों को आगे बढ़ाया और व्यक्तिगत रूप से वो हंसमुख थे और उनका जाना एक बड़ी क्षति है.

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कैलाश खेर- वो मेरे लिए परिवार के समान थे, जब मैंने गीत गाना शुरू किया, उससे पहले से ही मेरी उनसे पहचान थी और जब उन्होंने मेरा गाना 'अल्लाह के बंदे' सुना था तो उन्हें यकीन नहीं हुआ था कि मैं वही कैलाश खेर हूं जो उनके घर में रहता हूं, मैंने 10-12 गाने उनके साथ गाए और दुआ करता हूं कि भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.

ब्रजेश शांडिल्य- ये मेरे लिए परिवार के किसी सदस्य के जाने जैसा है. मैं अभी मुंबई से बाहर हूं. उनके निधन की ख़बर ने मुझे हिला दिया है. वो संगीत के पुरोधा थे और मैं दुआ करूंगा वो इस लोक के बाद जहां भी जाएं, वहां इससे बेहतर जीवन पाएं, वो एक सरल व्यक्तित्व के स्वामी थे जो अब हमारे बीच नहीं हैं.

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