जिसे बॉलीवुड में 'जीनियस' बुलाया जाता है

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साल 2008 में आई फ़िल्म 'आमिर' से बॉलीवुड डेब्यू हुआ था संगीतकार अमित त्रिवेदी का.

हालांकि फ़िल्म को औसत सफ़लता मिली लेकिन उसका गीत 'हा रहम' सुपरहिट हो गया. फिर साल 2009 मेें रीलीज़ हुई 'देव डी' और अमित त्रिवेदी को फ़िल्म के संगीत के लिए राष्ट्रीय पुरुस्कार से नवाज़ा गया.

यहां से सफ़र शुरु हुआ उस संगीतकार का जिसे बॉलीवुड में 'जीनियस' बुलाया जाता है.

संगीत गिफ़्ट है

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वो कहते हैं, "मैं काफ़ी अंतर्मुखी हूं और मैं सिर्फ़ इस बात पर फ़ोकस करता हूं कि मुझसे काम क्या मांगा जा रहा है."

वो कहते हैं कि संगीत बनाने का उनका कोई फ़ंडा नहीं है कि और न ही वो किसी ख़ास संगीत के मुरीद हैं. उनके अनुसार यह एक तोहफ़ा है जो किसी किसी को ही मिलता है और वो इसी तोहफ़े को सेलिब्रेट कर रहे हैं.

वो कहते हैं, "मुझे किसी ऐसे निर्देशक के साथ काम करने में मज़ा आता है जो एक सशक्त कहानी बता सके क्योंकि मज़बूत कहानी पर ही संगीत बनाने में चुनौती महसूस होती है और मज़ा भी आता है."

अमिताभ शर्मीले हैं

अमित एक टीवी धारावाहिक में अमिताभ बच्चन के साथ काम कर रहे हैं.

वो बताते हैं, "हमने पहले धुन बना ली जिसका आईडिया बच्चन साहब के दिमाग में पहले से ही था और मुझे बस उसे मूर्त रुप देना था."

वो आगे बोले, "धुन बन जाने के बाद हमने लिरिक्स भी कुछ देर में लिख लिए और फिर बच्चन साहब की गाने की बारी थी लेकिन वो रिकॉर्डिंग स्टूडियो में जाने को तैयार ही नहीं थे."

अमिताभ घर जाकर रिकॉर्डिंग की ज़िद कर रहे थे क्योंकि उन्हें लगता है कि रिकॉर्डिंग रुम में घुसते ही वो थोड़ा नर्वस हो जाते हैं.

डबस्टेप को लाए

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अमित को बॉलीवुड में डबस्टेप लाने का श्रेय जाता है.

साल 2012 में आई फ़िल्म 'इश्कज़ादे' के प्रोमो को बनाते वक़्त संगीत के टेंपो को नीचा रखना मुश्किल हो रहा था, वहीं उन्हें ख्याल आया कि 'डबस्टेप' का इस्तेमाल किया जा सकता है.

वो कहते हैं, "मुझे मालूम था कि अभी तक हिंदुस्तान में डबस्टेप पर किसी ने काम नहीं किया है, ऐसे में मेरे लिए निर्देशक हबीब फ़ैसल और निर्माता आदित्य चोपड़ा को मनाना बहुत आवश्यक था, लेकिन हैरानी की बात है कि वो मान गए."

अमित मानते हैं कि यशराज के साथ काम करने से उन्हें प्रयोग करने की आज़ादी मिली और आज बॉलीवुड में 'डबस्टेप' का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है.

कॉपी का इल्ज़ाम

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अमित पर धुन की कॉपी करने का भी इल्ज़ाम लग चुका है.

साल 2013 में 'लुटेरा' के संगीत के लिए उनकी काफ़ी तारीफ़ हुई लेकिन फिर थीम म्यूज़िक की चोरी के आरोप लगने लगे.

साल 2011 में संगीतकार रेचल पोर्टमैन के हॉलीवुड फ़िल्म 'वन डे' के लिए दिए संगीत से समानता को लेकर लोगों ने अमित को काफ़ी दोष दिया लेकिन अमित बीबीसी से बातचीत में इस मुद्दे पर ज़ोर देकर सफ़ाई देते हैं.

वो कहते हैं, "समस्या ये है कि आपके पास सुर वही सात हैं और यहां संयोग से हमारा संगीत मिल गया लेकिन मैं अपने संगीत की कसम खा कर कह सकता हूं कि मैंने कोई कॉपी नहीं की है और ये आरोप मुझे दुख देता है."

कोक स्टूडियो

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अभिजीत सांवत की पहली एल्बम के साथ अपने करियर की शुरुआत करने वाले अमित ने फ़िल्मों के साथ साथ कोक स्टूडियो के लिए भी काम किया है.

वो कोक को संगीत का सबसे बेहतरीन मंच मानते हैं क्योंकि यह अकेली ऐसी जगह है जहां आप बिना किसी रोक टोक, कहानी की मांग के संगीत तैयार कर सकते हो.

वहीं हनी सिंह के संगीत पर पूछे गए सवाल पर अमित पहले तो मुस्कुरा देते हैं और फिर कहते हैं, "मैं विश्व में मौजूद हर संगीत को सुनता हूं लेकिन रैप और हिप हॉप मुझे संगीत नहीं लगता, तो ये मेरे लिए नहीं है."

तभी उनके मैनेजर याद दिलाते हैं कि और भी इंटरव्यू लाईनअप हैं और वो हमसे विदा लेते हैं.

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