नंगे पांव दौड़ी और स्वर्ण पदक जीता

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14 साल की सायली माहिशुने मुंबई के इंटर स्कूल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 3000 मीटर की रेस में बिना जूतों के दौड़ीं और स्वर्ण पदक हासिल किया.

सायली के पिता जूतों की मरम्मत कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं.

कहते हैं कि जज़्बा हो तो किसी भी तरह का अभाव कामयाबी हासिल करने से नहीं रोक सकता. मुंबई की सयाली माहिशुने की जिंदगी यही संदेश देती है.

सायली के पिता मंगेश माहिशुने मुंबई के दादर इलाके में अपनी दुकान पर जूतों की मरम्मत कर रहे थे, जब उनकी बेटी इंटर स्कूल एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत कर आई.

मंगेश बीबीसी से बात करते हुए कहते हैं, "मुझे पता था कि मेरी बेटी प्रतियोगिता में भाग ले रही है लेकिन मैं दुकान छोड़कर उसका उत्साह बढ़ाने नहीं जा सकता था."

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46 वर्षीय मंगेश ने बताया, "सायली कई प्रतियोगिताओं में भाग लेती है. लेकिन रेस में पहनने वाले जूते काफी महंगे आते हैं और अपनी कमाई के हिसाब से मैं वह जूते नहीं खरीद सकता."

सायली अक्सर ऐसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती हैं और इनाम में मिलने वाली राशि पिता को सौंप देती हैं.

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सायली कहती हैं, "मुझे बिना जूतों के भागने की आदत पड़ गई है, मैं नहीं चाहती कि मेरे पिता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़े."

मंगेश बताते हैं, "मैं महीने में करीब 3,000 से 7,000 रुपए कमाता हूँ. इससे घर खर्च के बाद सायली और उसकी बड़ी बहन की पढ़ाई का खर्च भी पूरा करना होता है."

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सायली की बड़ी बहन सूचना प्रौद्योगिक में डिपलोमा की पढ़ाई कर रही है और उनकी मां घर संभालती हैं.

मुंबई के आरएम भट्ट स्कूल की 9वीं कक्षा में पढ़ रही सायली पीटी ऊषा को अपना आदर्श मानती हैं और उन्हीं की तरह विश्व स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं.

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