थ्री डी अंडा खाएंगे?

मुंबई के रामनारायण रूईया कॉलेज में बीए फ़र्स्ट-ईयर के छात्र सुशांत एस राणे काग़ज़ पर थ्री डी पेंटिंग्स उकेरते हैं.

महज 19 साल के सुशांत के सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम पर देश-विदेश से करीब साढ़े 52 हज़ार फॉलोअर्स हैं. ये सभी उनकी ख़ास क़िस्म की चित्रकारी के कायल हैं.

उनकी पेंटिंग को 'थ्री डी' पेंटिंग्स कहा जा रहा है. हालांकि, वो ख़ुद इसे 'रियलिस्टिक' पेंटिंग कहते हैं.

सुशांत ने बताया, "चित्रकारी तो मैं बचपन से ही कर रहा हूँ, लेकिन कभी थ्री डी पेंटिंग्स बनाने के बारे में नहीं सोचा था."

इस ख़ास क़िस्म की पेंटिंग के सफ़र के बारे में वे कहते हैं, “नए साल के मौक़े पर मैं कुछ नया शुरू करना चाहता था. इसलिए मैंने नवंबर 2015 से 'रियलिस्टिक' पेंटिंग बनानी शुरू कर दी. वही पेंटिंग्स थ्री डी पेंटिंग्स के नाम से मशहूर हो गईं.”

सुशांत कहते हैं, “मैं अपनी पेंटिंग्स में चीज़ों को हू-ब-हू वैसी ही शक्ल देने की कोशिश करता हूँ जैसी वह असल में होती हैं.”

वह अपने पेंटिंग्स को इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हैं. उनकी अब तक 298 पोस्ट्स में रोज़मर्रा की हर चीज़ जैसे छुरी, चम्मच, बल्ब की तस्वीरें शामिल हैं.

सुशांत चित्रकारी का विषय चुनते समय ज़्यादा नहीं सोचते. वो कहते हैं, “मैं बेतरतीब अंदाज़ से विषयों का चुनाव करता हूँ.”

वैसे तो सुशांत को एक तस्वीर बनाने में पूरा दिन लग जाता है, लेकिन पेंटिंग पूरी करने में कितना समय लगता है, यह उसकी बारीक़ियों पर निर्भर करता है.

कुचली हुई सॉफ्ट-ड्रिंक के कैन की तस्वीर को अब तक की सबसे मुश्क़िल तस्वीर बताते हैं. वो कहते हैं, "असली दिक्क़त इस कैन की सतह पर पड़ी सलवटों को काग़ज़ पर उतारने में हो रही थी.”

सुशांत 'गेम ऑफ़ थ्रोन्स', 'हाउस', 'द बिग बैंग थ्योरी' जैसी अमरीकन सिटकॉम्स और हॉलीवुड के कई नामचीन कलाकारों की तस्वीरें बना चुके हैं. लेकिन उन्होंने अभी तक किसी बॉलीवुड अभिनेता या अभिनेत्री की तस्वीर नहीं बनाई है.

इसकी वजह पूछने पर वो कहते हैं, “मैं हॉलीवुड को ज़्यादा फॉलो करता हूँ. इसलिए उनकी तस्वीर बनाता हूँ.”

सुशांत ने अपने पसंदीदा क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की तस्वीर भी अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर डाली है.

वे इसकी वजह बताते हुए कहताे हैं, "यह मेरी बनाई पहली तस्वीर थी. इसलिए वो मैंने पोस्ट का थी."

अपनी पसंदीदा पेंटिंग के बारे में वह कहते हैं, “मैंने एक कांच की चाय की प्याली बनाई थी. उसे बहुत लोगों ने पसंद किया.”

क्या वह तस्वीर बनानी मुश्क़िल थी? इसके जवाब में सुशांत कहते हैं, “कांच जैसी पारदर्शी चीज़ों की चित्रकारी मुश्क़िल नहीं, सबसे आसान होती है.”

अपने इस अनूठे काम से मिली लोकप्रियता के बारे में वे कहते हैं, “मैं फ़ेमस होना ही नहीं चाहता था. मैं सिर्फ़ अपना काम करने के साथ-साथ उस काम को एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर रहा था.”

वे पेंटिंग को पेशा नहीं, शौक़ मानते हैं, “पेंटिंग मेरे लिए काम नहीं है. यह मेरी इकलौती हॉबी है और मुझे हमेशा यही करना है.”

वहीं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी आर्टिस्ट को अपना आदर्श मानने की बात पर वह कहते हैं, “सच कहूं, तो मैं किसी बड़े आर्टिस्ट का नाम तक नहीं जानता.”

सुशांत खुद को एक 'सेल्फ़-टॉट आर्टिस्ट' बताते हैं, “मैंने जो सीखा है, वह ख़ुद से और ख़ुद की ग़लतियों से सीखा है, आगे भी सीखता रहूंगा.”

सुशांत अपने परिवार के प्रोत्साहन और साथ के लिए ख़ुद को बेहद शुक्रगुज़ार मानते हैं. वे बताते हैं, "मेरे माता-पिता ने हमेशा मेरा साथ दिया है. मुझे जितने कलर्स की ज़रूरत होती है, उतने लाकर मुझे देते हैं."

इस क्षेत्र में भविष्य से जुड़ी योजनाओं के बारे में वे कहते हैं कि योजनाएं बहुत हैं, जो पूरे होने पर ही दिखेंगी.

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