पाकिस्तान में 'मालिक' पर रोक

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पाकिस्तान में फ़िल्म 'मालिक' पर लगाई गई रोक को लेकर ट्विटर पर बहस छिड़ी हुई है.

विरोधी इसे हिंसा को बढ़ावा देने वाली फ़िल्म बताकर इसकी आलोचना कर रहे हैं. वहीं समर्थकों ने फ़िल्म पर प्रतिबंध को अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक बताया है.

फ़ेडरल सूचना मंत्रालय ने आशिर अज़ीम निर्देशित 'मालिक' पर रिलीज़ के तीन हफ़्ते बाद पूरे पाकिस्तान में रोक लगा दी.

27 अप्रैल को जारी अधिसूचना में पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इस फ़िल्म को अप्रमाणित घोषित कर दिया. उसके बाद से ही फ़िल्म को लेकर ट्विटर पर बहस शुरू हो गई.

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पत्रकार उमर क़ुरैशी ने ट्वीट किया- मैंने मालिक नहीं देखी और न देखने का कोई कार्यक्रम है लेकिन एक दृश्य में भ्रष्ट राजनेता को सुरक्षाकर्मी का गोली मारना गिरोहबंदी को बढ़ावा देता है.

राजनेता बिलावल भुट्टो ने कहा- हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर यक़ीन रखते हैं. इसलिए रोक को प्रोत्साहित नहीं करते, हालांकि पाकिस्तान मीडिया के इस नस्लीय भेदभाव दिखाने की हम निंदा करते हैं.

शहरयार तासीर का ट्वीट था- आईएसपीआर ऐसी फ़िल्म को फ़ायनेंस कर रही है, जो गिरोहबंदी के तहत राजनेताओं की हत्या को बढ़ावा देती है. यह पिछड़ी मानसकिता के मुल्लाओं की धारणा जैसा है.

सिंध के मुख्यमंत्री क़ायम अली शाह के फ़िल्म देखने के एक दिन बाद इस पर रोक लगा दी गई थी पर लोगों की आलोचना के बाद फ़ैसला वापस ले लिया गया था.

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फ़िल्म की कहानी एक भ्रष्ट राजनेता की है, जो सिंध का मुख्यमंत्री बन जाता है. फिर एक गार्ड उसकी हत्या कर देता है. सरकार ने फ़िल्म पर रोक लगाने की वजह नहीं बताई.

ख़बरों के मुताबिक़ इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशन (आईएसपीआर) ने फ़िल्म का समर्थन किया था. ये सशस्त्र सेना का मीडिया विंग है.

हालांकि सेना के सूत्रों ने आएसपीआर के इस फ़िल्म से किसी भी तरह से जुड़े होने का खंडन किया है. सूत्रों का कहना है कि संस्कृति मंत्रालय ने यह कहते हुए फ़िल्म पर रोक लगाई है कि ये हिंसा को बढ़ावा देने वाली एक पक्षपातपूर्ण फिल्म है.

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