महामारी सा बनता जा रहा है चिकुनगुनिया

Image caption लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, दिल्ली

धर्मेन्द्र, दिल्ली के कल्याणपुरी के इलाक़े में स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में सुरक्षा गार्ड हैं. मगर सिर्फ़ अस्पताल में काम करना उनके लिए काफ़ी नहीं था.

वे जिन डॉक्टरों को सुबह शाम 'सल्यूट' बजाया करते थे, उन्होंने धर्मेन्द्र की उस समय भी कोई मदद नहीं की जब वे नौ महीने की बेटी को गोद में लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे. चिकुनगुनिया से लड़ रही उनकी बेटी ने आखिरकार दम तोड़ दिया.

धर्मेंद्र ने बीबीसी से कहा, "मैं चार दिनों तक अपनी बेटी को लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा. मैंने डॉक्टरों से कहा कि मैं 'स्टाफ' हूँ. मगर उन्होंने मेरी बेटी को अस्पताल में दाखिल करने से इनकार कर दिया और दवाई देकर चलता कर दिया. "

वे कुछ तल्ख़ी से आगे कहते हैं, "मैं डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाता रहा, मगर उन्होंने एक नहीं सुनी. मैं बेटी को लेकर वापस चला गया, मगर उसकी तबियत और बिगड़ गई और उसने अस्पताल लाने के बाद दम तोड़ दिया."

Image caption चिकुनगुनिया से पीड़ित लोगों की भीड़ अस्पतालों में बढ़ती ही जा रही है

दिल्ली में चिकुनगुनिया और डेंगू महामारी का रूप धारण करते जा रहे हैं. शायद ही कोई ऐसा अस्पताल हो, जहां इन बीमारियों से ग्रस्त मरीज़ों की संख्या कम हो.

दिल्ली की सरकार का दावा है कि हालात क़ाबू में हैं और इन बीमारियों से निपटने के लिए सभी अस्पतालों में पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं. पर ज़मीनी हकीक़त सरकारी दावों के उलट है. लोगों को इलाज के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं.

अब तक चिकुनगुनिया से मरने वालों की संख्या दस तक पहुँच चुकी है और दिल्ली की सरकार का कहना है कि हालात क़ाबू में हैं. राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन का कहना है कि 'पैनिक' मीडिया वाले फैला रहे हैं."

Image caption तमाम कोशिशों के बावजूद धर्मेंद्र अपनी बेटी को नहीं बचा सके

उनका कहना है कि चिकुनगुनिया से किसी की जान नहीं जाती है.

दिल्ली के स्वस्थ्य मंत्री ने राजधानी में फैल रही गंदगी का ठीकरा दिल्ली नगर निगम के सर फोड़ा और कहा कि महामारी नगर निगम की उदासीनता की वजह से फैल रही है. उनका यह दावा भी है कि सभी अस्पतालों में मरीज़ों के इलाज के मुकम्मल इंतज़ाम हैं.

मंत्री चाहे जो कहें, पर दिल्ली के खिचड़ीपुर इलाक़े के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल का दौरा करने पर सरकार के दावों की पोल खुल जाती है.

Image caption दिल्ली के एक अस्पताल के बाहर चिकुनगुनिया से पीड़ित रोगी

यहाँ इलाज़ न होने से 15 साल के लड़के दीपक ने दम तोड़ दिया. रिश्तेदारों का कहना है कि जब दीपक को बुख़ार आया और हालत बिगड़ने लगी तो उसे अस्पताल में भर्ती करने की बजाय दवाई देकर वापस भेज दिया गया. घर लौटने पर दीपक की हालात और बिगड़ी. जब तक वापस अस्पताल लेकर जाते तब तक उसने दम तोड़ दिया.

इस अस्पताल के आसपास कई बस्तियां हैं, जो बुरी तरह चिकुनगुनिया और डेंगू की चपेट में हैं. सिर्फ लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की अगर बात की जाए तो लोगों का आरोप है कि यहां ना ख़ून की जांच सही समय पर हो पा रही है और ना ही दवाएं ही मुहैया की जा रही हैं.

Image caption चिकुनगुनिया के रोगी दीपक के रिश्तेदार

दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में दायर हलफ़ना में में कहा है कि 10 सितंबर तक चिकुनगुनिया के 1,158 मामले सामने आए. सरकार का यह भी कहना है कि इनमें से 804 मामले दिल्ली 354 दिल्ली के बाहर के हैं.

पर ज़मीनी हकीक़त कुछ और है. वो निजी अस्पताल हों या सरकारी, चिकुनगुनिया और डेंगू के मरीज़ों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है.

केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने अपने विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद कहा कि 'इंडिया फाइट्स डेंगू' नाम का एक मोबाइल ऐप लांच किया गया है. इसमे इस रोग के उपचार और सुविधाओं से जुड़ी तमाम जानकारियां हैं.

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