'मेरे नाम का डर मीडिया या भाजपा से आता है'

राष्ट्रीय जनता दल के नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का कहना है कि पत्रकार राजदेव की हत्या की जांच कर रही सीबीआई की टीम का वो पूरा सहयोग करेंगे.

देश की प्रमुख जांच एजेंसी का एक दल शुक्रवार को सीवान पहुँच चुका है और वो नए सिरे से पत्रकार हत्याकांड की जांच कर रहा है. इससे पहले मारे गए पत्रकार की पत्नी आशा देवी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से गुहार लगाई थी कि पूरे मामले की फिर से जांच होनी चाहिए.

वहीं शुक्रवार को ही सीवान पुलिस ने पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के एक आरोपी मोहम्मद कैफ की संपत्ति की कुर्की भी की. पुलिस का कहना है क्योंकि कैफ कई दिनों से फरार है इसलिए उसके घर की कुर्की करनी पडी. मामले में राजनीतिक घमासान तब शुरू हुआ जब कैफ को एक वीडियो में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के साथ दिखाया गया.

बीबीसी से बात करते हुए मोहम्मद शहाबुद्दीन का कहना था कि वो जांच में हर तरह का सहयोग करेंगे.

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हालांकि उनका कहना था कि पत्रकार हत्याकांड के आरोपी मोहम्मद कैफ के साथ भारतीय जनता पार्टी के भी कई बड़े नेताओं की तस्वीरें देखने को मिल रही हैं.

शहाबुद्दीन पर 63 के आस-पास मामले दर्ज हैं, मगर उनका कहना है कि इनमें से सिर्फ एक मामले में ही उन्हें सीधे तौर पर अभियुक्त बनाया गया है. उनका यह भी कहना है कि उनके खिलाफ ज़्यादातर मामले राजनीति से प्रेरित हैं.

वो कहते हैं, ''मेरे खिलाफ़ बिजली चोरी तक का मामला दर्ज किया गया है और बिजली चोरी के इलज़ाम में मुझे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया. फिर हवाई जहाज़ से पटना लाया गया और फिर वहां से हेलीकॉप्टर से सीवान अदालत में पेशी के लिए लाया गया और फिर हेलीकॉप्टर से ही जेल ले जाया गया. कभी सुना है बिजली की चोरी करने के आरोप में किसी के साथ कभी ऐसा किया गया हो. "

शहाबुद्दीन पर आरोप है कि जेल में रहते हुए भी वो अपना साम्राज्य चलाते रहे. यहां तक की जेल में वो दरबार भी लगाया करते थे.

इस पर शाहबुद्दीन ने बीबीसी से कहा, ''जेल में जब उनसे उनकी पार्टी का कोई बड़ा नेता मिलने आता था तो कारापाल के कक्ष में ही बैठाया जाता था.''

उनका कहना है कि ऐसा करना 'जेल मैन्युअल' में है.

इसके अलावा भी उन पर, जेल में रहते हुए कई हत्याओं की साज़िश रचने का आरोप है, जिसमें चंद्रकेश्वर प्रसाद के पुत्रों की हत्या और इस मामले के गवाह की हत्या की साज़िश का भी आरोप लगाया गया है.

शहाबुद्दीन कहते हैं, ''इस हत्या में उनका नाम 'ज़बरदस्ती घसीटा गया है, जबकि पूरा मामला ज़मीन की ख़रीद बिक्री से जुड़ा हुआ है जिससे उनका कोई लेना-देना नहीं है.''

वहीं चंद्रकेश्वर प्रसाद की तरफ से जाने माने वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि मोहम्मद शहाबुद्दीन को ज़मानत पर रिहा करने से मामले की जांच प्रभावित हो सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और सोमवार को इसपर फैसला भी आ सकता है.

प्रशांत भूषण की याचिका के बारे में पूछे जाने पर शहाबुद्दीन कहते हैं, "यह न्यायिक प्रक्रिया है. मुझे ज़मानत अदालत ने दी है. इससे ज़्यादा मुझे इसपर और कुछ नहीं कहना है."

वैसे 'डॉन' शब्द पर शहाबुद्दीन को 'आपत्ति' है.

उनका मानना है कि मीडिया वालों ने ही उनकी छवि को 'डॉन' के रूप में पेश किया. वो इस शब्द से नाराज़ हो जाते हैं और कहते हैं, "डॉन क्या है. इस शब्द से सिर्फ मुझे ही नहीं, सबको आपत्ति है. डॉन को परिभाषित कीजिए आखिर डॉन होता क्या है? अगर मैं उस परिभाषा में आता हूं तो ठीक है. मेरे नाम का डर आता कहाँ से है? मीडिया से या भाजपा के ऑफिस से ?"

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