'सैनिक बनना है..दुश्मन से बदला लेना है'

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Image caption जबरा मुंडा

मिराल में दोपहर की बारिश ऐसे लग रही थी मानो आसमान रो रहा हो. गांव में दो-दो चार-चार लोगों की टोलियां अलग-अलग खड़ी थीं, कुछ गाड़ियां भी थीं, एंबुलेंस और मोटरसाइकिलें भी...

इस गांव के जबरा मुंडा उड़ी में सेना के बेस कैंप मे हुए हमले में मारे गए थे. इसी कारण गांव में बाहर के कई लोग आए और माहौल गमगीन-सा था.

मिराल झारखंड के नक्सल प्रभावित खूंटी जिले का हिस्सा है.

सोमवार की सुबह 9 बजे लोग अपने-अपने काम में लगे थे. जबरा मुंडा की पत्नी झिंगी धनवार बेटियों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थीं. मिट्टी के चूल्हे पर भात का तसला चढ़ा था. सब्जी पहले ही बन गई थी.

तभी उनके फोन की घंटी बजी और इस घंटी ने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया.

फोन झिंगी के देवर दाउद मुंडा ने उठाया. यह फोन आर्मी हेडक्वार्टर से था. उन्हें बताया गया कि उड़ी में हुए फिदायिन हमले में उनके भाई जबरा मुंडा भी मारे गए हैं. उनका शव गांव भेजे जाने की तैयारी की जा रही है. दाउद अपने आंसू नहीं रोक पाए और यह खबर जबरा मुंडा की पत्नी झिंगी धनवार तक पहुंच गई. कुछ ही देर में चूल्हे की आग बुझा दी गई.

अगले 10 मिनटों में घर के आगे गांव भर के लोग थे. इस बात की मुनादी हो चुकी थी कि जबरा मुंडा अब जिंदा नहीं हैं. जबरा मुंडा पिछले 16 अगस्त को यहां से कश्मीर रवाना हुए थे. जाते वक्त कहा था कि दिसंबर में फिर से घर आएंगे.

सात दिन पहले पत्नी से बात हुई तो उन्होंने फोन पर झिंगी धनवार को चंद हिदायते दी थीं. पहली यह कि अगले 1 अक्टूबर को होने वाली सेना की भती में दाउद मुंडा को भी जाना है. इसके लिए वे खूब प्रैक्टिस करें. दाउद इसके लिए प्रैक्टिस कर रहे थे.

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दाउद मुंडा ने बीबीसी को बताया- ''सर हमको सैनिक ही बनना है. भैया बोले थे कि तैयारी करो. हम रोज़ दौड़ लगा रहे हैं. अब भैया नहीं रहे तो उनके सपनो को पूरा करना है. दुश्मनों से बदला भी लेना है. इसलिए 1 अक्टूबर को सेना की बहाली में जाऊंगा."

जब मैंने जबरा मुंडा की 80 साल की मां सलोमी मुंडा से पूछा कि क्या अब आप दाउद को सेना मे जाने देंगी, तो सलोमी मुंडा ने बीबीसी से कहा- ''भेजबै बउआ. जरुर भेजबै. (जरुर भेजूंगी. उसे भी सैनिक बनाना है.) अब उसी का आसरा है."

उनके पति गौड़ मुंडा का देहांत चार साल पहले हो गया था. जबरा मुंडा की तीन बेटियां हैं.

अब घर में पुरुष सदस्य दाउद मुंडा से ही सबकी उम्मीदें जिंदा हैं. जबरा मुंडा की पत्नी झिंगी धनवार को स्लाइन चढ़ायी जा रही है. प्रशासन ने उनकी देखरेख के लिए डाक्टरों और नर्सों की टीम लगा रखी है.

झिंगी धनवार रो रही हैं, लेकिन उन्हें जिंदगी चलाने की चिंता भी है. उनका एक भाई लक्ष्मण मुंडा भी सेना में था. कुछ वर्ष पहले उसकी मौत हो गई.

मैंने झिंगी से पूछा- ''क्या आपको पता था कि कश्मीर में सैनिकों पर हमला हुआ है.'' जवाब मिला- ''नहीं.''

झिंगी ने बीबीसी से कहा- ''हमारी बेटियों की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था हो. देवर को नौकरी मिले. मैं अपने पति को देखना चाहती हूं. अफसर साहब को बोलिए कि उनका शव जल्दी से ला दें...''

खूंटी के एसडीपीओ रणवीर सिंह ने बीबीसी को बताया कि जबरा मुंडा का शव मंगलवार सुबह मिराल लाया जा सकेगा. सोमवार रात उनका शव रांची के आर्मी कैंप मे रखा जाएगा, जहां राज्य के अधिकारी और नेता उन्हें श्रद्धांजलि देंगे. सैन्य और विधायी औपचारिकताओं के बाद उनके शव को रांची से मिराल के लिए रवाना किया जाएगा.

झिंगी धवनार को अपने पति का चेहरा देखने के लिए रात भर इंतजार करना पड़ेगा. यह रात कैसे कटेगी, इसका उन्हें अंदाजा नहीं हैं. गांव की औरतें उनसे नींबू का शऱबत पीने का अनुरोध कर रही हैं, ताकि उन्हें बेहोश होने से बचाया जा सके.

इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उड़ी हमले मे मारे गए सैनिकों के परिजन को 10-10 लाख रुपये देने की घोषणा की है. झारखंड के एक और जवान नाइमन कुजूर भी उड़ी हमले में मारे गए हैं. वे गुमला जिले के चैनपुर के रहने वाले हैं.

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