'मोदी जी बैठे रहे तो कितने मारे जाएंगे'

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रविवार को भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी सेक्टर में हुए चरमपंथी हमले में मारे गए 18 जवानों में से तीन उत्तर प्रदेश के थे.

उत्तर प्रदेश के तीन जनपदों में इनकी मौत का मातम है. वहां मारे गए जवानों के घर पर रिश्तेदारों, पड़ोसियों, मीडिया और पुलिस का जमावड़ा लगा हुआ है.

जौनपुर

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जौनपुर भकुरा गांव के सिपाही राजेश कुमार सिंह के गांव में उनकी मौत की ख़बर के बाद से ही मातम छाया हुआ है. राजेंद्र कुमार सिंह के तीन बेटों में सबसे छोटे, राजेश छह साल पहले सेना में भर्ती हुए थे.

उनके पिता राजेंद्र बताते हैं, "पंद्रह सितम्बर को राजेश से अंतिम बार बात हुई थी. जहां उनकी पोस्टिंग हुई थी, वहां से बात हो पाने में परेशानी होती थी. इसलिए जब कभी राजेश का मिस्डकॉल आता था तो यहां से कॉलबैक करना पड़ता था."

राजेंद्र सिंह ने रोते हुए बताया कि रेडियो पर हमले की ख़बर तो मिली, लेकिन कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया. फिर घर जब पुलिस आई तो पूरी जानकारी मिली.

घर पर राजेश की बीवी और एक बच्चा भी है.

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राजेश की माँ परमावती का रो रोकर बुरा हाल है.

राजेश के गांव के प्रधान आशुतोष सिंह बताते हैं कि राजेश बहुत ही मिलनसार और अच्छे स्वभाव के थे. उनकी मौत से पूरा गांव उदास है.

ग़ाज़ीपुर

मारे गए जवानों में ग़ाज़ीपुर के देवपुर गांव के हरेंद्र यादव भी हैं. उनके पिता केदार यादव किसान हैं. हरेंद्र उनके छह बेटों में पांचवे बेटे थे. वो 2007 बैच के बिहार बटालियन में भर्ती हुए थे और उड़ी सेक्टर में तैनात थे.

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साल 2009 में ही हरेंद्र की शादी निर्मला यादव से हुई थी. हरेंद्र के दो बेटे भी हैं - चार साल के रोहित और दो साल के राज.

हरेंद्र के छोटे भाई नरेंद्र कहते हैं, "अब पाकिस्तान को उसी के अंदाज़ में जवाब देने का वक़्त है. पाकिस्तान का ये भारत पर सीधा हमला है. हरेंद्र और उनके साथियों की शहादत खाली नहीं जानी चाहिए."

ग्राम प्रधान पूंजेश सिंह ने बताया कि हरेंद्र बहुत जांबाज़ थे. जब वो होली के वक़्त घर आया थे, तो पड़ोस के राजेद्र राजभर के घर आग लग गई थी. हरेंद्र ने अपनी परवाह किए बग़ैर न केवल दो मासूम बच्चों को बचाया था, बल्कि मवेशियों को भी सही सलामत निकाल लाया था.

बलिया

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35 साल के लांस नायक राजेश कुमार यादव बलिया के दुबहर थाना क्षेत्र के रहने वाले थे. उनकी मौत की ख़बर से वृद्ध मां सोमारिया देवी और पत्नी पार्वती देवी अब भी अंजान हैं, लेकिन गांव में मातम का माहौल है.

बिहार रेजिमेंट के जवान राजेश कुमार यादव बीस दिन पहले ही दो महीने की छुट्टी बिताकर गये थे. शनिवार को ही राजेश ने घर फोन करके सबका हालचाल लिया था और बताया था कि उनका कैंप और ऊपर जाने वाला है, इसलिए अब बात हो पाना मुश्किल है.

उनकी दो बेटियां भी हैं. आठ साल की प्रीति और दो साल की राधिका. राजेश के पिता देव किशुन यादव की क़रीब 12 साल पहले मृत्यु हो गई थी. मां सोमारिया देवी दिल की मरीज हैं. अपने परिवार में राजेश ही अकेले कमाने वाले थे.

राजेश के भाई विकेश ने कहा, "अगर मोदी जी यूं ही हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे, तो न जाने और कितने जवान मारे जाएंगे."

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