तकनीक की मदद से सुनिए कहानियां

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कभी भारत को क़िस्से-कहानियों का देश कहा जाता था. यहां जीवन के हर अंग में कहानियां रक्‍त की तरह बसी रही हैं. फिर जीवन की प्राथमिकताएं बदलीं और कुछ समय का अभाव, हमने कहानियों से दूरी बना ली.

भले ही हमने कहानियों को छोड़ दिया लेकिन कहानियों ने हम तक पहुँचने का नया रास्ता तलाश लिया है. थोड़े पारंपारिक और थोड़े आधुनिक अंदाज़ में कहानियां आपके दरवाज़े पर फिर से खड़ी हैं. कुंडी खोलिए या एक क्लिक कीजिए पहुंचेंगे आप उसी दुनिया में. मगर कैसे? आइए हम आपको आपको बताते हैं.

'ऐप' के ज़रिए सुनिए कहानियां

कहानियों की पूरी दुनिया अब सिमट कर आपके फ़ोन में समा गई हैं. पढ़ने से ज्‍यादा लोगों में कहानियां सुनने का क्रेज़ है. रूहानी आवाज़ में जब एहसास भरे शब्‍द कानों के रास्‍ते दिल तक पहुंचते हैं तो आप उस अद्भुत संसार में प्रवेश कर जाते हैं जिसे कहानियों की दुनिया कहते हैं.

इस वक़्त कई म्यूज़िक ऐप आपको कहानियों के इसी संसार की सैर करा रहे हैं.

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'सावन' और 'गाना' के म्‍यूज़िक ऐप पर महशूर आवाज़ें आपको कहानियों तक ले जाती हैं.

'सावन' पर आपको मिलेगा 'क़िस्‍सों का कोना' विद 'नीलेश मिश्रा' शो जहां रेडियो के ज़रिए लंबे समय तक श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाले 'स्‍टोरी टेलर' नीलेश मिश्रा आपको अपनी राइटर मंडली की लिखी कहानियां रोज़ अपनी आवाज़ में सुनाते हैं. इन कहानियों में आपको मिलेंगी रिश्‍ते, प्‍यार, दोस्‍ती और तमाम एहसासों में लिपटी कहानियां लेकिन अगर आप थोड़े आध्यात्मिक हैं तो आपके लिए 'टाइम मशीन' का विकल्प भी मौजूद है.

इसमें आपको पौराणिक कहानियां सुनने को मिलेंगी. इसके अलावा 'एक कहानी ऐसी भी' के नाम से अन्‍य शो चल रहा है जिसमें आरजे प्रवीण हॉरर कहानी सुनाते मिलेंगे. इसी तर्ज पर 'गाना' ऐप पर 'कहानीबाज' शो काफ़ी पसंद किया जा रहा है जिसमें अभिनेता आशीष विद्यार्थी कहानी पढ़कर सुनाते हैं.

आशीष का कहानी सुनाने का रोचक अंदाज़ श्रोताओं के रोंगटें खड़े कर देता है. युवा लेखकों की नई लेखन शैली लोगों को पसंद भी आ रही है. इन तमाम ऐप के ज़रिए आप कहानियां सुनते हैं जबकि इसके अलावा गूगल प्ले में कहानियों के कई ऐप आपका इंतज़ार कर रहे हैं, जहां आप अपनी पसंद की कहानियां कभी भी पढ़ सकते हैं. पंचतंत्र, बच्‍चों की कहानियां, अकबर बीरबल की कहानियों सहित तमाम तरह की कहानियों के ऐप यहां उपलब्‍ध हैं.

वेबसाइट और यूटयूब के रास्‍ते कहानियां

आजकल ऑनलाइन पढ़ने का क्रेज़ काफ़ी बढ़ रहा है. कभी भी कहीं भी फ़ोन में पसंदीदा साइट खोली और पढ़ना शुरू.

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अच्‍छा और पठनीय साहित्‍य आम पाठकों तक पहुंचने की राह आसान करती यें साइट्स बेहद पसंद भी की जा रही हैं. www.hindisamay.com, www.gadhkosh.org, www.hindi.sahityasarita.org , www.laghukatha.com सहित कई ऐसी साइट्स हैं जहां हिंदी के मशहूर लेखकों और कवियों की लेखनी नई पीढ़ी तक पहुँच रही है.

इन साइट्स पर विदेशी लेखकों की बेहतरीन रचनाओं का अनुवाद भी उपलब्‍ध है. लेखक विमल कुमार पांडेय कहते हैं, "किताबों का क्रेज कभी ख़त्म नहीं हो सकता लेकिन आज के समय में जब आपको दुनिया जहान के बारे में अच्‍छा लिखना पढ़ना होता हैं तो ये साइट्स आपके बेहद काम आती हैं जहां आप बड़े-बड़े लेखकों की अलग-अलग रचनाओं को बिना किसी अतिरिक्‍त ख़र्च के पढ़ सकते हैं. "

साइट्स के अलावा यू ट्यूब पर भी कहानियां परोसी जा रही हैं. कहानियों को रोचक ढंग से एनीमेशन के ज़रिए बच्चों तक पहुँचाया जा रहा है.

पेशेवर उषा चक्रवर्ती कहती हैं, "टीवी चैनल पर काटूर्न की बजाय बच्‍चे इन कहानियां को देखकर ज्‍यादा सीखते हैं. कई बार हम बच्‍चों को वो सब नहीं सिखा पाते जो ये कहानियां सिखा देती हैं."

मंच पर मुस्कुराती कहानियां

कुछ कहानियां किताबों से निकल स्‍टेज पर चलती फिरती दिखती हैं. ऐसे ही सफ़र करती कहानियों का घर है स्‍टोरीघर.

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स्‍टेज पर हल्‍की लाइट, दिलकश संगीत के साथ कहानी के पात्रों को विभिन्‍न आवाज़ों से जीवित कर देने की कला है लाइव स्‍टोरी टेलिंग.

इसी विधा को दिल्‍ली का स्‍टोरीघर देश भर लोकप्रिय बनाने में जुटा है. क़रीब पांच साल पहले शुरू हुए लाइव कहानियों के इस सिलसिले को शुरू करने वाली जयश्री सेठी के मुताबिक़ लाइव कहानियों में ह्यूमन होता है. यहां सुनने और सुनाने वाले के बीच एक रिश्‍ता बनता है. दरअसल कहानियां लोगों को जोड़ती हैं. आज के माता-पिताओं के पास बच्‍चों के लिए वक़्त नहीं जबकि सच ये है कि कहानियां बच्‍चों की कल्‍पना शक्ति बढ़ाने के लिए बेहद ज़रूरी हैं.

सोलह सालों तक थियेटर, रेडियो और टेलीविज़न से जुड़ी रही सेठी कहती हैं, "जब आप बच्‍चों को कहानियां सुनाते हैं तो वो आपके शब्‍दों के साथ एक तस्‍वीर बनाते चलते हैं इससे उनकी कल्‍पनाशक्ति बढ़ती है और वे खुद चीजों को गढ़ने लगते हैं. कहानियां 'सुनने की कला' का विकास करती हैं." स्‍टेज पर कहानी सुनाने में कई बार बच्‍चों से सवाल किए जाते हैं तो उनके जवाब और कल्‍पना से रची कहानी के अंश को सुन मैं हैरान रह जाती हूं."

रीडर ही नहीं राइटर के लिए भी यह स्‍टेज

पढ़ते-पढ़ते कई बार आप लिखने लगते हैं या कई बार लिखते तो हैं लेकिन कहीं छपवा नहीं पाते हैं. www.storymirror.com ऐसे ही राइटर और रीडर को ग्‍लोबल मंच उपलब्ध कराता है.

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लोगों में पढ़ने की रूचि जगाने के उद्देश्य से बेस्‍ट राइटर को सम्‍मानित भी करता है. डेढ़ साल पहले शुरू हुई इस साइट के शुरू होने की कहानी भी रोचक है. फाउंडर बिभुदत्‍त राउत बताते हैं, "मैं बेंकिग में था लेकिन लिखने का शौक़ था. पहली किताब लिखकर छपवाने गया तो प्रकाशक ने पैसे की मांग कर दी. तब मुझे समझ आया कि लिखनाभर काफी नहीं लिखा हुआ पढ़वाने में भी मशक्‍कत करनी पड़ती है. बस तभी से खुद की पब्लिकेशन शुरू करने की सोच ली."

उन्होंने नौकरी छोड़ स्‍टोरी मिरर शुरू किया और देखते ही देखते आज तीस लाख लोग इनकी साइट को पढ़ रहे हैं जबकि 5000 स्‍टोरी राइटर और आर्टिस्‍ट इनके साथ जुड़े हैं. हिंदी अंग्रेजी के अलावा ओड़िया भाषा में यहां कहानी और कविताएं उपलब्‍ध हैं.

राउत बताते हैं कि यह मंच सबके लिए खुला है कोई भी साइट पर जाकर अपना अकाउंट खोल अपनी रचनाएं पोस्‍ट कर सकता है.

स्‍टोरी मिरर के सहसंस्थापक देवेन्‍द्र जयसवाल कहते हैं, "देश के विकास के लिए जरूरी है कि लोग पढ़ें. उन्‍होंने बताया जल्‍द ही मराठी सहित कई अन्‍य भाषाओं में भी रचनाओं भी शामिल किया जाएगा."

स्थानीय समू में कहानीपाठ

रांझणा और तनु वेड्स मनु जैसी फ़िल्‍मों में अभिनय करने वाले ज़ीशान अयूब ख़ान कहते हैं कि हज़ारों सालों से हम कहानियां सुन रहे हैं और कहानियों के ज़रिए ही हमने ज़िंदगी जीना सीखा है.

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ज़ीशान मुंबई में बीइंग एसोसिएशन नाम से एक ग्रुप चलाते हैं जहां हर महीने मंच से कहानी पाठ किया जाता है.

वो कहते हैं कि हमारे ग्रुप में कोई भी व्‍यक्ति कहानी पाठ करने और सुनने के लिए आ सकता है. प्रत्‍येक महीने के आख़िरी शनिवार और रविवार को किए जाने वाले इस कहानी पाठ में ना केवल नामी लेखकों और कवियों को बल्कि ऐसे राइटरों को भी पढ़ा जाता है जिन्‍हें बेशक प्रसिद्धि के पैमाने पर ऊपर ना रखा जा सके लेकिन उनकी रचनाएं शानदार लेखन की मिसाल हैं.

ऐसा ही एक और ग्रुप है जिसका नाम है 'अवंतिको'. इसे लेखक और अभिनेत्री विभा रानी चलाती हैं.

विभा बताती हैं, "हर व्‍यक्ति के भीतर एक कलाकर होता है वो किसी भी रूप में हो सकता है. कई बार बच्‍चे श्रोता बनकर आते हैं लेकिन अन्‍य बच्‍चों या बड़ो की परफॉर्मेंस देखकर वे उत्‍साहित होते हैं और अगली बार अपनी प्रस्‍तुति देते हैं."

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