कोझीकोड बीजेपी बैठक पर उड़ी की छाया

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भारतीय जनता पार्टी ने कोझीकोड में राष्ट्रीय परिषद की बैठक की योजना तब बनाई थी जब राजनीतिक बिसात पर मोहरे दूसरे थे. पार्टी की नज़र अगले साल के विधानसभा चुनावों पर थी, पर उड़ी हमले से कहानी बदल गई है.

देश का ध्यान अब इस बात पर है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार की रैली में पाकिस्तान को क्या संदेश देंगे. और पार्टी की नजरें इस बात पर हैं कि इस घटनाक्रम को चुनावों से किस तरह जोड़ा जाए. पाकिस्तान के साथ टकराव अक्सर केन्द्र की सरकारों की मदद करता रहा है.

परम्परा है कि राष्ट्रीय नेता सम्मेलन के समापन पर भाषण देता है, पर यहाँ मोदी के संदेश के साथ विषय प्रवर्तन होगा. प्रधानमंत्री वहाँ दो दिन रुकेंगे और रविवार को भी पार्टी के नेताओं को संबोधित करेंगे.

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क़यास लग रहे हैं कि हम युद्ध की ओर तो नहीं बढ़ रहे हैं. बहरहाल अगले दो दिन कोझीकोड राष्ट्रीय राजनीति के केन्द्र में रहेगा. और भारतीय जनता पार्टी केरल को जताने की कोशिश करेगी कि हमने यहाँ पक्का खूँटा गाड़ दिया है.

पार्टी दक्षिण की जनता को अपनी संगठनात्मक क्षमता दिखाना चाहती है. पिछले साल बीजेपी ने दावा किया था कि उसके पंजीकृत सदस्यों की संख्या 10 करोड़ पार कर गई है. दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी केरल के दरवाजे पर खड़ी है.

कोझीकोड में पार्टी के महत्वपूर्ण पदाधिकारी, सांसद और राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद होंगे. यह वृहत् समागम दक्षिण में पैर जमाने की कोशिश का हिस्सा है. इन पाँच राज्यों से लोकसभा की कुल 129 सीटें हैं, जिनमें से 21 बीजेपी के पास हैं. कर्नाटक की 17 अलग कर दें तो बाक़ी 101 में से 4 सीटें उसके पास हैं. यानी दक्षिण में सम्भावनाओं का बड़ा सागर है.

दीन दयाल उपाध्याय सन 1967 में कोझीकोड में ही जनसंघ के अध्यक्ष बने थे. जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक आधार को दीन दयाल उपाध्याय ने परिभाषित किया था. उपाध्याय जी के अध्यक्ष बनने का पचासवाँ साल होने के अलावा यह उनका शताब्दी वर्ष है.

उन्हें याद करने के लिए पार्टी को कोझीकोड उपयुक्त जगह लगी. पर ज़्यादा महत्वपूर्ण है केरल जहाँ इस साल पहली बार पार्टी ने विधानसभा में प्रवेश किया है. इस एक सीट से ज्यादा महत्वपूर्ण है 10.53 फ़ीसदी का वोट शेयर.

इस वक्त हर तरफ़ पाकिस्तान की चर्चा है, ज़ाहिर है वहां भी, पर राष्ट्रीय परिषद में राजनीतिक और आर्थिक सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे. पार्टी का ध्यान उत्तर प्रदेश पर हैं, जहाँ वह दलितों के एक हिस्से को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.

उसकी योजना में उत्तर प्रदेश एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को निर्णायक जीत दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की थी. और जहाँ का वोटर भारत-पाकिस्तान रिश्तों को लेकर बेहद संवेदनशील है.

बीजेपी को दक्षिण के अलावा पूर्वोत्तर में भी वह 'शून्य' दिखाई पड़ता है, जिसे भरा जा सकता है. विधानसभा चुनाव में असम में मिली जीत ने पार्टी के लिए रास्ता खोल दिया. अरुणाचल कांग्रेस में हुई बग़ावत ने दूसरा दरवाज़ा खोला.

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संयोग था या कोई योजना, पिछले हफ्ते अरुणाचल कांग्रेस में पहले से भी बड़ी बगावत हो गई. वहाँ पीपुल्स पार्टी ऑफ़ अरुणाचल की सरकार है, पर कोझीकोड में यह तय होगा कि बीजेपी इसमें शामिल हो या नहीं.

नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) के संयोजक हिमंता बिस्व सरमा ने हाल में कहा था कि कोझीकोड में फ़ैसला होगा कि खांडू सरकार को बाहर से समर्थन दें या सरकार में शामिल हों.

उधर संसद के पिछले सत्र में जीएसटी से जुड़ा संविधान संशोधन पास होने के बाद अब उसे लागू कराने की ज़िम्मेदारी पार्टी पर है. जीएसटी काउंसिल बन गई है, जिसने अपनी पहली बैठक में इसे लागू करने के लिए 1 अप्रैल की तारीख़ तय कर दी है.

सरकार ने बजट जल्द पेश करने का फ़ैसला किया है. रेल बजट को आम बजट के साथ जोड़ दिया गया है. इस साल बारिश अनुमान से कुछ कम होने के बावजूद खरीफ़ की फ़सल बेहतर होने और 13.5 करोड़ टन अन्न का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद है.

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नरेन्द्र मोदी ने 2014 का चुनाव पाकिस्तान के नाम पर नहीं लड़ा था. पर कश्मीर आंदोलन ने हालात बदल दिए. बहरहाल अब सरकार के पास विदेश, राजनीति और अर्थव्यवस्था की फ़सल काटने का मौका है.

शायद ऐसे ही कुछ संकेत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दें!

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